NEET Protest: नीट परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर देश भर में सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं से निपटने के सरकारी तरीकों को लेकर कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और संसद परिसर में केंद्र सरकार पर तीखा निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों की आवाज दबाने के लिए अब हदें पार की जा रही हैं। खेड़ा ने बिहार के सिवान में प्रदर्शन के दौरान हुई कथित गोलीबारी और हिंसा का जिक्र करते हुए सनसनीखेज दावा किया कि वहां छात्रों पर एके-47 जैसे घातक हथियारों का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से तत्काल संसद में आकर इस पूरी घटना पर देश को स्पष्ट जवाब देने की पुरजोर मांग की है।
“बंगाल से लेकर बिहार तक पुलिस कर रही है बर्बरता का इस्तेमाल”
बताते चले कि, कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने मीडिया से बातचीत करते हुए आगे कहा कि उनकी पार्टी ने संसद के उच्च सदन (राजस्व) में इस गंभीर मुद्दे को उठाने का पूरा प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं और छात्रों पर जिस तरह का बर्बरतापूर्ण हमला पूरे देश में किया जा रहा है, वह बेहद निंदनीय है। पश्चिम बंगाल से लेकर बिहार तक, हर जगह पुलिस प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल का प्रयोग कर रही है।
खेड़ा ने दो टूक शब्दों में कहा कि ये देश के युवा हैं और पुलिस भी इसी देश की है, इसलिए देश के गृह मंत्री को इन तमाम घटनाओं की जिम्मेदारी लेते हुए सदन में जवाब देना होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि सिवान में जो क्रूर कार्रवाई हुई वैसी देश ने कभी नहीं देखी, और सरकार को ही अब इसका जवाब देना चाहिए कि प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन और घातक हथियारों के इस्तेमाल की जिम्मेदारी कौन लेगा।
“बिना निर्देश के कोई निर्णय नहीं लेता पुलिस प्रशासन”
आपको बता दे कि, इस कड़ी को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस सांसद नीरज डांगी ने भी केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि न केवल राजधानी दिल्ली में, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी छात्रों के प्रति जिस प्रकार का दमनकारी और बर्बर रवैया अपनाया जा रहा है, उसे लेकर विपक्ष का सीधा और स्पष्ट सवाल यही है कि इसकी जवाबदेही किसकी है।
डांगी का तर्क है कि बिना गृह मंत्रालय या केंद्रीय तंत्र के सीधे निर्देशों के पुलिस विभाग इस स्तर का कोई बड़ा कदम नहीं उठा सकता, इसलिए पूरी नैतिक और प्रशासनिक जवाबदेही गृह मंत्रालय की बनती है। उन्होंने मांग की कि गृह मंत्री अमित शाह को संसद के पटल पर आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और देश के युवाओं व छात्रों से इस अमानवीय व्यवहार के लिए माफी मांगनी चाहिए।
“छात्रों पर एके-47 मत चलाइए, उनसे बातचीत कीजिए”
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने भी सरकार पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से पुलिस बर्बरता और दमन की जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक हैं। उन्होंने कहा कि छात्र अपनी जायज मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे हैं, सरकार को उनसे संवाद करना चाहिए न कि उन पर एके-47 जैसे हथियारों और लाठियों का इस्तेमाल करना चाहिए।
प्रतापगढ़ी ने आरोप लगाया कि किसके इशारे पर दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों, महिलाओं और छात्राओं पर ऐसी brutal कार्रवाई की गई, इसका जवाब केंद्रीय गृह मंत्री को संसद में देना ही होगा। उन्होंने अंत में कहा कि यह सिर्फ विपक्ष की नहीं बल्कि देश के हर अभिभावक की गंभीर चिंता है, लेकिन अफसोस है कि सरकार को युवाओं के भविष्य की कोई फिक्र नहीं है।










