Punjab News: चंडीगढ़ और मोहाली के सीमावर्ती इलाके पर बुधवार को किसानों का हुजूम उमड़ पड़ा, जहां आयोजित एक विशाल महापंचायत में पंजाब के कोने-कोने से पहुंचे हजारों किसानों ने सरकार के खिलाफ जोरदार हुंकार भरी। इस महापंचायत का मुख्य उद्देश्य किसानों की लंबे समय से लंबित पड़ी मांगों को सरकार तक पहुंचाना और अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर आवाज बुलंद करना था। सुबह होते ही पंजाब के विभिन्न जिलों से किसानों का काफिला ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों के जरिए चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर की तरफ कूच करने लगा, जिससे पूरे क्षेत्र में सरगर्मी बढ़ गई।
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संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में एकजुट हुए अन्नदाता
इस महापंचायत में संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) कमेटी के प्रमुख किसान नेता मंजीत सिंह धनेर समेत कई वरिष्ठ किसान नेताओं ने शिरकत की। नेताओं ने मंच से संबोधित करते हुए कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनके हितों की लगातार हो रही अनदेखी को अब और सहन नहीं किया जाएगा। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार लंबे समय से किसानों की मांगों पर केवल कोरे आश्वासन दे रही है, लेकिन धरातल पर कोई ठोस समाधान या सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया है। किसानों का साफ तौर पर कहना था कि उन्हें आश्वासनों की नहीं, बल्कि अपने वाजिब हक की जरूरत है और सरकार को अब बिना किसी टालमटोल के उनकी मांगों पर फैसला लेना ही होगा।
शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रखने का संकल्प और यातायात पर असर
महापंचायत के दौरान किसानों ने दो टूक शब्दों में कहा कि वे अपने अधिकारों और हक की प्राप्ति के लिए पूरी तरह से अनुशासित और शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर उचित और व्यावहारिक कार्रवाई नहीं करती, तब तक उनका यह आंदोलन इसी प्रकार निरंतर जारी रहेगा। किसानों के इस भारी जमावड़े को देखते हुए कानून-व्यवस्था और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। बॉर्डर व उसके आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया और यातायात को नियंत्रित करने के लिए कई जगहों पर बैरिकेडिंग की गई। हालांकि, किसानों की भारी भीड़ और ट्रैक्टरों के जुटने के कारण कुछ प्रमुख मार्गों पर यातायात खासा प्रभावित रहा, जिससे आवागमन करने वाले वाहन चालकों को कुछ समय के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ा। दिनभर चले इस महापंचायत के दौरान किसानों का जोश हाई नजर आया और वे अपनी मांगों पर अड़े रहे।
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