Petrol Diesel Excise Duty: केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम किए जाने के बाद, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ की।सोशल मीडिया एक्स पर अमित शाह ने कहा कि,यह कदम जन-केंद्रित है और उन्होंने पश्चिम एशिया संकट के कारण दुनिया भर में ईंधन की कमी की मौजूदा स्थिति को रेखांकित किया।
पेट्रोल-डीजल पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला
अमित शाह ने लिखा,जब दुनिया पश्चिम एशिया संकट के बीच ईंधन की कमी से जूझ रही है, जिससे वैश्विक स्तर पर कीमतें बढ़ रही हैं उस समय मोदी सरकार का ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कम करने का फैसला नागरिकों को बहुत जरूरी राहत देता है।मिडिल ईस्ट संकट के समय जहां कई देशों ने डीजल और पेट्रोल की कीमतें बढ़ाई हैं वहीं मोदी सरकार का एक्साइज़ ड्यूटी कम करने का फैसला उसके जन-केंद्रित शासन और संवेदनशीलता-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया को दर्शाता है। इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई।
एस.जयशंकर ने की PM मोदी की सराहना
विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने भी ईंधन आपूर्ति पर एक्साइज ड्यूटी में भारी कटौती के लिए प्रधानमंत्री की सराहना की और इस बात पर जोर दिया कि,इसका उद्देश्य नागरिकों के लिए ईंधन की कीमतों को किफायती बनाए रखना है।विदेश मंत्री ने एक्स पर लिखा,”पश्चिम एशिया संकट के बीच, जो ऊर्जा और कमोडिटी बाजोरों को प्रभावित कर रहा है पीएम मोदी ने 1.4 अरब भारतीयों को वैश्विक कीमतों और आपूर्ति में आने वाले झटकों से बचाने के लिए एक त्वरित और निर्णायक कदम उठाया है।
एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये/लीटर की कटौती
घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है,जिससे उपभोक्ताओं को बढ़ती कीमतों से राहत मिलेगी।निर्यात शुल्क भी लगाए गए हैं….डीजल पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर 29.5 रुपये प्रति लीटर ताकि घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।यह #CitizenFirst नागरिक-प्रथम दृष्टिकोण है जिसका उद्देश्य कीमतों को किफायती बनाए रखना और जीवन को आसान बनाना है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाकेबंदी से बढ़ी समस्या
यह फैसला पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बाद लिया गया है विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी हो गई है।यह एक महत्वपूर्ण मार्ग है जिससे दुनिया की लगभग पांचवां हिस्सा कच्चा तेल आपूर्ति होता है। संकट से पहले,भारत इस रास्ते से अपने तेल आयात का लगभग 12-15% हिस्सा प्राप्त करता था।









