Punjab News: पंजाब में सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) और उसके बकाये को लेकर चल रहे लंबे विवाद ने एक नया मोड़ ले लिया है। इस गंभीर मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए गुरुवार को पंजाब सरकार के तीन वरिष्ठ मंत्रियों ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने प्रेस को संबोधित करते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि पंजाब के सरकारी कर्मचारी देश में सबसे अधिक वेतन पाने वाले चुनिंदा कर्मचारियों में शामिल हैं। इस दौरान उनके साथ कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा और सामाजिक सुरक्षा मंत्री डॉ. बलजीत कौर भी मौजूद रहे, जिन्होंने सरकार का पक्ष मजबूती से रखा।
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कई राज्यों और केंद्र सरकार से भी बेहतर है वेतन
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पंजाब के कर्मचारियों का मूल वेतन और महंगाई भत्ता मिलाकर बनने वाला कुल वेतन हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों के मुकाबले काफी अधिक है। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि यदि गुजरात के कर्मचारियों से तुलना की जाए, तो पंजाब के कर्मचारियों को लगभग 28 प्रतिशत अधिक वेतन मिलता है।
चीमा ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों से तुलना करते हुए दावा किया कि पंजाब के लिपिक (क्लर्क), चालक, आशुलिपिक, शिक्षक और पुलिस जवानों का वेतन कई मामलों में केंद्रीय कर्मचारियों से भी ज्यादा है। उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि 42 प्रतिशत डीए के साथ पंजाब में एक लिपिक या कांस्टेबल के हाथ में 54,812 रुपये आते हैं, जबकि केंद्र में 60 प्रतिशत डीए होने के बावजूद यह राशि 36,960 रुपये ही बनती है। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में डीए को लगातार बढ़ाया गया है और इसे 28 प्रतिशत से बढ़ाकर चरणबद्ध तरीके से नवंबर 2024 में 42 प्रतिशत कर दिया गया था।
राजस्व का बड़ा हिस्सा वेतन और पेंशन पर खर्च
सरकार की वित्तीय स्थिति का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि पंजाब अपने कुल राजस्व का लगभग 51 प्रतिशत हिस्सा केवल कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतन व पेंशन पर खर्च कर रहा है, जबकि देश के अन्य प्रमुख राज्यों में यह औसत करीब 38 प्रतिशत है। यदि इसमें कर्ज के ब्याज का भुगतान भी जोड़ लिया जाए, तो राज्य के राजस्व का कुल 82 प्रतिशत हिस्सा इन तीन मदों में ही खर्च हो जाता है।
बकाये से पीछे नहीं हट रही सरकार: अमन अरोड़ा
कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने वित्तीय स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि 2016 से 2021 के बीच का लगभग 14,191 करोड़ रुपये का पुराना बकाया पिछली अकाली-भाजपा और कांग्रेस सरकारों के समय का है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार इस बकाये से भाग नहीं रही है, बल्कि चरणबद्ध तरीके से इसका भुगतान कर रही है। सरकार अब तक कर्मचारियों और पेंशनरों को लगभग 4,500 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है। 13 फरवरी 2025 को मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद इसे चार वित्तीय वर्षों में चुकाने की योजना बनाई गई थी।
नियमों का हवाला और सुप्रीम कोर्ट में अपील
डॉ. बलजीत कौर ने स्पष्ट किया कि पंजाब में कर्मचारियों के वेतन और डीए पंजाब सिविल सर्विस रिवाइज्ड-पे रूल्स, 2021 और संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत तय होते हैं, जिनमें केंद्र के बराबर डीए देना अनिवार्य नहीं है। हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिसमें कहा गया है कि सरकार कुल वेतन को केंद्रीय समकक्षों के बराबर करने को तैयार है, लेकिन एक समान दर से डीए देने से खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
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