Punjab News: पंजाब में बिजली उत्पादन को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंता के बादल मंडराने लगे हैं। बठिंडा जिले के गांव लेहरा मोहब्बत में स्थित गुरु हरगोबिंद थर्मल प्लांट (GHTP) की चार में से तीन यूनिट पिछले करीब 15 दिनों से ठप पड़ी हैं। कुल 920 मेगावाट की भारी-भरकम क्षमता वाले इस प्रमुख थर्मल प्लांट की अधिकांश यूनिटों के लंबे समय से बंद रहने के कारण राज्य में बिजली आपूर्ति को लेकर असहज स्थिति पैदा हो गई है। वर्तमान में इस प्लांट से केवल एक ही यूनिट चालू है, जिसके जरिए बमुश्किल 167 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है।
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जून माह में भी ठप हो चुकी हैं सभी चारों यूनिट्स
स्मरण रहे कि इससे पहले जून के महीने में भी जीएचटीपी की चारों यूनिट्स एक साथ बंद हो गई थीं, जिसके चलते पूरे राज्य में बिजली संकट और उसकी निर्बाध आपूर्ति को लेकर बड़े सवाल खड़े हुए थे। अब एक बार फिर से प्लांट की तीन यूनिटों के लंबे समय तक बंद रहने से बिजली प्रबंधन के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
आउटसोर्स कर्मचारियों की हड़ताल से प्रभावित हुआ कामकाज
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्लांट में बड़े पैमाने पर कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के अचानक हड़ताल पर चले जाने के कारण थर्मल प्लांट के कई बेहद महत्वपूर्ण तकनीकी और प्रशासनिक कार्य बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। यूनियन नेता जगसीर सिंह भंगू ने इस संदर्भ में जानकारी देते हुए बताया कि प्लांट में लगभग 1,800 मजदूर हड़ताल पर चले गए थे, जिसका सीधा और गंभीर असर थर्मल प्लांट के दैनिक कामकाज पर पड़ा है।
कर्मचारियों की मुख्य और लंबे समय से चली आ रही मांग यह है कि उनकी सेवाएं किसी थर्ड पार्टी ठेकेदार के माध्यम से आउटसोर्स करने के बजाय सीधे तौर पर पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के माध्यम से ली जानी चाहिए। यूनियन नेता ने यह भी बताया कि उनकी यूनियन से लगभग 700 सदस्य जुड़े हैं। हालांकि यूनियन द्वारा हड़ताल वापस लिए जाने के बाद कर्मचारी अपने काम पर लौट आए हैं, लेकिन इसके बावजूद फ्लाई ऐश (राख) इकट्ठा करने और रैक से कोयला उतारने जैसे अति महत्वपूर्ण कार्य अभी भी सुचारू रूप से नहीं हो पा रहे हैं, जिससे प्लांट के सामान्य संचालन में भारी बाधा आ रही है। वहीं, जीएचटीपी के चीफ इंजीनियर सत प्रकाश सिंह ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि ये तीनों यूनिटें कुछ तकनीकी समस्याओं और मजदूरों की हड़ताल के मिलीजुली वजहों से बंद रही हैं।
तलवंडी साबो थर्मल प्लांट के बाहर मजदूरों का अनिश्चितकालीन धरना
दूसरी ओर, मानसा जिले के बनावाला गांव में स्थित 1,980 मेगावाट की विशाल क्षमता वाले तलवंडी साबो पावर लिमिटेड थर्मल प्लांट के बाहर भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। यहाँ स्थानीय किसानों के पूर्ण समर्थन के साथ मजदूरों ने गुरुवार से अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इन प्रदर्शनकारी मजदूरों की मुख्य मांग है कि उनके न्यूनतम वेतनमान में कम से कम 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाए। मजदूरों ने दो टूक चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका यह संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।
एक तरफ लेहरा मोहब्बत थर्मल प्लांट की तीन यूनिटों का बंद रहना और दूसरी तरफ तलवंडी साबो थर्मल प्लांट के बाहर चल रहा मजदूरों का यह उग्र आंदोलन, दोनों मिलकर पंजाब में बिजली उत्पादन और औद्योगिक शांति के मोर्चे पर एक गंभीर संकट का संकेत दे रहे हैं।
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