Pawan Khera : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी, रिंकी भुइयां सरमा के खिलाफ दिए गए एक कथित विवादास्पद बयान के मामले में खेड़ा कानूनी चक्रव्यूह में फंस गए हैं। गुवाहाटी हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद, खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। गुरुवार को शीर्ष अदालत में उनकी याचिका पर गहन सुनवाई हुई। खेड़ा का तर्क है कि उन्हें केवल अपमानित करने के उद्देश्य से गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है, जबकि वे जांच में सहयोग के लिए तैयार हैं।
अभिषेक मनु सिंघवी की दलील: ‘आतंकवादी की तरह बर्ताव क्यों?’
पवन खेड़ा की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए। सिंघवी ने कोर्ट में कहा कि उनके मुवक्किल कोई अपराधी या आतंकवादी नहीं हैं कि उनके आवास पर 50 से 70 पुलिसकर्मियों को भेज दिया जाए। उन्होंने दलील दी कि खेड़ा के पास भागने की कोई जगह नहीं है क्योंकि पासपोर्ट सरकारी नियंत्रण में होते हैं। सिंघवी ने इस पूरी कार्रवाई को ‘अभूतपूर्व’ और राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि गिरफ्तारी की कोई कानूनी आवश्यकता नहीं है, क्योंकि खेड़ा देश छोड़कर नहीं जा रहे हैं।
सॉलिसीटर जनरल का पलटवार: फर्जी दस्तावेजों और बयानों का गंभीर मुद्दा
सॉलिसीटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने राज्य सरकार और पुलिस का पक्ष रखते हुए पवन खेड़ा की दलीलों का कड़ा विरोध किया। मेहता ने कोर्ट को बताया कि यह केवल एक बयान का मामला नहीं है, बल्कि चुनावी अभियान के दौरान फर्जी दस्तावेज दिखाने और छवि धूमिल करने का एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने ‘बंटी-बबली’ वाले बयान का जिक्र करते हुए कहा कि यह आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है। एसजी ने तर्क दिया कि जिन पासपोर्टों और दस्तावेजों का उल्लेख किया गया, उन्हें संबंधित देशों ने कभी जारी ही नहीं किया था। ऐसे में यह पता लगाना बेहद जरूरी है कि ये फर्जी कागजात खेड़ा के पास कहाँ से आए।
हिरासत में पूछताछ की जरूरत और ‘फरार’ होने का दावा
सुनवाई के दौरान सॉलिसीटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि इस मामले की तह तक जाने के लिए ‘कस्टोडियल इंटेरोगेशन’ (हिरासत में पूछताछ) अनिवार्य है। उन्होंने दावा किया कि पवन खेड़ा वर्तमान में पुलिस से बच रहे हैं और वीडियो जारी कर कह रहे हैं कि वे सुरक्षित स्थान पर हैं। मेहता के अनुसार, जांच एजेंसी को यह जानना है कि इस पूरे प्रोपेगेंडा के पीछे किसका दिमाग है और इन फर्जी दस्तावेजों को तैयार करने का असली मकसद क्या था। गैर-जमानती धाराओं के तहत दर्ज इस मामले में गिरफ्तारी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला, कानूनी गलियारों में हलचल
दोनों पक्षों की लंबी और तीखी बहस सुनने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सिंघवी ने एसजी की दलीलों का जवाब देने के लिए कुछ अतिरिक्त समय और कुछ पिछले फैसलों का संदर्भ देने की मांग की थी। अब सबकी निगाहें शीर्ष अदालत के आने वाले आदेश पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि कांग्रेस नेता को राहत मिलती है या उन्हें असम पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। इस मामले ने एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी और कानूनी सीमाओं के बीच की बहस को तेज कर दिया है।









