साइबर फ्रॉड पर शिकंजा कसने की तैयारी, दिल्ली में D4C को मिली मंजूरी

नई दिल्ली  साइबर क्राइम और ऑनलाइन आर्थिक धोखाधड़ी से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस में नई व्यवस्था की नींव रख दी गई है। दिल्ली सरकार ने मंगलवार को दिल्ली साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (D4C) की स्थापना को मंजूरी दे दी है। इसे दिल्ली पुलिस की साइबर फ्रॉड से जुड़ी गतिविधियों की नोडल एजेंसी बनाया जाएगा। इसका मकसद साइबर अपराध की रोकथाम, शिकायत पर तुरंत ऐक्शन, जांच, डिजिटल फॉरेंसिक, साइबर इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा को एक साथ जोड़ना है। इसका मेन कमांड सेंटर जय सिंह रोड स्थित पुलिस हेडक्वार्टर के टावर-2 के फर्स्ट फ्लोर पर बन रहा है, जहां रोज 24

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Published On :

अगस्त 27, 2026

नई दिल्ली
 साइबर क्राइम और ऑनलाइन आर्थिक धोखाधड़ी से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस में नई व्यवस्था की नींव रख दी गई है। दिल्ली सरकार ने मंगलवार को दिल्ली साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (D4C) की स्थापना को मंजूरी दे दी है। इसे दिल्ली पुलिस की साइबर फ्रॉड से जुड़ी गतिविधियों की नोडल एजेंसी बनाया जाएगा। इसका मकसद साइबर अपराध की रोकथाम, शिकायत पर तुरंत ऐक्शन, जांच, डिजिटल फॉरेंसिक, साइबर इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा को एक साथ जोड़ना है। इसका मेन कमांड सेंटर जय सिंह रोड स्थित पुलिस हेडक्वार्टर के टावर-2 के फर्स्ट फ्लोर पर बन रहा है, जहां रोज 24 घंटे काम होगा।

    D4C सीधे दिल्ली पुलिस कमिश्नर के प्रशासनिक नियंत्रण में रहेगा।

  • जॉइंट सीपी रोज का ऑपरेशन देखेंगे, जो चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (CEO) होंगे और स्पेशल सीपी (स्पेशल सेल) की निगरानी में काम करेंगे।
  • एडमिनिस्ट्रेटिव, साइबर इन्वेस्टिगेशन, ऑपरेशनल और ऑनलाइन क्राइम्स अगेंस्ट वूमेन एंड चिल्ड्रन इसके चार अंग होंगे।
  • मौजूदा इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट को D4C में समाहित किया जाएगा।
  • अब IFSO की जांच शाखा, डिजिटल इन्वेस्टिगेशन लैब, ट्रेनिंग और अवेयरनेस सेंटर, हैदरपुर स्थित 1930 साइबर हेल्पलाइन कंट्रोल रूम और फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर (FMC) भी D4C के अधीन होंगे।

D4C के निर्देशों पर काम करेंगे सभी 15 साइबर थाने
इस नए सिस्टम से अब साइबर ठगी की शिकायत से लेकर संदिग्ध रकम को फ्रीज करने, डिजिटल सबूत जुटाने और आरोपियों तक पहुंचने की प्रक्रिया में अलग-अलग यूनिट्स के बीच बेहतर तालमेल हो सकेगा। सभी 15 जिलों के साइबर पुलिस स्टेशन भी D4C के निर्देशों के अनुसार काम करेंगे। क्राइम ब्रांच, स्पेशल सेल, स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर वूमेन एंड चिल्ड्रन (SPUWAC) और दूसरी संबंधित यूनिट्स के साथ भी बेहतर तालमेल किया जाएगा।
दिल्ली पुलिस कमिश्नर के प्रशासनिक नियंत्रण में रहेगा D4C

कंप्लेंट मिलते ही ऐक्शन
साइबर ठगी में सबसे अहम समय शुरुआती कुछ घंटे होते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए 1930 हेल्पलाइन और फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर को D4C के ऑपरेशनल विंग में प्रमुख भूमिका दी गई है। 1930 पर कंप्लेंट मिलने के बाद वित्तीय लेन-देन को रोकने और नुकसान कम करने के लिए बैंकों के अलावा अन्य वित्तीय संस्थानों के साथ तत्काल तालमेल किया जाएगा। FMC में बैंक प्रतिनिधियों के लिए अलग वर्क स्टेशन और सुरक्षित संचार व्यवस्था का प्रस्ताव है।

चलेगा संगठित अभियान
D4C बड़े साइबर क्राइम नेटवर्क के खिलाफ संगठित अभियान भी चलाएगा। म्यूल बैंक अकाउंट धारक, सिम और POS एजेंट, हवाला ऑपरेटर, बिचौलिए, मिलीभगत वाले बैंक कर्मचारी, संदिग्ध ऐप डेवलपर और फर्जी कॉल सेंटर निशाने पर रहेंगे। डेटा एनालिटिक्स के जरिए साइबर फ्रॉड के हॉटस्पॉट, अपराधी नेटवर्क, मनी ट्रेल की पहचान की जाएगी। स्टेट डिजिटल इन्वेस्टिगेशन सपोर्ट सेंटर (S-DISC) भी बनेगा।