PM Modi Address To Nation: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने उनके भाषण को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे निष्पक्षता से दूर बताते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। खासतौर पर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने इसे पक्षपातपूर्ण और राजनीतिक हमला करार दिया है।
जयराम रमेश का आरोप

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री के संबोधन की आलोचना करते हुए कहा कि राष्ट्र के नाम दिया गया भाषण हमेशा संतुलित और प्रेरणादायक होना चाहिए। उनका मानना है कि इस तरह के संबोधन का उद्देश्य देशवासियों में आत्मविश्वास और एकता की भावना बढ़ाना होता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं दिखा।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह भाषण निष्पक्ष होने के बजाय एकतरफा और राजनीतिक रूप से प्रेरित था। जयराम रमेश ने इसे “पक्षपातपूर्ण और निराशाजनक” बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को इस तरह के मुद्दों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए जवाब देना चाहिए था।
महिला आरक्षण और परिसीमन पर उठाए सवाल
जयराम रमेश ने महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को संवैधानिक संशोधन में आई कमियों के लिए माफी मांगने के बजाय महिलाओं के नाम पर लाए गए प्रस्तावों की मंशा स्पष्ट करनी चाहिए थी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम”, जिसे सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से पारित किया गया था, उसे लागू करने में इतनी देरी क्यों हुई। उनके अनुसार, सरकार की नीयत पर सवाल उठना स्वाभाविक है, क्योंकि यह अधिनियम काफी समय बाद अधिसूचित किया गया।
महुआ मोइत्रा का तीखा हमला

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी प्रधानमंत्री के संबोधन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे “ड्रामेबाजी” बताते हुए कहा कि इस तरह के भाषण से वास्तविक मुद्दों को छुपाया नहीं जा सकता। उन्होंने अपने बयान में कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षण पहले ही पारित और अधिसूचित हो चुका है, इसलिए अब इसे लागू करने में देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि संसद में महिलाओं को एक तिहाई प्रतिनिधित्व देने के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं।
खरगे का तंज: कांग्रेस का बार-बार जिक्र
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री के भाषण में कांग्रेस का बार-बार जिक्र किए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि भाषण के दौरान कांग्रेस का नाम कई बार लिया गया, जबकि महिलाओं से जुड़े मुद्दों का जिक्र अपेक्षाकृत कम हुआ। खरगे ने इसे सरकार की प्राथमिकताओं का संकेत बताते हुए कहा कि इससे साफ होता है कि सरकार का ध्यान विपक्ष पर ज्यादा है, बजाय महिला सशक्तिकरण के मुद्दों पर केंद्रित होने के।
सियासी माहौल हुआ गरम
प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद जिस तरह से विपक्षी दलों ने प्रतिक्रिया दी है, उससे राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है। एक ओर सरकार अपने फैसलों और नीतियों का बचाव कर रही है, वहीं विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।









