PM Modi New Zealand Visit: चार दशक बाद न्यूजीलैंड जाएंगे भारतीय प्रधानमंत्री, कीवी पीएम ने जताई खुशी

चार दशक बाद भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड यात्रा तय मानी जा रही है, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है। कीवी प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इस दौरे पर खुशी जताई है। इस यात्रा में व्यापार, सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक सहयोग पर बड़े फैसले हो सकते हैं।

PM Modi New Zealand Visit

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 3, 2026

PM Modi New Zealand Visit:  भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय संबंधों का एक नया और स्वर्णिम अध्याय शुरू होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह अपनी पहली आधिकारिक न्यूजीलैंड यात्रा पर रवाना होंगे। पिछले 40 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला न्यूजीलैंड दौरा है, जो दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने शुक्रवार को इस बहुप्रतीक्षित दौरे की आधिकारिक पुष्टि की। पीएम मोदी 10 जुलाई को ऑकलैंड पहुंचेंगे और अपनी संक्षिप्त किंतु अत्यंत महत्वपूर्ण यात्रा के दौरान द्विपक्षीय वार्ता में हिस्सा लेंगे।

‘कीवी’ प्रधानमंत्री लक्सन ने सोशल मीडिया पर जताया उत्साह

न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने अपने आधिकारिक ‘X’ हैंडल पर उत्साह व्यक्त करते हुए लिखा कि भारतीय प्रधानमंत्री का आगमन उनके देश के लिए एक बड़े सम्मान की बात है। उन्होंने भारत को विश्व की सबसे बड़ी और तीव्र गति से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताया। लक्सन ने कहा कि भारत न्यूजीलैंड की आर्थिक समृद्धि के लिए एक रणनीतिक भागीदार है। उन्होंने अप्रैल 2025 में हस्ताक्षरित ‘न्यूजीलैंड-भारत मुक्त व्यापार समझौते’ (FTA) का जिक्र करते हुए कहा कि यह दौरा दोनों देशों के बीच व्यापारिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करेगा। इस समझौते से न्यूजीलैंड में नई नौकरियां पैदा होंगी, निर्यात में वृद्धि होगी और कीवी समुदायों के आर्थिक स्तर में सुधार आएगा।

महज 9 महीने में तैयार हुआ ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता

प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा दोनों देशों के बीच संपन्न हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के महज दो महीने बाद हो रहा है। इस समझौते की गति ही इसकी सबसे बड़ी विशेषता रही है। मार्च 2025 में शुरू हुई बातचीत को केवल 9 महीने के रिकॉर्ड समय में पूरा कर लिया गया, जो भारत द्वारा अब तक किए गए सबसे त्वरित व्यापार समझौतों में से एक माना जाता है। यह उपलब्धि दोनों देशों की प्रशासनिक इच्छाशक्ति और आपसी भरोसे को दर्शाती है।

दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मिलेगा बड़ा बूस्ट

यह मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों के लिए मील का पत्थर साबित होगा। भारत के लिए, इस FTA के लागू होने के साथ ही उसके 8,284 निर्यात उत्पादों को न्यूजीलैंड के बाजार में पूर्ण ‘ड्यूटी-फ्री’ एक्सेस प्राप्त होगा। इसके अलावा, भारत को अपने विनिर्माण क्षेत्र के लिए आवश्यक लकड़ी के लट्ठे, कोकिंग कोल और धातुओं का स्क्रैप बिना किसी आयात शुल्क के मिलेगा, जिससे भारतीय उद्योगों की उत्पादन लागत घटेगी। कृषि के क्षेत्र में, एक विशेष ‘एग्रोटेक्नोलॉजी प्लान’ के तहत भारतीय किसानों को कीवी, सेब और शहद के उत्पादन में न्यूजीलैंड की उन्नत तकनीकों का लाभ मिलेगा। दूसरी ओर, न्यूजीलैंड की 95% वस्तुओं पर से टैरिफ हटने से वहां के निर्यातकों को भारत के 1.4 अरब के विशाल बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी।

भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की रक्षा की

इतनी बड़ी व्यापारिक साझेदारी के बावजूद भारत ने अपने घरेलू बाजार और विशेषकर छोटे किसानों व व्यापारियों के हितों का पूरा ध्यान रखा है। भारत ने लगभग 30% टैरिफ लाइनों को इस समझौते के दायरे से बाहर रखा है। इसमें डेयरी उत्पाद (जैसे दूध, घी, पनीर), खाद्य तेल और रत्न-आभूषण जैसे संवेदनशील क्षेत्र शामिल हैं, ताकि देश के स्थानीय उत्पादकों को किसी भी प्रकार की प्रतिस्पर्धा का सामना न करना पड़े। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की ऑकलैंड यात्रा न केवल इस व्यापार समझौते को धरातल पर उतारेगी, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ करेगी।

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