PM Modi Speech Today : पीएम मोदी ने महिला आरक्षण बिल गिरने पर मांगी माफी, विपक्षी दलों को दी सख्त चेतावनी

जब सारा देश महिला आरक्षण बिल की उम्मीद लगाए बैठा था, तभी संसद में इसके गिरने ने सबको झकझोर दिया। आज रात प्रधानमंत्री मोदी ने टीवी पर आकर न केवल माफी मांगी, बल्कि उन चेहरों को बेनकाब किया जिन्होंने इसे रोका। क्या मोदी अब इस बिल के लिए कोई बड़ा अध्यादेश लाएंगे?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 18, 2026

PM Modi Speech Today : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार रात 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित करते हुए एक भावुक और कड़ा संदेश दिया। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत देश की मातृशक्ति से माफी मांगते हुए की। पीएम ने कहा, “लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को पारित न करा पाना मेरे लिए अत्यंत दुखद है। मैं देश की सभी माताओं, बहनों और बेटियों से हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं कि हमारी तमाम कोशिशों के बावजूद विपक्ष के अड़ियल रवैये के कारण यह ऐतिहासिक कदम रुक गया।” प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार महिलाओं को उनका लोकतांत्रिक हक दिलाने के लिए प्रतिबद्ध थी, लेकिन संसदीय गणित और विपक्षी एकजुटता ने इसमें रोड़ा अटका दिया।

विपक्षी दलों पर प्रहार: ‘स्वार्थी राजनीति’ का देश को नुकसान

पीएम मोदी ने अपने भाषण के दौरान कांग्रेस, द्रमुक (DMK) और समाजवादी पार्टी (सपा) जैसे क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों की ‘स्वार्थी और संकुचित राजनीति’ के कारण आज देश की नारी को अपने अधिकारों से वंचित होना पड़ा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मेरे लिए हमेशा ‘देशहित’ सर्वोपरि रहा है, लेकिन विपक्ष के लिए अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाना और तुष्टीकरण करना ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो दल कल तक नारी सशक्तिकरण के बड़े-बड़े दावे करते थे, आज उन्होंने संसद के भीतर महिलाओं के विरुद्ध मतदान करके अपना असली चेहरा दिखा दिया है।

संसदीय विफलता: बहुमत के बावजूद क्यों गिरा 131वां संशोधन बिल?

शुक्रवार को लोकसभा में जो हुआ, वह मोदी सरकार के 12 साल के इतिहास में पहली बार था। सरकार द्वारा पेश किया गया संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा। इस विधेयक का उद्देश्य न केवल महिलाओं को 33% आरक्षण देना था, बल्कि लोकसभा की सीटों को वर्तमान 543 से बढ़ाकर 816 करना भी था। सदन में मतदान के दौरान बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि विरोध में 230 वोट पड़े। नियमानुसार, संविधान संशोधन के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी, जिसे सरकार पूरा नहीं कर सकी। इस तकनीकी विफलता ने महिला आरक्षण के सपने को फिलहाल अधर में लटका दिया है।

कैबिनेट बैठक में सख्त तेवर: ‘विपक्ष को भुगतने होंगे नतीजे’

संबोधन से पहले शनिवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में भी प्रधानमंत्री के तेवर बेहद सख्त नजर आए। सूत्रों के अनुसार, पीएम ने अपने मंत्रियों से कहा कि विपक्ष ने महिला आरक्षण का विरोध करके एक ऐतिहासिक भूल की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि जनता सब देख रही है और विपक्षी दलों को अपनी इस ‘महिला विरोधी’ मानसिकता के गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। कैबिनेट में चर्चा हुई कि सरकार अब इस मुद्दे को लेकर सीधे जनता की अदालत में जाएगी और बताएगी कि कैसे कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने नारी शक्ति के संवैधानिक उत्थान का रास्ता रोका है।

सीटों की संख्या और आरक्षण का गणित: क्या था सरकार का प्लान?

सरकार की योजना केवल आरक्षण देने तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह संसद की संरचना को भी आधुनिक और समावेशी बनाना चाहती थी। 816 सीटों वाले नए सदन के प्रस्ताव के जरिए सरकार दक्षिण और उत्तर भारत के बीच प्रतिनिधित्व के संतुलन को साधने के साथ-साथ महिलाओं के लिए 270 से अधिक सीटें सुरक्षित करना चाहती थी। विपक्ष ने परिसीमन और अन्य तकनीकी आधारों पर इसका विरोध किया, जिससे यह विधायी प्रक्रिया बाधित हो गई। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में दोहराया कि भले ही यह बिल आज गिर गया हो, लेकिन महिलाओं को आरक्षण दिलाने का उनका संकल्प पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुआ है।

निष्कर्ष: आगामी चुनावों में महिला आरक्षण बनेगा मुख्य मुद्दा

पीएम मोदी के इस संबोधन ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में महिला आरक्षण देश का सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने जा रहा है। सरकार इस हार को ‘शहादत’ के रूप में पेश कर रही है, ताकि जनता के बीच यह संदेश जाए कि वह अकेली ऐसी शक्ति है जो महिलाओं के लिए लड़ रही है, जबकि समूचा विपक्ष उनके खिलाफ खड़ा है। अब देखना यह होगा कि प्रधानमंत्री की यह ‘माफी’ और ‘चेतावनी’ आगामी चुनावों में मतदाताओं, विशेषकर महिला वोट बैंक पर क्या असर डालती है। फिलहाल, दिल्ली की सियासत में ‘नारी शक्ति’ के नाम पर आर-पार की जंग छिड़ चुकी है।

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