Pritam and Pedro Review: हिंदी सिनेमा के सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली फिल्ममेकर्स में से एक, राजकुमार हिरानी ने अब ओटीटी की दुनिया में कदम रखा है। जियो हॉटस्टार पर रिलीज हुई उनकी पहली वेब सीरीज ‘प्रीतम और पेड्रो’ एक ऐसी कहानी है जो न केवल मनोरंजन करती है, बल्कि आज के डिजिटल युग में हमारी सुरक्षा को लेकर सचेत भी करती है।
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क्या है कहानी?
यह कहानी दो विपरीत स्वभाव के व्यक्तियों—प्रीतम और पेड्रो (अरशद वारसी) के इर्द-गिर्द घूमती है। पेड्रो क्राइम ब्रांच का एक ईमानदार पुलिस अधिकारी है, जो तकनीक की दुनिया से कोसों दूर है। एक नेता की पत्नी का फोन चोरी होने के बाद, उसे जबरन साइबर क्राइम विभाग में भेज दिया जाता है, जहाँ उसका मन बिल्कुल नहीं लगता। वहीं प्रीतम एक साधारण वैक्यूम क्लीनर विक्रेता है, लेकिन वह एक बेहद शातिर हैकर भी है।
कहानी में मोड़ तब आता है जब उसी नेता का बच्चा गायब हो जाता है। वेब सीरीज में विक्रांत मैसी के किरदार ‘मार्टिन’ की एंट्री कहानी को रोमांचक शिखर पर ले जाती है। क्या प्रीतम और पेड्रो इस केस को सुलझा पाएंगे? यह जानने के लिए दर्शकों को सीरीज के 6 रोमांचक एपिसोड्स से गुजरना होगा।
डायरेक्शन और सिग्नेचर स्टाइल
राजकुमार हिरानी का सिग्नेचर स्टाइल इस सीरीज की हर फ्रेम में महसूस होता है। शुरुआत के तीन एपिसोड्स कहानी को एक सादगी भरी गति प्रदान करते हैं, लेकिन तीसरे एपिसोड के बाद सीरीज जो मोड़ लेती है, वह दर्शकों को हैरान कर देता है। सबसे खास बात यह है कि बिना किसी शोर-शराबे या बेवजह के सस्पेंस म्यूजिक के, हिरानी ने अपनी कहानी को बहुत ही सहजता से आगे बढ़ाया है। हर 30-35 मिनट के एपिसोड में नए सब-प्लॉट्स और खुलासे होते हैं, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखते हैं। यह सीरीज हमें याद दिलाती है कि डिजिटल दुनिया में हमारा स्मार्टफोन और इंटरनेट बैंकिंग कितनी बड़ी ताकत और खतरा दोनों हो सकते हैं।
दमदार अभिनय का प्रदर्शन
अरशद वारसी एक ऐसे पुलिस वाले के रूप में पूरी तरह फिट हैं, जो अपराध तो पहचानता है लेकिन साइबर दुनिया की उलझनों में खुद को असहाय पाता है। इस कन्फ्यूजन को उन्होंने बहुत बारीकी से निभाया है। राजकुमार हिरानी के बेटे ‘वीर हिरानी’ ने प्रीतम के किरदार में शानदार डेब्यू किया है। वीर की दमदार आवाज और स्क्रीन प्रेजेंस साबित करती है कि वे पूरी तैयारी के साथ आए हैं।
विक्रांत मैसी का काम इतना प्रभावी है कि दर्शक सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि शीर्षक में उनका नाम क्यों नहीं था! बोमन ईरानी और मोना सिंह ने अपने छोटे लेकिन महत्वपूर्ण किरदारों से कहानी को वजन दिया है। इसके अलावा, वीरेंद्र सहवाग और संजय दत्त के मजेदार केमियो सीरीज का आकर्षण बढ़ाते हैं।
तकनीकी और रचनात्मक पक्ष
अविनाश अरुण का डायरेक्शन और अभिजात जोशी व उनकी टीम की राइटिंग इस सीरीज की रीढ़ है। सीरीज में इस्तेमाल किया गया एक विशेष गाना कहानी के विभिन्न मोड़ों को आपस में जोड़ने का बेहतरीन काम करता है।










