Sonam Wangchuk Hunger Strike: प्रियंका चतुर्वेदी का सरकार पर तीखा वार, CJP की राजनीति पर उठाए सवाल

सोनम वांगचुक को अस्पताल में शिफ्ट करने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। प्रियंका चतुर्वेदी ने सरकार पर निशाना साधते हुए इसे संवाद की कमी बताया, साथ ही सीजेपी के एजेंडे पर भी सवाल उठाए। वहीं, अभिजीत दीपके ने 20 जुलाई को संसद मार्च की अपनी योजना को बरकरार रखा है।

Sonam Wangchuk Hunger Strike

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 18, 2026

Sonam Wangchuk Hunger Strike: दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और अन्य मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद देश की राजनीति गरमा गई है। शिवसेना (यूबीटी) की पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा है कि सरकार को प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत करने और उनकी समस्याएं सुलझाने के लिए किसी केंद्रीय मंत्री को भेजना चाहिए था, न कि दिल्ली पुलिस को। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि जनता सरकार के इस दमनकारी व्यवहार को कभी नहीं भूलेगी।

वांगचुक के स्वास्थ्य पर प्रियंका चतुर्वेदी की भावुक अपील

बताते चले कि, प्रियंका चतुर्वेदी ने सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उन्हें देश के लिए महत्वपूर्ण बताया। हालांकि, उन्होंने इस आंदोलन के आयोजक ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) की भूमिका पर भी कटाक्ष किया है। प्रियंका ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे भले ही इसके लिए ट्रोल हों, लेकिन वे यह कहना चाहेंगी कि सीजेपी अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए सोनम वांगचुक को ‘बलि का बकरा’ नहीं बना सकता। उनकी यह टिप्पणी आंदोलन के भीतर चल रहे अंतर्विरोधों और राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा करती है।

जंतर-मंतर पर जारी गतिरोध

उधर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि सोनम वांगचुक को हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए स्वास्थ्य कारणों से सफदरजंग अस्पताल में शिफ्ट किया गया है। दूसरी ओर, सीजेपी चीफ अभिजीत दीपके ने पुलिस पर हिरासत में दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए जंतर-मंतर पर अपना अनशन जारी रखा है। उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि प्रदर्शन रुकने वाला नहीं है। दीपके ने घोषणा की है कि वे 20 जुलाई को प्रस्तावित अपने ‘संसद मार्च’ की योजना पर अडिग हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच का यह टकराव आने वाले दिनों में क्या मोड़ लेता है।