Petrol Diesel Price Update: भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक नया आर्थिक आंकड़ा सामने आया है। सरकार के अनुसार पिछले चार वर्षों में देश में ईंधन की कीमतों में कुल 3.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह दावा केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के बयान के आधार पर सामने आया है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि वैश्विक स्तर पर कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत ने उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की है।
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वैश्विक बाजार में बढ़ते ईंधन दाम
सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया के कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। पाकिस्तान में पिछले चार वर्षों में ईंधन की कीमतें लगभग 70 प्रतिशत तक बढ़ी हैं। श्रीलंका में यह वृद्धि 66 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यूरोप के देशों जैसे इटली और फ्रांस में भी क्रमशः 46 और 47 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं अमेरिका में भी ईंधन की कीमतों में करीब 35 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इसके विपरीत, भारत में इस अवधि में कीमतों में गिरावट का रुख देखने को मिला है, जिसे सरकार एक स्थिर नीति का परिणाम बता रही है।
भारत में 3.1% गिरावट कैसे संभव हुई?
सरकार ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कई कदम उठाए गए। हाल ही में पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। ऐसी स्थिति में सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती जैसे फैसले लिए। पेट्रोल पर 3 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई, जबकि डीजल पर एक्साइज ड्यूटी को शून्य स्तर पर लाया गया। इन कदमों का उद्देश्य आम जनता को वैश्विक झटकों से बचाना था।
सरकार पर राजस्व का बोझ
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए टैक्स कटौती के चलते सरकार पर हर साल लगभग एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय बोझ पड़ा है। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने भी अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव के बीच ‘अंडर रिकवरी’ का सामना किया, ताकि घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी न हो सके।
हालांकि हाल के समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार के प्रभाव से घरेलू कीमतों में कुछ बढ़ोतरी जरूर देखी गई है, लेकिन लंबी अवधि के आंकड़ों में अभी भी लगभग 3 प्रतिशत की शुद्ध गिरावट दर्ज की गई है।
ईंधन वितरण को लेकर नए नियम
सरकार ने ईंधन की उपलब्धता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नए नियम भी लागू किए हैं। इसके तहत खुदरा पेट्रोल पंपों से औद्योगिक या थोक खरीदारों द्वारा सस्ते डीजल की अनियमित खरीद और कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं। इसके अलावा प्रति वाहन प्रतिदिन 200 लीटर डीजल की सीमा तय की गई है, ताकि आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की उपलब्धता में किसी प्रकार की कमी न आए।
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