PM Modi on Women’s Reservation Bill: शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा महत्वपूर्ण संशोधन बिल पारित न हो पाने के बाद देश का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। इस विफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। तमिलनाडु में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने इस विधायी गतिरोध के लिए सीधे तौर पर कांग्रेस और डीएमके (DMK) गठबंधन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने अपने राजनीतिक हितों के लिए नारी शक्ति के अधिकारों के साथ समझौता किया है।
संसद में बिल रुकने पर पीएम की ‘पीड़ा’
प्रधानमंत्री ने जनसभा में भावुक होते हुए कहा कि वह आज अपनों के बीच अपना गुस्सा और पीड़ा साझा करने आए हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम (Nari Shakti Vandan Adhiniyam) को धरातल पर उतारने के लिए 16 अप्रैल को एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया था। पीएम मोदी के अनुसार, इस संशोधन का उद्देश्य संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना था। हालांकि, लोकसभा में मतदान (Voting in Lok Sabha) के दौरान विपक्षी दलों के असहयोग के कारण यह नेक कोशिश परवान नहीं चढ़ सकी।
विपक्षी दलों से पीएम मोदी की व्यक्तिगत अपील
पीएम मोदी ने खुलासा किया कि उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर सभी राजनीतिक दलों से इस बिल का समर्थन करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा, “मैंने स्पष्ट रूप से कहा था कि विपक्षी दल इस ऐतिहासिक सुधार का पूरा क्रेडिट ले सकते हैं, मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है।” प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि उनका एकमात्र लक्ष्य यह था कि साधारण परिवारों की बहनें अधिक संख्या में नीति निर्धारण की प्रक्रियाओं का हिस्सा बनें। लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने महिला सशक्तिकरण के बजाय सियासी नफे-नुकसान को प्राथमिकता दी।
डीएमके और कांग्रेस पर तीखा प्रहार
तमिलनाडु की धरती से बोलते हुए पीएम मोदी ने द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम (DMK) और कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों की ‘घृणा और ओछी राजनीति’ के कारण तमिल महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ने का मौका हाथ से निकल गया। उन्होंने समझाया कि यदि यह संशोधन विधेयक (Amendment Bill) पारित हो जाता, तो 2011 की जनगणना के आधार पर तमिलनाडु को संसद में अधिक सीटें मिलतीं और कई स्थानीय महिलाएं विधायक व सांसद बनतीं। पीएम मोदी ने दावा किया कि डीएमके का महिला विरोधी चेहरा अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है।
बीजेपी और एनडीए का संकल्प
भले ही वर्तमान संशोधन विफल हो गया हो, लेकिन प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उन्होंने घोषणा की कि बीजेपी और एनडीए (BJP & NDA) नारी शक्ति के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। पीएम ने कहा कि विपक्ष चाहे जितनी बाधाएं खड़ी कर ले, सरकार महिलाओं को उनका उचित स्थान दिलाने के लिए वैकल्पिक कानूनी रास्ते (Alternative Legal Options) तलाशती रहेगी। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार अब आरक्षण लागू करने के अन्य तकनीकी और संवैधानिक पहलुओं पर विचार कर रही है।
पीएम मोदी की जनता से अपील
बता दें कि सरकार ने लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण (33% Women Reservation) लागू करने का वादा किया है। इस बिल के गिरने को भाजपा अब चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है। पीएम मोदी ने जनता से अपील की कि वे उन दलों को सबक सिखाएं जिन्होंने महिलाओं के रास्ते में कांटे बिछाए हैं। अब देखना यह होगा कि 10 मई को होने वाले आगामी चुनावों में जनता महिला आरक्षण के इस मुद्दे पर क्या फैसला सुनाती है।









