Petrol Diesel Excise Duty: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी उछाल आया है। इस वैश्विक संकट के बीच भारत सरकार ने घरेलू बाजार में तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में 10 रुपये की कटौती का एलान किया है। हालांकि, इस फैसले ने देश में एक नया राजनीतिक विवाद छेड़ दिया है, जहां मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे ‘जनता के साथ छलावा’ करार दिया है।
विपक्षी दल का पलटवार
बताते चले कि, शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार के इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि सरकार द्वारा की गई यह कटौती केवल हेडलाइंस बटोरने का एक जरिया है। कांग्रेस के अनुसार, तेल की कीमतें डीलरों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए वर्तमान में एक समान बनी हुई हैं, जिसका अर्थ है कि पंप पर आम आदमी को मिलने वाले दाम में कोई वास्तविक गिरावट दर्ज नहीं की गई है। पार्टी ने सरकार से मांग की है कि “कागजी राहत” के बजाय उपभोक्ताओं को सीधा और वास्तविक लाभ पहुंचाया जाए।
पवन खेड़ा का सरकार पर प्रहार
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर आम नागरिक यह सोच रहे हैं कि उनकी जेब का बोझ कम हुआ है, तो वे भ्रम में हैं। खेड़ा ने तर्क दिया कि सरकार ने जो गणित पेश किया है, वह धरातल पर शून्य है। उनके अनुसार, पेट्रोल-डीजल की खुदरा दरों (Retail Prices) में वह कमी नहीं दिखी है जिसका दावा किया जा रहा है, क्योंकि कीमतों का ढांचा अभी भी उपभोक्ताओं और डीलरों के लिए एक जैसा ही बना हुआ है।
तेल कंपनियों को टैक्स में छूट
पवन खेड़ा ने अपनी पोस्ट में इस कटौती की तकनीकी बारीकियों को समझाते हुए कहा कि असल में सरकार ने ‘विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क’ (Special Additional Excise Duty) में कमी की है। यह वह टैक्स है जो तेल कंपनियां सरकार को चुकाती हैं। कांग्रेस का आरोप है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण तेल कंपनियां घाटे में चल रही थीं और सरकार ने इस टैक्स को कम करके केवल कंपनियों का बोझ हल्का किया है, न कि आम जनता का। उन्होंने ‘विशेष’ और ‘अतिरिक्त’ जैसे शब्दों को अनावश्यक बताते हुए इसे कंपनियों को दिया गया गुपचुप फायदा करार दिया।
देश में तेल भंडार और आपूर्ति की स्थिति
विपक्ष के हमलों के बीच, भारत सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए जनता को आश्वस्त किया है। सरकार ने गुरुवार को बयान जारी कर बताया कि देश के पास वर्तमान में लगभग 60 दिनों का कच्चा तेल भंडार उपलब्ध है। इसके अलावा, एक महीने की एलपीजी (LPG) आपूर्ति की पूरी व्यवस्था कर ली गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने आपूर्ति में कमी की खबरों को ‘भ्रामक और गलत सूचना अभियान’ बताया है, जिसका उद्देश्य बाजार में घबराहट पैदा करना है।
पेट्रोलियम विपणन कंपनियों की तैयारी
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (OMCs) ने भी पुष्टि की है कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह स्थिर है। पेट्रोल पंप संचालकों को वर्किंग कैपिटल की समस्या न हो, इसके लिए सरकार ने ऋण सीमा की अनुमति को एक दिन से बढ़ाकर तीन दिन कर दिया है। सरकार का कहना है कि यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि किसी भी पंप पर ईंधन की कमी न हो और वितरण सुचारू रूप से चलता रहे।









