UP Election 2027: फूलपुर-पवई में 2027 का चुनाव कौन जीतेगा? यादव, दलित और मुस्लिम वोटों से बदलेगा पूरा खेल

आजमगढ़ की फूलपुर-पवई विधानसभा सीट पर 2027 की चुनावी जंग दिलचस्प होने वाली है। 2022 में सपा ने 25,306 वोटों से जीत दर्ज की थी, लेकिन भाजपा 2017 में यहां कब्जा जमा चुकी है। बसपा का पुराना वोट बैंक भी मजबूत है। ऐसे में यादव, दलित और मुस्लिम समीकरण किसका खेल बनाएंगे?

UP Election 2027

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

नवम्बर 4, 2026

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UP Election 2027 :  उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर होने वाला यह चुनाव केवल राज्य की सत्ता का फैसला नहीं करेगा, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय राजनीति की दिशा का भी संकेत देगा। उत्तर प्रदेश लोकसभा में 80 सांसद भेजता है, इसलिए यहां की राजनीतिक परिस्थितियों पर भाजपा, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस समेत सभी प्रमुख दलों की नजर है। इसी चुनावी माहौल में आजमगढ़ जिले की फूलपुर-पवई विधानसभा सीट भी महत्वपूर्ण बनकर उभर रही है। यहां यादव, दलित, मुस्लिम, मल्लाह-बिंद और अन्य पिछड़े वर्गों के मतदाताओं की भूमिका चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा
उत्तर प्रदेश विधानसभा

फूलपुर-पवई सीट पर क्यों बढ़ी राजनीतिक हलचल?

फूलपुर-पवई विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास बताता है कि यहां किसी एक राजनीतिक दल का स्थायी दबदबा नहीं रहा है। पिछले तीन विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी दोनों ने जीत दर्ज की है, जबकि बहुजन समाज पार्टी ने भी मजबूत चुनावी प्रदर्शन किया है। 2012 में सपा ने बेहद कम अंतर से जीत हासिल की थी। 2017 में भाजपा ने बाजी पलटी और 2022 में समाजवादी पार्टी ने बड़ी जीत के साथ वापसी की। ऐसे में 2027 का मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।

फूलपुर-पवई विधानसभा सीट का पूरा परिचय

फूलपुर-पवई विधानसभा आजमगढ़ जिले की विधानसभा संख्या 349 है। यह लालगंज लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है और सामान्य श्रेणी की सीट है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां समाजवादी पार्टी के रमाकांत यादव विधायक निर्वाचित हुए थे।उपलब्ध 2026 के आंकड़ों के अनुसार, इस विधानसभा क्षेत्र में लगभग 3,07,621 मतदाता बताए गए हैं। वहीं 2022 के विधानसभा चुनाव के समय यहां पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 3,51,352 थी। हालांकि, 2026 के आंकड़े की अंतिम आधिकारिक निर्वाचक नामावली से पुष्टि जरूरी है।

फूलपुर-पवई विधानसभा: एक नजर में

विवरणजानकारी
विधानसभा सीटफूलपुर-पवई
विधानसभा संख्या349
जिलाआजमगढ़
लोकसभा क्षेत्रलालगंज
आरक्षणसामान्य
2022 के विधायकरमाकांत यादव
2022 में विजेता पार्टीसमाजवादी पार्टी
2026 उपलब्ध मतदातालगभग 3,07,621
2022 के पंजीकृत मतदाता3,51,352
2022 जीत का अंतर25,306 वोट
प्रमुख राजनीतिक दलसपा, भाजपा, बसपा
जातिगत समीकरण
जातिगत समीकरण

फूलपुर-पवई का जातिगत समीकरण: यादव मतदाता सबसे अहम?

फूलपुर-पवई विधानसभा के पुराने स्थानीय चुनावी आकलनों में यादव समुदाय को सबसे प्रभावशाली मतदाता समूहों में शामिल किया गया है। इन अनुमानों के अनुसार, यहां यादव मतदाताओं की संख्या लगभग 75 हजार बताई गई थी। इसके अलावा अनुसूचित जाति के करीब 53 हजार और मुस्लिम समुदाय के लगभग 41 हजार मतदाता होने का अनुमान लगाया गया था।

मल्लाह-बिंद समुदाय के लगभग 26 हजार मतदाता बताए गए थे। वहीं ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या करीब 12 हजार और ठाकुर मतदाताओं की संख्या लगभग 9 हजार मानी गई थी। चौहान, मौर्य, वैश्य, राजभर और भूमिहार समुदाय भी यहां के सामाजिक समीकरण का हिस्सा हैं।हालांकि, इन आंकड़ों को आधिकारिक जातिवार मतदाता संख्या नहीं माना जाना चाहिए। निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची विधानसभा स्तर पर जाति और धर्म के अनुसार प्रमाणित आंकड़े प्रकाशित नहीं करती। इसलिए ये संख्याएं पुराने स्थानीय आकलनों पर आधारित हैं।

फूलपुर-पवई का अनुमानित जातिगत समीकरण

जाति/समुदायपुराने अनुमानित मतदाता
यादव75,000
अनुसूचित जाति/दलित53,000
मुस्लिम41,000
मल्लाह-बिंद26,000
ब्राह्मण12,000
ठाकुर/क्षत्रिय9,000
चौहान8,000
मौर्य6,000
वैश्य6,000
राजभर2,000
भूमिहार1,000

नोट: ये पुराने स्थानीय अनुमान हैं, आधिकारिक जातिवार मतदाता आंकड़े नहीं। उपलब्ध आंकड़ों में सभी समुदाय शामिल नहीं हैं।

2026 की वोटर लिस्ट
2026 की वोटर लिस्ट

2026 की वोटर लिस्ट में कितने मतदाता? 43 हजार से ज्यादा का अंतर

फूलपुर-पवई विधानसभा की उपलब्ध मतदाता संख्या के अनुसार 2026 में यहां करीब 3,07,621 मतदाता बताए गए हैं। वहीं 2022 में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 3,51,352 थी। दोनों आंकड़ों के बीच लगभग 43,731 मतदाताओं का अंतर दिखाई देता है। प्रतिशत के हिसाब से यह अंतर करीब 12.45 फीसदी बैठता है।हालांकि, इस अंतर को सीधे मतदाताओं के नाम कटने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसके लिए अंतिम आधिकारिक मतदाता सूची, नए पंजीकरण, स्थानांतरण और अन्य संशोधनों का मिलान जरूरी है।

2012 से 2026 तक मतदाताओं की संख्या

वर्षमतदाताओं की संख्या
20122,87,163
20173,04,949
20223,51,352
2026लगभग 3,07,621

2027 के चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के लिए बूथवार मतदाता सूची का सत्यापन महत्वपूर्ण होगा। खासतौर पर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मतदाताओं की वास्तविक संख्या तथा नए मतदाताओं का रुझान चुनावी रणनीति को प्रभावित कर सकता है।

यादव मतदाता
यादव मतदाता

यादव मतदाताओं की भूमिका, लेकिन सपा का स्थायी वोट बैंक नहीं

फूलपुर-पवई में यादव समुदाय की राजनीतिक भूमिका लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है। दिलचस्प बात यह है कि पिछले तीन विधानसभा चुनावों में जीतने वाले तीनों उम्मीदवार यादव समुदाय से थे, लेकिन उनकी राजनीतिक पार्टियां अलग-अलग थीं।2012 में समाजवादी पार्टी के श्याम बहादुर सिंह यादव ने जीत हासिल की। 2017 में भाजपा के अरुण कुमार यादव ने बाजी मारी। इसके बाद 2022 में सपा के रमाकांत यादव विधायक बने।यह चुनावी इतिहास बताता है कि यादव नेतृत्व की मौजूदगी महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल जातीय पहचान चुनाव जीतने की गारंटी नहीं है। उम्मीदवार की लोकप्रियता, पार्टी का संगठन और अन्य समुदायों का समर्थन भी नतीजे तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

दलित मतदाता और बसपा का पुराना चुनावी आधार

फूलपुर-पवई में अनुसूचित जाति के मतदाताओं को भी महत्वपूर्ण राजनीतिक समूह माना जाता है। पुराने स्थानीय अनुमानों में इनकी संख्या करीब 53 हजार बताई गई थी। इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी ने पिछले चुनावों में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन किया है।2012 में बसपा के अबुल कैस आजमी को 46,307 वोट मिले थे। वह केवल 865 वोटों से चुनाव हार गए थे। 2017 में भी अबुल कैस आजमी ने 61,140 वोट हासिल किए और दूसरे स्थान पर रहे। वहीं 2022 में बसपा ने शकील अहमद को उम्मीदवार बनाया, जिन्हें 49,495 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बसपा का चुनावी आधार इस सीट पर महत्वपूर्ण रहा है। हालांकि, किसी उम्मीदवार को मिले सभी वोटों को केवल दलित समुदाय का समर्थन मानना सही नहीं होगा।2027 में बसपा का प्रदर्शन सपा और भाजपा दोनों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि पार्टी अपना पुराना जनाधार बनाए रखने में सफल रहती है, तो मुकाबला फिर त्रिकोणीय हो सकता है।

मुस्लिम मतदाताओं का रुख किस पार्टी को पहुंचाएगा फायदा?

फूलपुर-पवई विधानसभा में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या पुराने अनुमानों के अनुसार लगभग 41 हजार बताई गई थी। चुनावी दृष्टि से यह समुदाय भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।पिछले चुनावों में बसपा ने मुस्लिम समुदाय से आने वाले उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। 2012 और 2017 में अबुल कैस आजमी ने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। दोनों ही चुनावों में उन्हें अच्छा समर्थन मिला। 2022 में शकील अहमद को भी 49,495 वोट मिले थे।2027 में मुस्लिम मतदाताओं का रुझान, उम्मीदवार की स्थानीय पहचान और राजनीतिक दलों के गठबंधन का स्वरूप चुनावी मुकाबले को प्रभावित कर सकता है। सपा के लिए इस समर्थन को बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा, जबकि बसपा भी अपने पुराने आधार को मजबूत करने की कोशिश कर सकती है।

पिछड़े वर्ग बन सकते हैं निर्णायक

फूलपुर-पवई विधानसभा में मल्लाह और बिंद समुदाय के मतदाताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। पुराने चुनावी आकलनों में इनकी संयुक्त संख्या लगभग 26 हजार बताई गई थी। इसके अलावा चौहान, मौर्य, राजभर, कुर्मी और अन्य पिछड़े वर्गों के मतदाता भी चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं।2017 में निषाद पार्टी के रामसूरत को 4,012 वोट मिले थे। वहीं 2022 में भाजपा के रामसूरत को 55,858 वोट मिले और वह दूसरे स्थान पर रहे।भाजपा के लिए गैर-यादव पिछड़े वर्गों के बीच अपना समर्थन मजबूत करना महत्वपूर्ण हो सकता है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण के जरिए अपने सामाजिक आधार को विस्तार देने की कोशिश कर सकती है।

ब्राह्मण, ठाकुर और वैश्य मतदाताओं की भी अहम भूमिका

फूलपुर-पवई के चुनावी समीकरण में ब्राह्मण, ठाकुर, वैश्य और भूमिहार समुदायों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पुराने अनुमानों के अनुसार यहां करीब 12 हजार ब्राह्मण, 9 हजार ठाकुर, 6 हजार वैश्य और एक हजार भूमिहार मतदाता बताए गए थे।भाजपा के लिए सवर्ण और गैर-यादव पिछड़े वर्गों के बीच समर्थन बनाए रखना महत्वपूर्ण हो सकता है। वहीं सपा और बसपा भी अपने सामाजिक गठबंधन को व्यापक बनाने के लिए इन समुदायों तक पहुंच बनाने का प्रयास कर सकती हैं।इन मतदाताओं का रुख स्थानीय उम्मीदवार, क्षेत्रीय समस्याओं और राजनीतिक दलों की नीतियों से प्रभावित हो सकता है।

रमाकांत यादव
रमाकांत यादव

2022 का चुनाव परिणाम: रमाकांत यादव ने दर्ज की जीत

फूलपुर-पवई विधानसभा का 2022 का चुनाव परिणाम समाजवादी पार्टी के पक्ष में रहा था। सपा उम्मीदवार रमाकांत यादव ने 81,164 वोट हासिल करके जीत दर्ज की थी। भाजपा के रामसूरत 55,858 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे।बसपा के शकील अहमद को 49,495 वोट मिले थे। कांग्रेस के मोहम्मद शाहिद को 1,558 वोट हासिल हुए थे।

फूलपुर-पवई विधानसभा चुनाव परिणाम 2022

प्रत्याशीपार्टीवोट
रमाकांत यादवसपा81,164
रामसूरतभाजपा55,858
शकील अहमदबसपा49,495
मोहम्मद शाहिदकांग्रेस1,558
योगेंद्र प्रतापजन अधिकार पार्टी1,529
राम अवतारनिर्दलीय821
संजयनिर्दलीय527

सपा ने भाजपा को 25,306 वोटों से हराया था। इस चुनाव में तीन प्रमुख दलों सपा, भाजपा और बसपा को कुल 1,86,517 वोट मिले थे। इससे स्पष्ट होता है कि सीट पर मुकाबला मुख्य रूप से इन्हीं तीन राजनीतिक दलों के बीच केंद्रित रहा।

2017 में भाजपा ने पलटी थी बाजी

2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने फूलपुर-पवई सीट पर जीत दर्ज की थी। भाजपा के अरुण कुमार यादव को 68,435 वोट मिले थे। बसपा के अबुल कैस आजमी 61,140 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे। समाजवादी पार्टी के श्याम बहादुर सिंह यादव को 38,099 वोट मिले थे और वह तीसरे स्थान पर रहे थे।

फूलपुर-पवई विधानसभा चुनाव परिणाम 2017

प्रत्याशीपार्टीवोट
अरुण कुमार यादवभाजपा68,435
अबुल कैस आजमीबसपा61,140
श्याम बहादुर सिंह यादवसपा38,099
रामसूरतनिषाद पार्टी4,012
रामाज्ञा यादवभाकपा1,382

भाजपा ने बसपा को 7,295 वोटों से हराया था। इस चुनाव में बसपा दूसरे स्थान पर रही, जबकि सपा तीसरे स्थान पर पहुंच गई थी। यह परिणाम दिखाता है कि फूलपुर-पवई में राजनीतिक समर्थन का समीकरण बदलने पर चुनावी नतीजे भी बदल सकते हैं।

श्याम बहादुर सिंह यादव
श्याम बहादुर सिंह यादव

2012 में सिर्फ 865 वोटों से जीती थी सपा

फूलपुर-पवई विधानसभा का 2012 का चुनाव बेहद दिलचस्प रहा था। समाजवादी पार्टी के श्याम बहादुर सिंह यादव ने 47,172 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। वहीं बसपा के अबुल कैस आजमी को 46,307 वोट मिले थे।कांग्रेस के अजय नरेश यादव को 25,078 और भाजपा के वीरेंद्र कुमार को 23,481 वोट मिले थे। सपा ने बसपा को महज 865 वोटों से हराया था।

फूलपुर-पवई विधानसभा चुनाव परिणाम 2012

प्रत्याशीपार्टीवोट
श्याम बहादुर सिंह यादवसपा47,172
अबुल कैस आजमीबसपा46,307
अजय नरेश यादवकांग्रेस25,078
वीरेंद्र कुमारभाजपा23,481
शौकत अलीआरयूसी7,905
महफूजसुभासपा6,218

इस चुनाव में सपा को लगभग 28.91 प्रतिशत और बसपा को 28.38 प्रतिशत वोट मिले थे। दोनों दलों के बीच बेहद करीबी मुकाबला हुआ था। यह नतीजा बताता है कि फूलपुर-पवई में कुछ सौ वोटों का अंतर भी जीत-हार का फैसला कर सकता है।

2012 से 2022 तक कैसे बदला सपा, भाजपा और बसपा का वोट बैंक?

पिछले तीन विधानसभा चुनावों के आंकड़े देखें तो फूलपुर-पवई में तीनों प्रमुख दलों के प्रदर्शन में बड़ा बदलाव आया है।

चुनाव वर्षसपाभाजपाबसपा
201228.91%14.39%28.38%
201721.35%38.35%34.26%
202242.00%28.91%25.61%

2012 में सपा और बसपा के बीच लगभग बराबरी का मुकाबला था। 2017 में भाजपा ने 38.35 प्रतिशत वोट हासिल कर अपनी स्थिति मजबूत की। वहीं 2022 में समाजवादी पार्टी ने 42 प्रतिशत वोट हासिल करके बड़ी वापसी की। दूसरी ओर बसपा का वोट प्रतिशत 2017 के 34.26 प्रतिशत से घटकर 2022 में 25.61 प्रतिशत रह गया।

2027 में समाजवादी पार्टी के सामने सीट बचाने की चुनौती

2022 में बड़ी जीत हासिल करने के बाद समाजवादी पार्टी के सामने 2027 में अपना प्रदर्शन दोहराने की चुनौती होगी। रमाकांत यादव की जीत ने पार्टी को इस विधानसभा क्षेत्र में मजबूत स्थिति प्रदान की थी।सपा के लिए यादव मतदाताओं के साथ मुस्लिम, दलित, मल्लाह-बिंद और अन्य पिछड़े वर्गों का समर्थन बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। पार्टी को अपने परंपरागत मतदाताओं के अलावा उन सामाजिक समूहों तक भी पहुंच बनानी होगी, जिन्होंने पिछले चुनाव में भाजपा और बसपा का समर्थन किया था।उम्मीदवार की लोकप्रियता, स्थानीय नेतृत्व और गठबंधन की स्थिति भी सपा की चुनावी रणनीति को प्रभावित कर सकती है।

भाजपा के लिए 2017 का प्रदर्शन दोहराना आसान नहीं

भारतीय जनता पार्टी ने 2017 में फूलपुर-पवई सीट जीतकर अपनी चुनावी ताकत दिखाई थी। उस चुनाव में पार्टी को 38.35 प्रतिशत वोट मिले थे। हालांकि, 2022 में भाजपा के रामसूरत 55,858 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे।2027 में भाजपा के सामने सपा की मजबूत चुनौती होगी। पार्टी के लिए गैर-यादव पिछड़े वर्गों, सवर्ण मतदाताओं और अन्य सामाजिक समूहों के बीच अपना समर्थन बढ़ाना महत्वपूर्ण हो सकता है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर विकास कार्य और उम्मीदवार की स्वीकार्यता भी चुनावी नतीजे को प्रभावित कर सकती है।

बसपा का वोट बैंक बिगाड़ सकता है खेल

फूलपुर-पवई में बहुजन समाज पार्टी का प्रदर्शन पिछले चुनावों में लगातार महत्वपूर्ण रहा है। 2012 में पार्टी केवल 865 वोटों से चुनाव हारी थी। 2017 में भी बसपा दूसरे स्थान पर रही थी। 2022 में पार्टी तीसरे स्थान पर जरूर पहुंची, लेकिन उसे करीब 49,495 वोट मिले थे।ऐसे में 2027 में बसपा का प्रदर्शन सपा और भाजपा दोनों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। यदि बसपा अपने पुराने मतदाता आधार को मजबूत करने में सफल रहती है तो मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। वहीं उसके वोटों में बदलाव का असर दूसरे दलों की चुनावी संभावनाओं पर भी पड़ सकता है।

फूलपुर-पवई में स्थानीय मुद्दे भी तय करेंगे चुनावी दिशा

जातिगत समीकरणों के अलावा फूलपुर-पवई में स्थानीय विकास के मुद्दे भी चुनावी चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, सिंचाई, कृषि और किसानों को उपज का उचित मूल्य मिलने जैसे विषय मतदाताओं की प्राथमिकताओं में शामिल हो सकते हैं।इसके अलावा युवाओं के लिए रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, सरकारी योजनाओं का लाभ और स्थानीय बाजारों का विकास भी महत्वपूर्ण मुद्दे रहेंगे। राजनीतिक दलों को केवल जातीय समीकरणों के आधार पर चुनावी रणनीति बनाने के बजाय स्थानीय समस्याओं पर भी अपना पक्ष रखना होगा।

2027 में फूलपुर-पवई सीट पर किसका पलड़ा रहेगा भारी?

फूलपुर-पवई विधानसभा का पिछला चुनावी इतिहास बताता है कि यहां सपा, भाजपा और बसपा तीनों के पास अपना राजनीतिक आधार मौजूद है। 2012 में सपा ने 865 वोटों से जीत हासिल की थी, 2017 में भाजपा ने 7,295 वोटों से बाजी मारी और 2022 में सपा ने 25,306 वोटों से जीत दर्ज की।2027 में सपा के सामने अपनी सीट बचाने की चुनौती होगी, भाजपा 2017 की सफलता दोहराने की कोशिश करेगी और बसपा अपने पुराने जनाधार को फिर मजबूत करने की रणनीति अपना सकती है।

इस सीट पर यादव मतदाताओं के साथ दलित, मुस्लिम, मल्लाह-बिंद और गैर-यादव पिछड़े वर्गों का समर्थन महत्वपूर्ण रहेगा। हालांकि, किसी भी समुदाय के मतदाताओं को एकमुश्त किसी पार्टी का समर्थक मानना सही नहीं होगा। अंततः उम्मीदवार का चयन, राजनीतिक गठबंधन, स्थानीय मुद्दे और वास्तविक मतदान का रुझान ही फूलपुर-पवई में 2027 की जीत-हार तय करेंगे।

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