Buddha Exhibition: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में भगवान बुद्ध से संबंधित पवित्र पिपरहवा अवशेषों की भव्य अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस प्रदर्शनी का शीर्षक प्रकाश और कमल: प्रबुद्ध व्यक्ति के अवशेष है। प्रधानमंत्री ने भगवान बुद्ध से संबंधित प्रदर्शनी के विभिन्न हिस्सों का अवलोकन भी किया।प्रधानमंत्री ने प्रदर्शनी की सूची का भी अनावरण किया।
दो चरणों में योजनाओं की पड़ताल से अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने की रणनीति
बुद्ध अवशेष प्रदर्शनी का PM मोदी ने किया उद्घाटन

प्रदर्शनी में एक सदी से अधिक समय बाद वापस लाए गए पिपरहवा अवशेषों के साथ-साथ राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली और भारतीय संग्रहालय, कोलकाता के संरक्षित पिपरहवा के प्रामाणिक अवशेष और पुरातात्विक सामग्री भी प्रदर्शित की गई हैं। यह प्रदर्शनी भगवान बुद्ध के महान विचारों को और अधिक लोकप्रिय बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप है। यह देश के युवाओं और इसकी समृद्ध संस्कृति के बीच संबंध बढाने का भी एक प्रयास है।
गुलामी हमारी विरासत को तबाह कर देती है-PM
इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि लंबे इंतजार के बाद देश की विरासत लौट आई है और इसकी पवित्र धरोहर घर वापस आ गई है।पीएम मोदी ने कहा कि,आज से देश के लोग भगवान बुद्ध के इन पवित्र अवशेषों के दर्शन कर सकेंगे और उनका दिव्य आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे।प्रधानमंत्री ने कहा कि गुलामी हमारी विरासत को भी तबाह कर देती है। उन्होंने कहा कि हमारी सभ्यता के प्रतीक भगवान बुध्द के अवशेषों के साथ भी यही हुआ लेकिन आज सरकार के प्रयास से सदियों से देश के बाहर ये पवित्र अवशेष देश में वापस आ गए हैं।पीएम मोदी ने भारत को भगवान बुद्ध की परंपराओं को जीवंत वाहक बताया।उन्होंने कहा कि,पिपरहवा, वैशाली, देवनीमोरी और नागार्जुनकोंडा से मिले भगवान बुद्ध से जुड़े अवशेष उनकी जीवित उपस्थिति है।
संग्रहालय में सुरक्षित रखे गए भगवान बुद्ध के अवशेष

आपको बता दें कि,1898 में खोजे गए पिपरहवा अवशेषों का प्रारंभिक बौद्ध धर्म के पुरातात्विक अध्ययन में महत्वपूर्ण स्थान है।यह भगवान बुद्ध से सीधे जुड़े सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण अवशेषों में से हैं। पुरातात्विक साक्ष्य पिपरहवा स्थल को प्राचीन कपिलवस्तु से जोड़ते हैं। कपिलवस्तु वह स्थान है जहां भगवान बुद्ध ने संन्यास लेने से पहले अपना प्रारंभिक जीवन व्यतीत किया था।पिपरहवा अवशेषों को एक सदी से भी अधिक समय के बाद भारत वापस लाया गया है।पिपरहवा अवशेष के कुछ हिस्से नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय और कोलकाता के भारतीय संग्रहालय में सुरक्षित रखे गए थे। इन अवशेषों को इस प्रदर्शनी में रखा गया है।










