Prakash Chik Baraik: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मची राजनीतिक उथल-पुथल थमने का नाम नहीं ले रही है। लोकसभा चुनावों के बाद अब संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी को एक के बाद एक कई बड़े झटके लग रहे हैं।
गुरुवार को पार्टी को उस वक्त एक और तगड़ा झटका लगा, जब टीएमसी के दिग्गज और प्रमुख आदिवासी चेहरा माने जाने वाले राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया। प्रकाश चिक बड़ाईक का यह फैसला पश्चिम बंगाल की राजनीति और तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के लिए बेहद चौंकाने वाला माना जा रहा है।
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थम नहीं रहा इस्तीफों का दौर
तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा यह अंदरूनी संकट नया नहीं है, बल्कि पिछले कुछ दिनों से पार्टी के बड़े नेताओं में असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। प्रकाश चिक बड़ाईक का यह कदम पार्टी के दो अन्य बेहद वरिष्ठ और कद्दावर नेताओं— सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव के इस्तीफे के ठीक बाद आया है।
सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव ने भी हाल ही में अपनी नाराजगी या व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए उच्च सदन (Rajya Sabha) की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया था। इन दोनों बड़े नेताओं के जाने के तुरंत बाद प्रकाश चिक बड़ाईक के इस इस्तीफे ने यह साफ कर दिया है कि टीएमसी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इसके साथ ही, हाल के कुछ ही दिनों के भीतर राज्यसभा से इस्तीफा देने वाले तृणमूल कांग्रेस के सांसदों की कुल संख्या अब बढ़कर तीन हो गई है।
राज्यसभा में घटी टीएमसी की ताकत
संसद के मानसून सत्र और आगामी विधायी कार्यों से ठीक पहले हो रहे इन लगातार इस्तीफों का सीधा और नकारात्मक असर संसद के उच्च सदन में तृणमूल कांग्रेस के संख्या बल (Strength) पर पड़ रहा है। विपक्ष के तौर पर केंद्र सरकार को घेरने की रणनीति बना रही टीएमसी के लिए यह बेहद कमजोर स्थिति पैदा कर रहा है।
संख्या बल का समीकरण
प्रकाश चिक बड़ाईक के इस ताजा इस्तीफे के बाद अब राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों की कुल संख्या घटकर केवल 10 रह जाने की संभावना है। संसद में पार्टी की ताकत कम होने से राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन के भीतर भी टीएमसी का वजन और प्रभाव कम हो सकता है।
अगले एक हफ्ते में 3 और इस्तीफों की तलवार
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के लिए मुश्किलें यहीं खत्म होती नहीं दिख रही हैं। राजनीतिक गलियारों और सूत्रों से मिल रही खबरों के मुताबिक, टीएमसी के भीतर बगावत की यह आग और भड़क सकती है।
कहा जा रहा है कि अगले एक सप्ताह के भीतर टीएमसी के कम से कम तीन और राज्यसभा सांसद अपने पदों से इस्तीफा सौंप सकते हैं। वे नेता भी पार्टी के कुछ आंतरिक फैसलों और कार्यशैली से असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। यदि आने वाले दिनों में ये तीन और इस्तीफे भी हो जाते हैं, तो राज्यसभा में टीएमसी का कुनबा पूरी तरह बिखर जाएगा और पार्टी के भीतर चल रहा यह आंतरिक संकट बेहद गहरा और अनियंत्रित हो सकता है। फिलहाल, टीएमसी नेतृत्व इस डैमेज कंट्रोल (Damage Control) में जुट गया है कि किसी तरह बाकी बचे सांसदों को पाला बदलने या इस्तीफा देने से रोका जा सके।
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