Petrol Diesel Excise Duty: मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने दुनिया को दहला दिया है। इस संकट की घड़ी में आम जनता को राहत देने और देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने के लिए भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में भारी कटौती की घोषणा की है, जो 26 मार्च 2026 से प्रभावी हो गई है।
अंतरराष्ट्रीय तनाव और ईंधन करों में भारी कटौती
अमेरिका और इज़राइल की ईरान के साथ जारी जंग ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकाबंदी के बाद पैदा हुए संकट को देखते हुए भारत सरकार ने पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क को 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। वहीं, डीजल पर लगने वाले 10 रुपये के शुल्क को पूरी तरह समाप्त (0 रुपये) कर दिया गया है। यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और भारी मात्रा में गैस आपूर्ति इसी मार्ग से होती है, जो अब युद्ध के कारण बाधित है।
विमानन ईंधन (ATF) पर नया टैक्स और हवाई सफर का खर्च
मोदी सरकार ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव करते हुए पहली बार Aviation Turbine Fuel (ATF) पर ‘स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी’ लागू की है। हालांकि शुरुआत में इसके लिए 50 रुपये प्रति लीटर की दर तय की गई थी, लेकिन रियायतों के बाद अब प्रभावी दर 29.5 रुपये प्रति लीटर होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि एटीएफ पर लगे इस नए टैक्स से एयरलाइंस कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर हवाई यात्रियों की जेब पर पड़ सकता है और टिकटें महंगी हो सकती हैं।
घरेलू तेल उत्पादकों के लिए राहत
घरेलू तेल क्षेत्र को मजबूती देने के लिए सरकार ने वर्ष 2022 से लागू विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax) को पूरी तरह समाप्त करने का फैसला किया है। इसके साथ ही पेट्रोल पर निर्यात शुल्क को शून्य रखा गया है, जबकि डीजल के लिए 18.5 रुपये प्रति लीटर की दर निर्धारित की गई है। निर्यात किए जाने वाले उत्पादों पर विभिन्न शुल्कों से दी गई यह छूट तेल कंपनियों के वित्तीय स्वास्थ्य को सुधारने में मददगार साबित होगी, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में आसानी होगी।
आम जनता के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों का गणित
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस टैक्स कटौती से पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा? जानकारों के मुताबिक, पंप पर कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना कम है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुका है, जिससे भारतीय तेल कंपनियों को प्रति लीटर पेट्रोल-डीजल पर लगभग 48.8 रुपये का भारी घाटा हो रहा है। सरकार द्वारा दी गई 10 रुपये तक की टैक्स राहत का उपयोग कंपनियां मुख्य रूप से अपने घाटे की भरपाई के लिए करेंगी, ताकि आपूर्ति श्रृंखला सुचारू बनी रहे।









