PM Modi Parliament Speech : महिला आरक्षण संशोधन विधेयक संसद में पेश, पीएम मोदी ने विपक्ष को दिया क्रेडिट का ब्लैंक चेक

Women’s Reservation Amendment Bill 2026: प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में 131वें संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष को खुली चुनौती और ऑफर दिया। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का पूरा श्रेय विपक्ष ले ले, वे ब्लैंक चेक देने को तैयार हैं। क्या यह 2029 चुनावों के लिए मोदी का बड़ा कूटनीतिक दांव है?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 16, 2026

PM Modi Parliament Speech :  संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र का आगाज गुरुवार, 16 अप्रैल को नारी शक्ति के सम्मान के साथ हुआ। केंद्र सरकार ने लोकसभा में तीन महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पेश किए, जिनका उद्देश्य ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण बिल) को धरातल पर उतारना है। हालांकि यह बिल 2023 में ही पारित हो गया था, लेकिन इसके वास्तविक क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कानूनी संशोधनों की प्रक्रिया अब शुरू की गई है। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सदन के पटल पर महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को रखा, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐतिहासिक और प्रेरक संबोधन दिया।

भारत का बढ़ता आत्मविश्वास: विकसित भारत के संकल्प में महिलाओं की भूमिका

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत 21वीं सदी के भारत के नए आत्मविश्वास से की। उन्होंने कहा कि आज वैश्विक मंच पर भारत की जो स्वीकृति और गौरव बढ़ा है, वह हम सबके लिए गर्व का विषय है। पीएम ने जोर देकर कहा कि ‘विकसित भारत’ के नीति निर्धारण में ‘सबका साथ, सबका विकास’ तभी सार्थक होगा, जब देश की आधी आबादी यानी 50 प्रतिशत महिलाएं निर्णय प्रक्रिया का सक्रिय हिस्सा बनेंगी। उन्होंने इसे समय की सबसे बड़ी मांग बताया और सांसदों से इस अवसर को ऐतिहासिक बनाने का आग्रह किया।

विरोध करने वालों को चेतावनी: महिलाओं ने कभी माफ नहीं किया

राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को आड़े हाथों लेते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अतीत में जिन भी दलों ने महिला आरक्षण का विरोध किया है, उन्हें देश की महिलाओं ने चुनावों में कड़ा सबक सिखाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग केवल राजनीतिक नफा-नुकसान सोचते हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि महिलाओं के हक में अड़ंगा लगाने वालों का हश्र हमेशा बुरा हुआ है। 2024 के चुनावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि चूंकि तब इसे सर्वसम्मति मिली थी, इसलिए यह विवाद का विषय नहीं रहा, जिससे विरोधियों का राजनीतिक नुकसान होने से बच गया।

जमीनी नेतृत्व का उभार: ‘झाड़ू-पोछा नहीं, निर्णय प्रक्रिया में चाहिए भागीदारी’

पीएम ने समाज में आए बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले 25-30 वर्षों में महिलाएं न केवल जागरूक हुई हैं, बल्कि ‘वोकल’ भी हुई हैं। उन्होंने कहा कि अब महिलाएं केवल घरेलू कार्यों तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि वे देश की नीति निर्धारण प्रक्रिया में जुड़ना चाहती हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि जमीनी स्तर (ग्रास रूट) पर लाखों बहनें पहले ही सफल लीडर बन चुकी हैं। जो लोग आज भी इस बदलाव का विरोध करेंगे, उन्हें भविष्य में इसकी भारी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी।

जातिगत राजनीति और व्यक्तिगत मित्रता: अखिलेश और धर्मेंद्र यादव का जिक्र

संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने समाजवादी पार्टी के नेताओं पर भी चुटकी ली। धर्मेंद्र यादव को संबोधित करते हुए उन्होंने अपनी पृष्ठभूमि का जिक्र किया और कहा कि वे अति पिछड़े समाज से आते हैं, लेकिन संविधान ने उन्हें सबको साथ लेकर चलने का रास्ता दिखाया है। वहीं, अखिलेश यादव को अपना ‘मित्र’ बताते हुए उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि वे कभी-कभी मदद कर देते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की नारी शक्ति अब केवल नारों को नहीं, बल्कि सरकार की ‘नीयत’ को देख रही है।

क्रेडिट का ‘ब्लैंक चेक’: राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित की अपील

प्रधानमंत्री ने विपक्ष के उन आरोपों का भी जवाब दिया जिसमें इसे मोदी का राजनीतिक स्वार्थ बताया जा रहा था। उन्होंने एक बड़ा दिल दिखाते हुए कहा, “हमें इस बिल का क्रेडिट नहीं चाहिए। जैसे ही यह पारित होगा, मैं विज्ञापन देकर सबका धन्यवाद करने को तैयार हूं। मैं आप सबको क्रेडिट का ब्लैंक चेक दे रहा हूं, सबकी फोटो छपवा दूंगा, बस इसे पारित होने दें।” उन्होंने स्पष्ट किया कि 2024 में इसे लागू करना संभव नहीं था, लेकिन 2029 में हमारे पास सुनहरा अवसर है और हमें अब और विलंब नहीं करना चाहिए।

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