Punjab News: पंजाब में सरकारी कर्मचारियों द्वारा शुरू की गई महा हड़ताल के बीच राज्य की सियासत और प्रशासनिक हलचल काफी तेज हो गई है। लंबित महंगाई भत्ते (DA) और अन्य पुरानी मांगों को लेकर प्रदेशभर के कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है, जिसके चलते सरकारी कामकाज और स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कर्मचारी संगठनों को स्पष्ट और कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि सरकार बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन यह प्रक्रिया हड़ताल समाप्त होने के बाद ही शुरू की जाएगी।
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जालंधर में होनी थी बैठक, हड़ताल से ठप पड़े सरकारी कामकाज
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान को गुरुवार (27 अगस्त) को जालंधर में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं और मांगों पर विस्तृत चर्चा करनी थी। लेकिन, इससे पहले ही पंजाब के सरकारी कर्मचारियों ने अपनी लंबे समय से चली आ रही मांगों को मनवाने के लिए राज्यव्यापी महा हड़ताल का ऐलान कर दिया।
इस महा हड़ताल के कारण राज्यभर के विभिन्न सरकारी विभागों का दैनिक कामकाज पूरी तरह से पटरी से उतर गया। सबसे अधिक परेशानी आम जनता को उठानी पड़ी, क्योंकि सरकारी अस्पतालों में ओपीडी (OPD) सेवाएं गंभीर रूप से बाधित रहीं, जिससे इलाज कराने आए मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
‘कर्मचारी परिवार का हिस्सा, लेकिन हड़ताल के साथ बातचीत असंभव’
कर्मचारियों के इस उग्र प्रदर्शन और प्रशासनिक सेवाओं के बाधित होने पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के माध्यम से अपनी सरकार का रुख साफ किया। सीएम मान ने कहा कि राज्य के सभी सरकारी कर्मचारी उनके अपने परिवार का एक अहम हिस्सा हैं और सरकार उनकी हर जायज मांग तथा समस्या को सुनने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
हालांकि, उन्होंने सख्त लहजे में दो टूक कहा कि “बातचीत और हड़ताल एक साथ नहीं चल सकतीं।” मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार हर समस्या का शांतिपूर्ण और सकारात्मक समाधान निकालने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, लेकिन बातचीत की मेज पर तभी बैठा जाएगा जब कर्मचारी अपनी हड़ताल को पूरी तरह से खत्म करेंगे।
150 से अधिक कर्मचारी संगठनों का साझा मंच और प्रमुख मांगें
यह महा हड़ताल ‘पंजाब सांझा मुलाजिम मंच’ के बैनर तले आयोजित की गई, जिसमें राज्यभर के 150 से अधिक छोटे-बड़े कर्मचारी संगठनों ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार की तरफ से उन्हें कई बार केवल झूठे आश्वासन ही मिले हैं, लेकिन उनकी वास्तविक मांगों को पूरा करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। कर्मचारियों की प्रमुख और लंबे समय से लंबित मांगों में मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दे शामिल हैं, रुका हुआ 18 प्रतिशत महंगाई भत्ता (DA) तत्काल प्रभाव से जारी किया जाए। राज्य में पुरानी पेंशन योजना (OPS) को पूरी तरह से बहाल किया जाए। विभिन्न विभागों में कार्यरत सभी संविदा (कच्चे) कर्मचारियों को तुरंत नियमित किया जाए।
पंजाब सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच चल रहे इस रस्साकशी के दौर में अब यह देखना बेहद अहम होगा कि कर्मचारी संगठन सीएम मान की इस शर्त को मानते हैं या आने वाले दिनों में उनका यह विरोध प्रदर्शन और अधिक उग्र रूप धारण करता है।
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