PM Modi ISRO: ISRO की शानदार कामयाबी! EOS-05 लॉन्च, PM मोदी ने वैज्ञानिकों को दी बधाई

ISRO ने GSLV-F17 रॉकेट के जरिए अत्याधुनिक EOS-05 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक भू-तुल्यकालिक कक्षा में स्थापित कर दिया है।

PM Modi ISRO

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

सितम्बर 4, 2026

PM Modi ISRO: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से GSLV-F17 रॉकेट ने उड़ान भरकर अत्याधुनिक EOS-05 इमेजिंग सैटेलाइट को उसकी निर्धारित भू-तुल्यकालिक कक्षा (Geosynchronous Orbit) में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है। इस बड़ी कामयाबी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ISRO के वैज्ञानिकों और देशवासियों को हार्दिक बधाई दी है।

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प्रधानमंत्री मोदी ने बताया गर्व का पल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस मिशन की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे देश के लिए गर्व का क्षण बताया है। प्रधानमंत्री के अनुसार, GSLV-F17 के माध्यम से EOS-05 को कक्षा में स्थापित किया जाना भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं, तकनीकी विकास और लगातार बढ़ते इनोवेशन को दर्शाता है। इसके साथ ही उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में सरकारी संस्थानों और भारतीय निजी उद्योगों के बीच बढ़ रहे सहयोग को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह बढ़ती साझेदारी देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम को एक नई ताकत और विशाल स्तर पर काम करने की अभूतपूर्व क्षमता प्रदान कर रही है।

GSLV-F17 मिशन की तकनीकी विशेषताएं

GSLV-F17 मिशन इसरो का एक बेहद महत्वपूर्ण और सफल प्रक्षेपण रहा है। यह GSLV रॉकेट की 19वीं उड़ान थी, जिसका मुख्य उद्देश्य EOS-05 सैटेलाइट को अंतरिक्ष में सटीक कक्षा तक पहुंचाना था।

रॉकेट की बनावट: GSLV एक तीन चरणों (थ्री-स्टेज) वाला भारी रॉकेट है, जिसमें सॉलिड, लिक्विड और स्वदेशी क्रायोजेनिक स्टेज का उपयोग किया जाता है। इसे भारी उपग्रहों को अंतरिक्ष की ऊंची कक्षाओं तक ले जाने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।

सटीक कार्यप्रणाली: निर्धारित समय के भीतर इस रॉकेट ने अपने सभी चरणों को सफलतापूर्वक पार करते हुए उपग्रह को उसकी तय कक्षा में स्थापित किया और मिशन को पूरी तरह से अंजाम दिया।

क्या है EOS-05 और इसकी खासियत?

EOS-05 एक अत्याधुनिक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है, जो भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक नया मील का पत्थर साबित हो रहा है।

जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट: यह भारत का पहला ऐसा इमेजिंग सैटेलाइट है जिसे जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से धरती की हाई-क्वालिटी तस्वीरें लेने के लिए तैयार किया गया है। यह पृथ्वी से लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर रहकर कार्य करेगा।

निरंतर निगरानी: कम ऊंचाई वाले सामान्य उपग्रह पृथ्वी के ऊपर से गुजरते समय कुछ समय के लिए ही नजर रख पाते हैं, जबकि 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थिर रहने के कारण EOS-05 भारत और आसपास के व्यापक क्षेत्रों की निरंतर लाइव और विस्तृत निगरानी करने में पूरी तरह सक्षम है।

देश को मिलने वाले प्रमुख लाभ

EOS-05 सैटेलाइट के अंतरिक्ष में स्थापित होने से देश को विभिन्न क्षेत्रों में अभूतपूर्व लाभ मिलने की उम्मीद है। इस उन्नत उपग्रह के जरिए मौसम की सटीक और समय पर निगरानी की जा सकेगी। इसके अलावा, बाढ़, चक्रवात और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान त्वरित चेतावनी और राहत कार्यों में मदद मिलेगी। कृषि क्षेत्र के विकास, पर्यावरण अध्ययन और देश की रणनीतिक सुरक्षा के लिहाज से भी यह सैटेलाइट बेहद मददगार साबित होगा।