
punjab News: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंजाब के जालंधर में भगवान वाल्मीकि प्रकट उत्सव के पावन अवसर पर आयोजित एक विशाल तीर्थ यात्रा को संबोधित करते हुए कहा कि महर्षि वाल्मीकि की कल्पना के अनुरूप पंजाब की अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाना और राज्य के प्रत्येक नागरिक के मन में सुरक्षा की भावना पैदा करना ही ‘रामराज्य’ की स्थापना की दिशा में सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम होगा।
इस अवसर पर उन्होंने सभी प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे मिलकर भगवान वाल्मीकि के दिखाए गए मार्ग पर चलने का दृढ़ संकल्प लें। उनके द्वारा बताए गए समानता, सामाजिक समरसता और करुणा के मार्ग को अपने जीवन में उतारकर एक भयमुक्त, नशामुक्त और खुशहाल समाज के निर्माण में अपना सक्रिय योगदान दें। यह विशाल तीर्थ यात्रा जालंधर से चलकर अमृतसर स्थित भगवान वाल्मीकि की पावन तपोभूमि ‘श्रीराम तीर्थ’ के लिए रवाना हुई थी।
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आदि कवि भगवान वाल्मीकि संपूर्ण मानवता के पथ प्रदर्शक

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि आदि कवि भगवान वाल्मीकि संपूर्ण मानवता के सच्चे पथ प्रदर्शक, मर्यादा और सामाजिक न्याय के महान वाहक थे। उन्होंने महाकाव्य रामायण की रचना करके पूरे मानव समाज को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का पावन जीवन चरित्र प्रदान किया।
उन्होंने कहा कि भगवान वाल्मीकि ने रामायण के माध्यम से न केवल जीने की सही कला सिखाई, बल्कि चरित्र निर्माण और उच्च मानवीय मूल्यों की अमर सीख भी दी। वे राम नाम की गंगा बहाने वाले ऋषियों के ऋषि और योगियों के योगी थे। आज यह हमारा परम सौभाग्य है कि हम सब अयोध्या में उनके हृदय सम्राट भगवान श्रीराम के भव्य एवं दिव्य मंदिर के निर्माण के ऐतिहासिक क्षणों के साक्षी बने हैं।
कर्मों से महान बनता है मनुष्य: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने समाज को यह सिखाया कि कोई भी व्यक्ति अपने जन्म से नहीं, बल्कि अपने अच्छे कर्मों और विचारों से महान बनता है। उनकी शिक्षाएं हमें एक ऐसे आदर्श समाज की स्थापना करना सिखाती हैं, जहां कोई भी छोटा या बड़ा न हो तथा समाज के हर व्यक्ति को समानता और पूरे सम्मान के साथ जीने का पूरा अधिकार मिले।
उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी सत्ता और शासन का मुख्य और प्राथमिक उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े हुए व्यक्ति की सेवा करना होना चाहिए। महर्षि वाल्मीकि ने अपने महाकाव्य में एक ऐसे समाज की परिकल्पना की थी, जिसमें दुख, भय, भेदभाव, लाचारी और अन्याय के लिए कोई जगह नहीं थी।
पंजाब की मौजूदा स्थिति पर जताई चिंता
वर्तमान परिस्थितियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम भगवान वाल्मीकि का प्रकट उत्सव मना रहे हैं, तो हमें उनकी शिक्षाओं के आलोक में पंजाब के मौजूदा हालातों पर भी गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। पंजाब की यह पवित्र भूमि हमेशा से गुरुओं, पीरों, संतों और वीर योद्धाओं की तपोभूमि रही है। इस महान धरती ने हमेशा देश को नई दिशा दिखाई है, देश की अन्न सुरक्षा को मजबूत किया है और देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया है।
लेकिन आज बड़े ही दुख और गहरी चिंता के साथ यह कहना पड़ रहा है कि पंजाब वर्तमान में जिन कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा है, वे बेहद चिंताजनक हैं। आज राज्य का युवा वर्ग हताशा और नशे के खतरनाक जाल में तेजी से फंसता जा रहा है। कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है और प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण समाज का आम नागरिक, किसान, मजदूर और युवा खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। सरकार की नीतियों की दिशाहीनता ने पंजाब की विकास गति को रोक दिया है।
कार्यक्रम में मुख्य आयोजक एवं भगवान वाल्मीकि उत्सव समिति के अध्यक्ष विपन सभरवाल, महामंडलेश्वर बंसीदास, केशवदास, बाबा राजकिशोर, जगजीत सिंह महाराज, अमरजीत कादरी, जिला अध्यक्ष अशोक सरीन, बृजिन्दर सिंह हमदर्द समेत कई संत-महात्मा और भारी संख्या में श्रद्धालु नागरिक उपस्थित रहे।
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