
PM Modi Attack on Opposition: गुजरात के एकता नगर में आयोजित ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की एकता, संप्रभुता और लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गणतंत्र हमें जनता के प्रति जवाबदेह बनाता है और एकता हमें एक राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ने की अटूट शक्ति प्रदान करती है। यही कारण है कि अब देश में स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस की तरह ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ को भी पूरे उत्साह के साथ एक प्रमुख राष्ट्रीय त्योहार के रूप में मनाया जाता है।
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आंतरिक चुनौतियों और दुष्प्रचार पर देशवासियों की एकजुटता

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की वैश्विक मंच पर कूटनीतिक और रणनीतिक सफलता का श्रेय देशवासियों की अभूतपूर्व एकजुटता को दिया। उन्होंने कहा कि जब भारत बाहरी चुनौतियों का समाधान तलाश रहा था, उस समय देश के भीतर मौजूद कुछ नकारात्मक ताकतें झूठ, अफवाहें और अस्थिरता फैलाने के प्रयास में जुटी हुई थीं।
हालांकि, देशवासियों ने इन षड्यंत्रों को खारिज करते हुए राष्ट्र के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने का परिचय दिया। नागरिकों का यही अटुक विश्वास और एकजुटता भारत की सबसे बड़ी ताकत और हौसले का आधार है।
“विरोधी पक्ष अब अवरोध पक्ष बन चुका है”: विपक्ष पर कड़ा प्रहार
समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने विपक्ष की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि विपक्षी दल भारत विरोधी ताकतों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन दे रहे हैं। पीएम ने कहा कि हताशा और निराशा में डूबा विपक्ष देश के विकास के मार्ग में निरंतर बाधाएं उत्पन्न कर रहा है। यह महज राजनीतिक विरोध न होकर देश की प्रगति में रोड़ा अटकाने की राजनीति बन चुका है, जिससे संविधान की मर्यादाएं तार-तार हो रही हैं।


उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का स्मरण करते हुए कहा कि संविधान निर्माताओं ने लोकतंत्र में सत्ता पक्ष के साथ-साथ एक जिम्मेदार विरोधी पक्ष की व्यवस्था बनाई थी। लेकिन दुर्भाग्यवश, वर्तमान समय में विरोधी पक्ष अपने मूल दायित्वों को त्यागकर ‘अवरोध पक्ष’ में तब्दील हो चुका है।
वैश्विक ऊर्जा संकट और भारत का सामर्थ्य
दुनिया भर में गहराए ऊर्जा संकट का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बीते महीनों में कई देशों में पेट्रोल और डीजल की खरीद पर कड़े प्रतिबंध और सीमाएं लगानी पड़ी थीं। उस समय भारत के लिए भी विभिन्न आशंकाएं जताई जा रही थीं कि अत्यधिक आबादी और सीमित पेट्रोलियम उत्पादन के कारण भारत सबसे बड़े संकट का सामना करेगा।
इन आशंकाओं के बीच भारत विरोधी तत्व भी सक्रिय हो गए थे। लेकिन भारत सरकार की दूरदर्शी नीतियों और देश की सामर्थ्य के बल पर वैश्विक ऊर्जा संकट का कोई भी प्रतिकूल प्रभाव आम नागरिकों और देश की अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ने दिया गया।
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