Health Tips: प्रेग्नेंसी से दौरान अक्सर महिलाओं को अपना खास ख्याल रखने की सलाह ही जाती है। जिसमें उनके डाइट के साथ-साथ एक्सरसाइज शामिल हैं। महिलाओं से कहा जाता रहा है, “अब आप दो लोगों के लिए खा रही हैं।” अक्सर ऐसे वक्त में महिलाओं को अधिक भोजन खाने की क्रेविंग होती हैं, और क्रेविंग पूरी करने के लिए एक्स्ट्रा सर्विंग लेती हैं।
हालांकि, मॉर्डन मेडिकल साइंस इस बात को पूरी तरीके से गलत ठहराता है। हेल्थ एक्सपर्टस चेतावनी देते हैं कि इस सलाह का शाब्दिक पालन करने से कैलोरी इनटेक बहुत बढ़ सकता है. अनहेल्दी वजन बढ़ सकता है और प्रग्नेंसी के दौरान जेस्टेशनल डायबिटीज मेलिटस (GDM) का खतरा बढ़ सकता है। GDM वह स्थिति है जिसमें ब्लड शुगर लेवल प्रेग्नेंसी के दौरान असामान्य रूप से बढ़ जाता है।
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ट्राइमेस्टर के अनुसार कैलोरी की जरूरत
हेल्थ एक्सपर्टस की माने तो पहले ट्राइमेस्टर मे कैलोरी की जरूरत में कोई खास बढ़ोतरी नहीं होती। “अधिकतर महिलाओं को इस स्टेज पर एक्स्ट्रा कैलोरी की जरूरत नहीं होती। दूसरे और तीसरे ट्राइमेस्टर में हर दिन अतिरिक्त 300–450 किलोकैलोरी पर्याप्त होती है, जो लगभग एक हेल्दी स्नैक के बराबर है, न कि डबल मील के बराबर।” न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स भी बताते हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान कैलोरी की जरूरत धीरे-धीरे बढ़ती है। क्लाउडनाइन ग्रुप ऑफ़ हॉस्पिटल्स की डाइटीशियन गरिमा चौधरी कहती हैं, “पहले ट्राइमेस्टर में ऊर्जा की जरूरतें आमतौर पर वैसी ही रहती हैं। दूसरे ट्राइमेस्टर में लगभग 340 कैलोरी और तीसरे में 450 कैलोरी रोज़ाना पर्याप्त होती हैं।”
न्यूट्रिएंट्स की गुणवत्ता पर दें ध्यान

प्रेग्नेंसी में कैलोरी बढ़ाने के बजाय न्यूट्रिएंट्स से भरपूर भोजन पर ध्यान देना जरूरी है। डॉ. रहेजा कहती हैं, “ज्यादातर भारतीय महिलाएं पहले से ही रोज़ाना 2,000 से अधिक कैलोरी लेती हैं। इसलिए भोजन की क्वालिटी सुधारें, अधिक प्रोटीन और फाइबर लें और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट कम करें।”
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जेस्टेशनल डायबिटीज़ का संबंध
जेस्टेशनल डायबिटीज़ तब होती है जब प्रेग्नेंसी के दौरान हॉर्मोन इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ाते हैं। ह्यूमन प्लेसेंटल लैक्टोजेन, प्रोजेस्टेरोन और कोर्टिसोल जैसे हॉर्मोन शरीर की इंसुलिन उपयोग क्षमता को प्रभावित करते हैं। अगर इसके साथ अत्यधिक कैलोरी ली जाए, विशेषकर रिफाइंड कार्ब्स और मीठा खाना, तो मेटाबॉलिक बैलेंस बिगड़ सकता है। तेज़ी से बढ़ता वज़न और सेंट्रल फैट इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ाते हैं और पैंक्रियास पर दबाव डालते हैं।
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जेस्टेशनल डायबिटीज़ की पहचान और जोखिम
जेस्टेशनल डायबिटीज़ अक्सर चुपचाप बढ़ता है। कई महिलाओं को शुरुआती लक्षण महसूस नहीं होते। डॉक्टर रेड फ्लैग्स जैसे तेज़ी से वजन बढ़ना, अधिक मीठा और प्रोसेस्ड खाना, कम प्रोटीन या आराम वाली जीवनशैली पर ध्यान देकर पहले ग्लूकोज़ टेस्ट की सलाह देते हैं। जो महिलाएं PCOS, पहले जेस्टेशनल डायबिटीज़, मोटापा या टाइप 2 डायबिटीज़ के परिवार इतिहास से जुड़ी हैं, उन्हें शुरुआती जांच की जरूरत होती है।
Disclaimer: यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए प्रस्तुत किया गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत मेडिकल परामर्श, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है।










