Places of Worship Act, 1991: प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट क्या कहता है? उल्लंघन पर जेल और जुर्माना

सुप्रीम कोर्ट में 18 दिसंबर को प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991 पर सुनवाई हुई, जो देश में सबसे चर्चित और विवादित कानूनों में से एक बन गया है।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

फ़रवरी 18, 2026

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Places of Worship Act, 1991: भारत में धार्मिक स्थलों को लेकर कई बार विवादों की स्थिति उत्पन्न होती रही है। ऐसे ही विवादों को ध्यान में रखते हुए 1991 में संसद ने Places of Worship Act, 1991 को लागू किया। यह कानून देश में धार्मिक स्थलों की स्थिति को सुरक्षित रखने और विवादों को रोकने के लिए बनाया गया था। हाल ही में 18 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में इस एक्ट पर सुनवाई हुई, जिससे यह फिर से चर्चा में आया। आइए विस्तार से जानते हैं कि यह कानून क्या कहता है और इसके उल्लंघन पर क्या सजा है।

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प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 क्या है?

Places of Worship Act, 1991
प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट क्या कहता है?

प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991 के अनुसार, 15 अगस्त 1947 से पहले बने किसी भी धार्मिक स्थल का धर्म परिवर्तन करना गैरकानूनी है। यानी किसी मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर या गुरुद्वारे को दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता। इसका उल्लंघन करने पर तीन साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।

यह कानून तत्कालीन कांग्रेस प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव सरकार द्वारा तब लागू किया गया था जब बाबरी मस्जिद-अयोध्या विवाद देशभर में गर्म था। कानून का उद्देश्य देश के धार्मिक स्थलों की मूल स्थिति को सुरक्षित रखना और भविष्य में धार्मिक संघर्षों को रोकना था।

मुख्य धारा और प्रावधान

धारा 2:
यह धारा कहती है कि 15 अगस्त 1947 से पहले मौजूद किसी भी धार्मिक स्थल में बदलाव से संबंधित अगर कोई याचिका कोर्ट में पेंडिंग है, तो उसे बंद कर दिया जाएगा।

धारा 3:
इस धारा के अनुसार किसी भी धार्मिक स्थल को पूरी तरह या आंशिक रूप से किसी दूसरे धर्म में बदलने की अनुमति नहीं है। साथ ही यह सुनिश्चित किया गया है कि एक धर्म के पूजा स्थल को किसी अन्य धर्म के स्थल में या उसी धर्म के अलग हिस्से में न बदला जाए।

धारा 4(1):
धारा 4(1) स्पष्ट करती है कि 15 अगस्त 1947 को किसी पूजा स्थल का स्वरूप जैसा था, उसे वैसा ही रखा जाएगा।

धारा 4(2):
यह धारा उन मुकदमों और कानूनी कार्यवाहियों को रोकती है, जो इस कानून के लागू होने की तारीख पर पेंडिंग थे।

धारा 5:
धारा 5 में यह प्रावधान है कि यह एक्ट रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले और उससे जुड़े किसी भी मुकदमे, अपील या कानूनी कार्यवाही पर लागू नहीं होगा।

कानून के पीछे मकसद

यह कानून राम मंदिर आंदोलन के समय बनाया गया था, जब देशभर के मंदिरों और मस्जिदों में विवाद बढ़ने लगे थे। नरसिंह राव सरकार का मकसद था कि धार्मिक स्थलों के मामलों में संतुलन बना रहे और किसी भी समुदाय के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन न हो।

उल्लंघन पर पेनल्टी

Places of Worship Act सभी के लिए समान रूप से लागू होता है। इसका उल्लंघन करने पर तीन साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। कानून का लक्ष्य स्पष्ट है — धार्मिक स्थलों की शांति और समाज में साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखना।

प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 भारत के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और सामाजिक शांति को सुनिश्चित करने वाला महत्वपूर्ण कानून है। यह कानून पेंडिंग मुकदमों को भी नियंत्रित करता है और धार्मिक स्थलों के मूल स्वरूप को सुरक्षित रखता है। उल्लंघन करने पर कठोर दंड का प्रावधान इसे और प्रभावशाली बनाता है।

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