Anti Paper Leak Bill: संसद के सदन में नए एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर अब तक का सबसे तीखा और आक्रामक हमला बोला है। लोकसभा को संबोधित करते हुए प्रियंका गांधी ने सरकार से सीधा सवाल पूछा कि देश के भविष्य और अन्नदाता छात्रों पर पैलेट गन और एके-47 जैसे हथियारों का इस्तेमाल करने की आखिर क्या आवश्यकता आन पड़ी थी?
उन्होंने दो टूक शब्दों में पूछा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपने हक की मांग कर रहे इन छात्र-युवाओं पर बल प्रयोग करने का आदेश आखिर किसने दिया था? क्या यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इशारे पर हुआ या देश के गृह मंत्री ने इसके निर्देश दिए थे? उन्होंने कहा कि आज पूरा देश और देश का हर नागरिक इस बर्बरता का जवाब मांग रहा है, क्योंकि यह केवल किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र के युवाओं के सम्मान का सवाल है।
“शिक्षा तंत्र में RSS के लोगों को भरकर देश के सिस्टम को किया जा रहा है खोखला”
अपनी बात को और आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने सोची-समझी रणनीति के तहत शिक्षा तंत्र की सभी प्रमुख संस्थाओं में विशेष विचारधारा और आरएसएस (RSS) से जुड़े लोगों को भरकर पूरी व्यवस्था को खोखला कर दिया है। उन्होंने आंकड़े रखते हुए कहा कि पिछले एक दशक के भीतर देश भर में कुल 152 बार पेपर लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे करोड़ों मेधावी छात्रों का भविष्य बर्बाद हुआ है, लेकिन विडंबना यह है कि आज तक एक भी मुख्य दोषी या पेपर लीक माफिया के सदस्य को कड़ी सजा नहीं मिल पाई है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार द्वारा लाए जाने वाले नए बिलों से पेपर लीक रुकने वाले नहीं हैं, क्योंकि आज की युवा पीढ़ी यानी ‘Gen Z’ सरकार के किसी भी झूठे दावे को और बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री को सलाह दी कि वे अपने सलाहकार बदलें और समितियों में ऐसे लोगों को रखें जो वास्तव में शिक्षा के जानकार हों, न कि अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले विशेषज्ञ।
प्रियंका ने सरकार के अहंकार पर उठाए कड़े सवाल
सदन में तीखे तेवर दिखाते हुए प्रियंका गांधी ने सत्ता पक्ष पर जमकर निशाना साधा और पूर्व शिक्षा मंत्री के हालिया संसद स्वागत पर करारा तंज कसा। उन्होंने कहा कि एक तरफ महाराष्ट्र में एक पीड़ित परिवार अपनी बेटी की अकाल मृत्यु का गहरा दुख और मातम मना रहा था, और दूसरी तरफ ठीक उसी दौरान संसद परिसर में असफल व्यवस्था के प्रतीक रहे पूर्व मंत्री का भव्य स्वागत किया जा रहा था।
उन्होंने पूछा कि सरकार को आखिरकार किस बात का इतना घमंड और अहंकार है? जहाँ ऐसी गंभीर स्थितियों में आंखों में शर्म और प्रायश्चित का भाव होना चाहिए था, वहाँ इस तरह का जश्न मनाया जा रहा है। उन्होंने खुलासा करते हुए कहा कि देश का कुल शिक्षा बजट 1.4 लाख करोड़ रुपये है, जबकि अकेले नीट (NEET) के मासूम बच्चों और उनके अभिभावकों से लगभग 1.32 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि वसूली जाती है, इसके बदले में छात्रों को केवल लाठियां और आंसू गैस के गोले मिलते हैं।










