पंजाब में नशे पर सरकार का बड़ा सर्वे, 55 लाख परिवारों से जुटाई जा रही जानकारी

चंडीगढ़. पंजाब में नशे की स्थिति और इससे प्रभावित परिवारों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का पता लगाने के लिए शुरू किया गया पहला ड्रग एंड सोशल-इकोनामिक सेंसस लगभग पूरा हो गया है। सरकार ने 30 अगस्त तक 55.61 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 55.36 लाख परिवारों का सर्वे कर लिया है। इस तरह लक्ष्य का 99.56 प्रतिशत हिस्सा कवर किया जा चुका है। हालांकि, 3,48,692 परिवारों ने सर्वे में सहयोग नहीं किया या सर्वे से इन्कार कर दिया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 55.36 लाख परिवारों को कवर करने के दौरान 51.88 लाख सर्वे ऐसे रहे, जिन्हें गुणवत्ता जांच के लिए एआइ

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सितम्बर 3, 2026

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चंडीगढ़.

पंजाब में नशे की स्थिति और इससे प्रभावित परिवारों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का पता लगाने के लिए शुरू किया गया पहला ड्रग एंड सोशल-इकोनामिक सेंसस लगभग पूरा हो गया है। सरकार ने 30 अगस्त तक 55.61 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 55.36 लाख परिवारों का सर्वे कर लिया है। इस तरह लक्ष्य का 99.56 प्रतिशत हिस्सा कवर किया जा चुका है।

हालांकि, 3,48,692 परिवारों ने सर्वे में सहयोग नहीं किया या सर्वे से इन्कार कर दिया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 55.36 लाख परिवारों को कवर करने के दौरान 51.88 लाख सर्वे ऐसे रहे, जिन्हें गुणवत्ता जांच के लिए एआइ आधारित प्रणाली के माध्यम से परखा गया। इनमें से 44.63 लाख सर्वे एआइ प्रणाली ने स्वीकार कर लिए, जबकि 7.24 लाख सर्वे को एआइ ने अस्वीकार करते हुए मैनुअल गुणवत्ता जांच के लिए भेजा। यह कुल जांचे गए सर्वे का 13.96 प्रतिशत था।

मैनुअल जांच में अधिकांश सर्वे हुए स्वीकार
सरकारी सूत्र के अनुसार मैनुअल जांच के लिए भेजे गए 7.24 लाख मामलों में से 7.23 लाख की जांच पूरी हो चुकी है। इनमें 6.77 लाख सर्वे संपादन के बाद स्वीकार कर लिए गए। मैनुअल जांच के बाद केवल 19,432 सर्वे ऐसे बचे, जिन्हें अस्वीकार श्रेणी में रखा गया। यह गुणवत्ता जांच के लिए पात्र कुल सर्वे का महज 0.37 प्रतिशत है।

अमृतसर सबसे आगे, फरीदकोट पीछे
जिलेवार आंकड़ों में अमृतसर ने निर्धारित लक्ष्य को पार कर लिया है। यहां 4,75,079 के लक्ष्य के मुकाबले 4,80,030 सर्वे किए गए, जो 101.04 प्रतिशत है। मानसा, तरनतारन, संगरूर और फिरोजपुर ने भी 100 प्रतिशत से अधिक कवरेज हासिल किया। फाजिल्का, मोगा और पठानकोट ने अपना निर्धारित लक्ष्य पूरा कर लिया। सबसे कम कवरेज फरीदकोट में 95.32 प्रतिशत रही। इसके बाद एसएएस नगर 98.04, रूपनगर 98.13 और लुधियाना 98.15 प्रतिशत पर रहा। हालांकि संख्या के लिहाज से सबसे बड़ा अंतर लुधियाना में रहा, जहां लक्ष्य 6,58,844 के मुकाबले 6,46,634 सर्वे हुए। यहां 12,210 परिवार लक्ष्य से कम रहे।

परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति भी जानी
अप्रैल में शुरू किए गए इस सर्वे में करीब 28 हजार सरकारी कर्मचारियों को लगाया गया था। इसका उद्देश्य सिर्फ नशा करने वालों की पहचान करना नहीं था, बल्कि नशे की प्रकृति, लत की अवधि, उपचार की स्थिति और नशामुक्ति केंद्र तक पहुंच जैसी जानकारी जुटाना भी था। परिवार में शिक्षा, रोजगार, मासिक आय, जमीन, कर्ज, पलायन और विदेश जाने से जुड़ी जानकारी भी ली गई। सर्वे में जाति और उपजाति तथा सरकारी सेवाओं, स्कूलों, स्वास्थ्य सुविधाओं, धार्मिक स्थलों और पानी के स्रोतों तक पहुंच के दौरान भेदभाव से जुड़े सवाल भी शामिल थे।

विपक्ष ने इतने व्यापक सवालों को लेकर सरकार पर 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक और जनभावना से जुड़ा डाटा जुटाने का आरोप लगाया था। अब सरकार सर्वे के आंकड़ों को एकत्र कर उनका विश्लेषण करेगी। मुख्य सचिव केएपी सिन्हा की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है, जिसमें संबंधित विभागों के सचिव शामिल हैं। समिति आंकड़ों के आधार पर नशे की स्थिति, प्रभावित क्षेत्रों, नशे के प्रकार और प्रभावित परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का अध्ययन कर नई योजनाओं और नीतियों के लिए सुझाव तैयार करेगी।

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