पंजाब में हड़ताल पर सरकार सख्त, खत्म करने की शर्त के बाद CM ने यूनियन बैठक रद्द की

जालंधर. पंजाब में सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर सरकार और मिनिस्टीरियल सर्विसेज यूनियन के बीच गतिरोध बढ़ गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यूनियन प्रतिनिधियों के साथ प्रस्तावित बैठक रद्द कर दी। मुख्यमंत्री ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि हड़ताल खत्म होने के बाद ही कर्मचारियों के साथ बातचीत होगी। मुख्यमंत्री की ओर से बैठक रद्द किए जाने के बावजूद यूनियन के प्रतिनिधि पीएपी परिसर में पहुंचे और काफी देर तक बैठक होने की उम्मीद में वहीं बैठे रहे। यूनियन प्रतिनिधि दोपहर 12 बजे बैठक के लिए परिसर में पहुंच गए थे। हालांकि, इससे पहले ही मुख्यमंत्री

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Published On :

अगस्त 27, 2026

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जालंधर.

पंजाब में सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर सरकार और मिनिस्टीरियल सर्विसेज यूनियन के बीच गतिरोध बढ़ गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यूनियन प्रतिनिधियों के साथ प्रस्तावित बैठक रद्द कर दी। मुख्यमंत्री ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि हड़ताल खत्म होने के बाद ही कर्मचारियों के साथ बातचीत होगी।

मुख्यमंत्री की ओर से बैठक रद्द किए जाने के बावजूद यूनियन के प्रतिनिधि पीएपी परिसर में पहुंचे और काफी देर तक बैठक होने की उम्मीद में वहीं बैठे रहे। यूनियन प्रतिनिधि दोपहर 12 बजे बैठक के लिए परिसर में पहुंच गए थे। हालांकि, इससे पहले ही मुख्यमंत्री ने अपने इंटरनेट माध्यम पर पोस्ट कर साफ कर दिया था कि हड़ताल और बातचीत एक साथ नहीं हो सकती। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले हड़ताल खत्म होनी चाहिए, इसके बाद ही कर्मचारियों की मांगों को लेकर बैठक की जाएगी। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद यूनियन प्रतिनिधियों और सरकार के बीच बातचीत की संभावना फिलहाल टल गई।

नियुक्ति पत्र देने के बाद निकले मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इससे पहले पीएपी परिसर में नए भर्ती किए गए पुलिस कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। कार्यक्रम के बाद वह करीब सवा एक बजे वहां से निकल गए। इसके बाद वह अपने ओल्ड बारादरी स्थित आवास पहुंचे। दूसरी ओर, यूनियन प्रतिनिधि पीएपी परिसर में ही बैठक की उम्मीद में बैठे रहे। कर्मचारियों की ओर से महंगाई भत्ते और अन्य मांगों को लेकर हड़ताल की जा रही है। यूनियन का कहना है कि सरकार को कर्मचारियों की मांगों पर बातचीत करनी चाहिए। मुख्यमंत्री के रुख से अब सरकार और हड़ताली कर्मचारियों के बीच टकराव बढ़ने के संकेत हैं। यूनियन की ओर से आगे क्या फैसला लिया जाता है, इस पर सभी की नजर है।

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