Prashant Kishor Decision : बिहार विधानसभा चुनाव 2026 में मिली करारी हार के बाद जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा फैसला लिया है। चुनावी मैदान में उम्मीद के मुताबिक सफलता न मिलने के बाद, उन्होंने अब राजधानी पटना की सीमा पर स्थित एक साधारण आश्रम को अपना नया ठिकाना बनाने का निर्णय लिया है। प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया है कि वे अगले पांच वर्षों तक इसी आश्रम में रहकर अपनी पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करेंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि जब तक उनकी पार्टी जन सुराज आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2031 के लिए खुद को एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित नहीं कर लेती, तब तक 48 वर्षीय पूर्व राजनीतिक रणनीतिकार इसी आश्रम में रहकर अपना जीवन व्यतीत करेंगे।
दरभंगा में किया बड़ा खुलासा
प्रशांत किशोर ने हाल ही में दरभंगा में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस बात की आधिकारिक जानकारी दी कि उन्होंने बीते मंगलवार (19 मई) की रात को ही पटना स्थित अपना आलीशान सरकारी व निजी आवास पूरी तरह से छोड़ दिया था। न्यूज़ एजेंसी पीटीआई (PTI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, पीके ने बताया कि पटना के जिस घर में वे अब तक रह रहे थे, उसे उन्होंने हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है। अब उनका नया ठिकाना बिहटा में आईआईटी-पटना (IIT-Patna) के पास स्थित ‘बिहार नवनिर्माण आश्रम’ होगा, जो अगले पांच सालों तक उनके निवास और कार्यस्थल दोनों के रूप में काम करेगा। इसके साथ ही उन्होंने गहरा भरोसा जताया कि अगले विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी बिहार की राजनीति और जनता की सोच पर एक बड़ा और सकारात्मक प्रभाव डालने में निश्चित रूप से सफल रहेगी।
‘शेखपुरा हाउस’ से चलता था सियासी दफ्तर
आपको बता दें कि इस फैसले से पहले तक प्रशांत किशोर पटना एयरपोर्ट के बेहद नजदीक स्थित ‘शेखपुरा हाउस’ से अपनी सभी राजनीतिक गतिविधियों और पार्टी के सांगठनिक कामकाज को संभाल रहे थे। यह प्रसिद्ध आवास बिहार के पूर्व सांसद और वर्तमान में जन सुराज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह (जिन्हें पप्पू सिंह के नाम से भी जाना जाता है) का है। शेखपुरा हाउस पिछले लंबे समय से जन सुराज का मुख्य रणनीतिक केंद्र बना हुआ था, जहां से पूरे सूबे की चुनावी गोटियां सेट की जाती थीं। लेकिन अब चुनावी हार के बाद प्रशांत किशोर ने इस सियासी चकाचौंध से दूरी बना ली है और आश्रम की सादगी के बीच रहकर पार्टी को नए सिरे से खड़ा करने की कसम खाई है।
नीतीश कुमार पर तीखा पलटवार
आश्रम में शिफ्ट होने की घोषणा के बीच प्रशांत किशोर ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार पर एक बार फिर तीखा राजनीतिक हमला बोला। जन सुराज प्रमुख ने तंज कसते हुए कहा कि बिहार की जनता ने जिस चेहरे को बड़े भरोसे के साथ सूबे का मुख्यमंत्री चुना था, वह नेता खुद राज्य में बड़े पैमाने पर हो रहे युवाओं के माइग्रेशन (पलायन) की गंभीर समस्या को हल करने में पूरी तरह नाकाम रहा। पीके ने आरोप लगाया कि समस्या सुलझाने के बजाय वे खुद ही बिहार की सक्रिय राजनीति छोड़कर चले गए, लेकिन उन्होंने जाते-जाते इस बात का पूरा ध्यान रखा कि उनके बेटे की राजनीतिक पैठ बिहार की सत्ता में अच्छी तरह से स्थापित हो जाए।
जनता से भावुक अपील
अपने इस नए सफर की शुरुआत करते हुए प्रशांत किशोर ने एक बार फिर बिहार के आम मतदाताओं से अपने निजी और राज्य के हितों को प्राथमिकता देने की भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि सूबे की बदहाली तब तक दूर नहीं होगी जब तक लोग जाति, धर्म, मुफ्त के राशन या पैसों के लालच में आकर अपना कीमती वोट देते रहेंगे। उन्होंने आगाह किया कि वोट डालते समय हर नागरिक को अपने और अपने बच्चों के भविष्य के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए। पीके ने विशेष रूप से बिहार की महिलाओं से अपील करते हुए कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नीतीश कुमार या लालू प्रसाद यादव जैसे कद्दावर नेताओं के चेहरों से प्रभावित होने के बजाय अपने अधिकारों को समझना होगा।
‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ पर निशाना
प्रशांत किशोर ने राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए महिलाओं से कहा कि उन्हें महज 10,000 रुपये के अस्थाई लालच में आकर अपना भविष्य और वोट किसी राजनीतिक दल को नहीं बेचना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जन सुराज प्रमुख की यह तीखी टिप्पणी सीधे तौर पर विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ की तरफ इशारा करती है। इस योजना के तहत सरकार ने चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले सूबे की करीब 1.5 करोड़ महिलाओं के बैंक खातों में सीधे 10-10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता राशि ट्रांसफर की थी, जिसे पीके ने सीधे तौर पर मतदाताओं को रिझाने का एक चुनावी हथकंडा करार दिया है।










