PoK Protest: डेढ़ लाख प्रदर्शनकारियों की आवाज बने सरदार अमन खान, PoK में क्यों बढ़ रहा आंदोलन?

शांति का ढोंग करने वाले पाकिस्तान का असली क्रूर चेहरा एक बार फिर बेनकाब हो गया है। जनरल आसिम मुनीर के इशारे पर पाकिस्तानी सेना अपने ही हक (रोटी और सस्ती बिजली) के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे पीओके के निर्दोष नागरिकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसा रही है।

PoK Protest

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जून 11, 2026

PoK Protest: पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इस्लामाबाद सरकार और पाकिस्तानी सेना के खिलाफ अवाम का गुस्सा अब एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व जन आंदोलन का रूप ले चुका है। पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स द्वारा किए जा रहे बर्बर दमन और गोलीबारी के बावजूद वहां के नागरिकों का हौसला डिगा नहीं है। सुरक्षाबलों की सीधी गोलीबारी में अब तक 32 से अधिक प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हैं, लेकिन इसके बाद भी अवाम पीछे हटने को तैयार नहीं है। हाल ही में बुधवार को एक अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला, जब करीब डेढ़ लाख से अधिक प्रदर्शनकारी पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की ‘जल्लाद फौज’ के तमाम अवरोधों को तोड़ते हुए रावलकोट की सड़कों पर उतर आए।

हाथों में बैनर और काले झंडे लिए यह जनसैलाब रावलकोट, बाग, हट्टियान बाला, कोटली, मीरपुर, सुधनोती, धीरकोट, डडयाल और मुजफ्फराबाद जैसे प्रमुख शहरों में मार्च निकाल रहा है। शुरुआत में यह विरोध प्रदर्शन केवल आटे की बढ़ती कीमतों, बिजली के भारी-भरकम बिलों और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी आर्थिक मांगों को लेकर शुरू हुआ था, लेकिन अब यह पाकिस्तानी हुकूमत और सैन्य प्रतिष्ठान के खिलाफ एक बड़े राजनीतिक विद्रोह में बदल चुका है। प्रदर्शनकारियों की योजना रावलकोट में एकजुट होकर राजधानी मुजफ्फराबाद की ओर कूच करने की है, जहां वे प्रशासन के सामने अपनी 38 सूत्रीय मांगें रखेंगे, जिसमें करों में कटौती और स्थानीय संसाधनों पर अपना हक शामिल है।

मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसे हालात! ईरान ने बहरीन, कुवैत और होर्मुज में खोला मोर्चा, दुनिया की बढ़ी चिंता

पाकिस्तानी फौज का क्रूर दमन

पीओके के स्थानीय प्रशासन और पाकिस्तानी सेना ने प्रदर्शनकारियों को मुजफ्फराबाद पहुंचने से रोकने के लिए क्रूरता की सारी हदें पार कर दी हैं। मुख्य राजमार्गों और संपर्क मार्गों को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। कई जगहों पर बड़े-बड़े पेड़ों को काटकर और कटीले तार लगाकर सड़कों को अवरुद्ध किया गया है।

चप्पे-चप्पे पर अर्धसैनिक बल (रेंजर्स) और सेना तैनात है, जो आम नागरिकों पर सीधे और ताबड़तोड़ गोलियां बरसा रहे हैं। सोशल मीडिया पर आए कई वीडियो में पाकिस्तानी सुरक्षाबलों की इस बर्बरता को साफ देखा जा सकता है। लेकिन अवाम ने भी ठान लिया है कि वे अब झुकेंगे नहीं। लोग मुख्य रास्तों के बंद होने पर पहाड़ों और दुर्गम वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करके आगे बढ़ रहे हैं, जिसने पाकिस्तानी हुकूमत की नींद उड़ा दी है।

कौन हैं सरदार अमन खान? जिन्होंने फूंक दी बगावत की फूंक

इस पूरे महा-आंदोलन के पीछे जिस शख्स का दिमाग और नेतृत्व काम कर रहा है, उनका नाम है सरदार अमन खान। सरदार अमन खान पीओके के एक बेहद मुखर, निडर राजनीतिक कार्यकर्ता और संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के केंद्रीय कोर कमेटी के सदस्य हैं। महज 30 वर्ष की उम्र में वे इस समय पीओके में अधिकारों की लड़ाई का सबसे बड़ा और युवा चेहरा बनकर उभरे हैं।

सरदार अमन खान के नेतृत्व और आंदोलन से जुड़ी मुख्य बातें

अधिकारों की लड़ाई: उन्होंने बढ़ते टैक्स, बेलगाम महंगाई, बिजली संकट और स्थानीय कश्मीरियों के साथ पाकिस्तानी हुकूमत द्वारा किए जा रहे सौतेले व्यवहार के खिलाफ जमीन पर उतरकर लड़ाई शुरू की।

डिजिटल और युवा नेतृत्व: अमन खान सोशल मीडिया लाइव और डिजिटल कैंपेनिंग के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने इंटरनेट के जरिए पीओके के कोने-कोने के युवाओं को इस आंदोलन से जोड़ा। मई 2025 में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों की कमान भी उन्हीं के हाथों में थी।

आरक्षित सीटों का विरोध: उन्होंने पीओके विधानसभा की 45 सीटों में से उन 12 आरक्षित सीटों को खत्म करने की पुरजोर मांग उठाई है, जो 1947 के बाद पाकिस्तान में बसे शरणार्थियों के नाम पर रखी गई हैं और जिनका इस्तेमाल पाकिस्तानी एजेंसियां चुनावों में धांधली के लिए करती हैं।

संगठन पर प्रतिबंध और 1 करोड़ का इनाम

सरदार अमन खान के तीखे भाषणों और पाकिस्तानी सेना की प्रशासनिक नीतियों की खुली आलोचना से घबराकर पाकिस्तान सरकार ने संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) को एक ‘आतंकवादी संगठन’ घोषित करते हुए इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। अमन खान का कहना है कि हुकूमत अपने हक के लिए शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठाने वाले आम नागरिकों को आतंकवादी बताकर असल मुद्दों से ध्यान भटका रही है।

प्रतिबंध के बाद पाकिस्तानी एजेंसियों ने अमन खान समेत कई बड़े नेताओं के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए और उनकी धरपकड़ तेज कर दी। हद तो तब हो गई जब पाकिस्तानी प्रशासन ने सरदार अमन खान की गिरफ्तारी या उनके बारे में सूचना देने वाले के लिए 1 करोड़ पाकिस्तानी रुपये के भारी-भरकम इनाम की घोषणा कर दी। इसके बावजूद, पीओके की अवाम अपने इस युवा नेता को ढाल बनकर सुरक्षा दे रही है और उनकी एक आवाज पर पूरी घाटी ठप करने की ताकत रख रही है।

Oman Ship Attack: “हमारे नागरिकों की जान सबसे ऊपर…” ओमान जहाज हमले पर अमेरिका के ‘प्रभारी’ को बुलाकर भारत ने दी सख्त चेतावनी