पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने हटाई सेना के जवानों की डिसेबिलिटी पेंशन पर रोक

चंडीगढ़  भारतीय सेना के जवानों के हितों की रक्षा करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सशस्त्र बलों के सदस्यों को दी जाने वाली डिसेबिलिटी पेंशन (Disability Pension) को तकनीकी आधार पर नहीं रोका जा सकता। अदालत ने केंद्र सरकार और सैन्य अधिकारियों को फटकार लगाते हुए निर्देश दिया है कि सेवा के दौरान दिव्यांग हुए जवानों को उनका जायज हक तुरंत दिया जाए। यह फैसला उन हजारों पूर्व सैनिकों के लिए उम्मीद की किरण लेकर आया है जो लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। 1.

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Published On :

मार्च 31, 2026

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चंडीगढ़ 
भारतीय सेना के जवानों के हितों की रक्षा करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सशस्त्र बलों के सदस्यों को दी जाने वाली डिसेबिलिटी पेंशन (Disability Pension) को तकनीकी आधार पर नहीं रोका जा सकता। अदालत ने केंद्र सरकार और सैन्य अधिकारियों को फटकार लगाते हुए निर्देश दिया है कि सेवा के दौरान दिव्यांग हुए जवानों को उनका जायज हक तुरंत दिया जाए। यह फैसला उन हजारों पूर्व सैनिकों के लिए उम्मीद की किरण लेकर आया है जो लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।

1. कोर्ट का कड़ा रुख: "सेवा की परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं कर सकते"
हाई कोर्ट की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि सेना की ड्यूटी अत्यंत कठिन परिस्थितियों में होती है। यदि कोई जवान सेवा के दौरान किसी शारीरिक अक्षमता या बीमारी का शिकार होता है, तो यह माना जाना चाहिए कि वह 'Attributable to Military Service' (सैन्य सेवा के कारण) है। कोर्ट ने उन दलीलों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि जवान की बीमारी का ड्यूटी से सीधा संबंध नहीं है।

2. पेंशन रोकने के नियमों पर सवाल
अदालत ने पाया कि कई मामलों में सैन्य अधिकारियों द्वारा पेंशन के दावों को यह कहकर खारिज कर दिया जाता है कि दिव्यांगता 'अग्रवेटेड' (Aggravated) नहीं है। हाई कोर्ट ने साफ किया कि अगर मेडिकल बोर्ड ने भर्ती के समय जवान को पूरी तरह फिट घोषित किया था, तो सेवा के दौरान पैदा हुई किसी भी अक्षमता के लिए विभाग ही जिम्मेदार है।

3. पूर्व सैनिकों को मिलेगी बड़ी राहत
इस फैसले के बाद अब उन जवानों के लिए पेंशन का रास्ता साफ हो गया है जिन्हें 'डिस्चार्ज' के समय मेडिकल ग्राउंड पर अनफिट घोषित कर घर भेज दिया गया था। कोर्ट ने आदेश दिया है कि पिछले बकाया (Arrears) के साथ पेंशन का भुगतान निर्धारित समय सीमा के भीतर किया जाए।

4. सैन्य नियमों की व्याख्या में स्पष्टता
हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कल्याणकारी नियमों की व्याख्या हमेशा लाभार्थी (जवान) के पक्ष में होनी चाहिए। प्रशासन को संवेदनशीलता दिखाते हुए ऐसे मामलों में अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचना चाहिए।

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