Punjab BJP Crisis: संगठनात्मक फेरबदल के बाद सामूहिक इस्तीफे, दिल्ली बुलाए गए केव‍ल सिंह ढिल्लों

पंजाब BJP में संगठनात्मक फेरबदल के बाद अंदरूनी नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। कई नेताओं के इस्तीफों और विरोध के बीच प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों को दिल्ली बुलाए जाने की खबर है। पार्टी नेतृत्व अब असंतोष को शांत करने और आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने की कोशिश में जुटा है।

Punjab BJP Crisis

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 13, 2026

Punjab BJP Crisis : पंजाब बीजेपी में हालिया संगठनात्मक फेरबदल के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। नए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर कई पुराने और वरिष्ठ नेताओं ने नाराजगी जताई है। कुछ जिलों में पार्टी पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफे भी दिए हैं। बढ़ते विवाद को देखते हुए बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने मामले में सीधे हस्तक्षेप किया है। प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों को दिल्ली बुलाकर संगठन में बढ़ रही नाराजगी को जल्द नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं।

पुराने नेताओं की अनदेखी का लगाया आरोप

पार्टी से लंबे समय से जुड़े नेताओं का आरोप है कि संगठन में नई नियुक्तियों के दौरान पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं को अपेक्षित महत्व नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि दूसरे दलों से बीजेपी में आए नेताओं को प्राथमिकता मिल रही है। इसी वजह से कई जिलों में वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे पदाधिकारियों में नाराजगी बढ़ी है। केंद्रीय नेतृत्व अब असंतुष्ट नेताओं से संवाद बढ़ाकर उन्हें दोबारा संगठन से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।

होशियारपुर में सबसे ज्यादा विरोध

होशियारपुर जिले में संगठनात्मक बदलाव के खिलाफ सबसे ज्यादा विरोध देखने को मिला है। जिला अध्यक्ष के पद पर बदलाव के बाद वरिष्ठ नेता तीक्ष्ण सूद ने अपने संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया। उनके समर्थन में जिले के 111 पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी सामूहिक इस्तीफे सौंप दिए। इनमें मंडल अध्यक्ष, जिला सचिव और विभिन्न मोर्चों से जुड़े पदाधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं। इस घटनाक्रम ने प्रदेश नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।

फरीदकोट समेत कई जिलों में नाराजगी

होशियारपुर के अलावा फरीदकोट, लुधियाना, खन्ना, मुक्तसर और संगरूर में भी संगठनात्मक बदलाव को लेकर असंतोष सामने आया है। फरीदकोट में जिला अध्यक्ष बदले जाने के विरोध में मंडल अध्यक्ष सहित करीब 10 वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अपने पद छोड़ दिए। वहीं अन्य जिलों में भी पुराने कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष की स्थिति बनी हुई है। बीजेपी नेतृत्व के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती संगठन को एकजुट रखना है।

छह जिला अध्यक्ष बदलने से उठे सवाल

प्रदेश में संगठनात्मक बदलाव के तहत महज दो सप्ताह के भीतर छह जिला अध्यक्षों को बदले जाने के फैसले ने भी पार्टी के भीतर सवाल खड़े किए हैं। वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि इतनी तेजी से किए गए बदलावों से जमीनी कार्यकर्ताओं को पर्याप्त भरोसे में नहीं लिया गया। अब केंद्रीय नेतृत्व चाहता है कि आगे होने वाली नियुक्तियों में अनुभवी नेताओं से सलाह-मशविरा किया जाए और उनकी भूमिका को भी महत्व दिया जाए।

कई पुराने नेताओं के इस्तीफे से बढ़ा दबाव

तीक्ष्ण सूद के अलावा सुखमिंदर ग्रेवाल और मनिंदर सिंह जैसे पुराने नेताओं के इस्तीफों ने प्रदेश नेतृत्व पर दबाव बढ़ाया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी को केंद्रीय नेतृत्व इसलिए भी गंभीरता से ले रहा है क्योंकि पंजाब में 2027 का विधानसभा चुनाव सामने है। बीजेपी नहीं चाहती कि चुनाव से पहले संगठनात्मक विवाद इतना बढ़ जाए कि इसका असर चुनावी तैयारियों और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़े।

सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी

दिल्ली से लौटने के बाद प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने पार्टी की चुनावी तैयारियों को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी अब पंजाब में सीमित सीटों पर निर्भर रहने के बजाय सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। उनके मुताबिक संगठन के विस्तार और चुनावी तैयारियों के कारण कार्यकर्ताओं में उत्साह है और मौजूदा मतभेद पार्टी का आंतरिक विषय हैं।

नाराज नेताओं को सम्मान देने का भरोसा

केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि बीजेपी एक परिवार की तरह काम करती है और संगठन में मतभेद होना असामान्य नहीं है। उन्होंने नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को पूरा सम्मान देने का भरोसा दिलाया। प्रदेश अध्यक्ष के मुताबिक पार्टी जल्द ही असंतुष्ट नेताओं से बातचीत कर विवाद को समाप्त करेगी। नेतृत्व की कोशिश है कि इस्तीफा देने वाले पदाधिकारियों को भी दोबारा संगठन की मुख्यधारा में लाया जाए।

2027 चुनाव से पहले एकजुटता सबसे बड़ी चुनौती

पंजाब बीजेपी के सामने अब सबसे महत्वपूर्ण चुनौती संगठनात्मक एकता बनाए रखना है। केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश अध्यक्ष को स्पष्ट तौर पर नाराज नेताओं से संवाद करने और सभी पक्षों को साथ लेकर आगे बढ़ने के निर्देश दिए हैं। बीजेपी की कोशिश है कि जिला स्तर पर शुरू हुआ विरोध व्यापक संकट का रूप न ले। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी पुराने नेताओं के अनुभव और नए चेहरों की ऊर्जा को साथ लेकर संगठन मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

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