Health Tips: महिलाओं की सबसे आम और गंभीर हार्मोनल समस्याओं में से एक, जिसे अब तक PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) के नाम से जाना जाता था, का नाम अब बदलकर PMOS कर दिया गया है। वैश्विक चिकित्सा जगत के दिग्गजों और एम्स (AIIMS) के विशेषज्ञों के अनुसार, पुराना नाम इस बीमारी के व्यापक और खतरनाक असर को सही ढंग से बयां नहीं कर पा रहा था। इस नाम परिवर्तन का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और चिकित्सा जगत को यह समझाना है कि यह समस्या केवल महिलाओं के गर्भाशय (ओवरी) या पीरियड्स तक सीमित नहीं है।
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नाम बदलने के पीछे क्या है कारण?
AIIMS सहित कई बड़े मेडिकल संस्थानों के विशेषज्ञों का कहना है कि PCOS शब्द लोगों में भ्रम पैदा करता था। कई मामलों में अल्ट्रासाउंड में सिस्ट दिखाई नहीं देते थे, फिर भी मरीजों में यह बीमारी पाई जाती थी। नई मेडिकल समझ के अनुसार यह स्थिति सिर्फ अंडाशय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हार्मोन, मेटाबॉलिज्म, मानसिक स्वास्थ्य और प्रजनन प्रणाली को भी प्रभावित करती है। इसी वजह से इसका नाम बदलकर PMOS किया गया है, ताकि बीमारी की सही प्रकृति को बेहतर तरीके से समझाया जा सके।
PCOS/PMOS क्या है?
इस स्थिति में महिलाओं के शरीर में एंड्रोजन हार्मोन का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। इसके कारण कई तरह की समस्याएं देखने को मिलती हैं, जैसे:
- मासिक धर्म का अनियमित होना
- चेहरे और शरीर पर अनचाहे बालों का बढ़ना
- मुंहासे और त्वचा संबंधी समस्याएं
- वजन का तेजी से बढ़ना
- गर्भधारण में कठिनाई
डॉक्टरों के अनुसार अल्ट्रासाउंड में जो छोटे-छोटे दाने जैसे स्ट्रक्चर दिखाई देते हैं, वे असली सिस्ट नहीं होते, बल्कि अधूरे विकसित फॉलिकल्स होते हैं।
शरीर पर पड़ने वाले व्यापक प्रभाव
विशेषज्ञों का कहना है कि PMOS केवल प्रजनन स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित कर सकता है। इससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, जैसे:
- मोटापा और इंसुलिन रेजिस्टेंस
- टाइप 2 डायबिटीज
- हाई ब्लड प्रेशर
- खराब कोलेस्ट्रॉल
- फैटी लीवर
- दिल की बीमारियों का खतरा
इसके अलावा कुछ महिलाओं में प्रजनन संबंधी जटिलताएं और गर्भावस्था के दौरान समस्याएं भी देखी जा सकती हैं।
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मानसिक स्वास्थ्य पर असर
PMOS का असर केवल शरीर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है। कई महिलाओं में:
- डिप्रेशन
- एंग्जायटी
- आत्मविश्वास में कमी
- ईटिंग डिसऑर्डर
जैसी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं।
त्वचा और बालों पर प्रभाव
इस स्थिति में महिलाओं के चेहरे और बालों पर भी लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे:
- चेहरे पर अधिक बाल आना
- बालों का झड़ना
- लगातार एक्ने (मुंहासे)
ये सभी लक्षण हार्मोनल असंतुलन का परिणाम होते हैं।
इलाज में क्या बदलेगा?
डॉक्टरों के अनुसार फिलहाल इलाज की प्रक्रिया में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। दवाएं और डायग्नोसिस पहले की तरह ही रहेंगे। लेकिन नए नाम PMOS के आने से बीमारी को समझने का तरीका जरूर बदलेगा। अब डॉक्टर केवल प्रजनन स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और अन्य मेटाबॉलिक पहलुओं पर भी ज्यादा ध्यान देंगे।
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