निवेश को बढ़ावा देने की तैयारी, Mohan Yadav सरकार देगी खाली पड़ी सरकारी जमीन उद्योगों को

भोपाल. प्रदेश में खाली पड़ी वर्षों पुरानी अनुपयोगी शासकीय भूमि अब राज्य सरकार बेचेगी नहीं बल्कि निवेशकों को उद्योग लगाने के लिए दी जाएगी। इस दिशा में राज्य सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग ऐसी भूमि चिह्नित कर रहा है जिनका उपयोग बड़े उद्योगों के साथ-साथ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम के लिए किया जा सकेगा। दरअसल, कुछ जमीनें ऐसी है जो शहर के नजदीक या शहर के बीच में हैं। यहां बड़े उद्योग लगाना संभव नहीं इसलिए इन्हें लघु उद्योगों को आवंटित करने पर विचार किया जा रहा है। 198 एकड़ भूमि है खाली

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Published On :

अप्रैल 26, 2026

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भोपाल.

प्रदेश में खाली पड़ी वर्षों पुरानी अनुपयोगी शासकीय भूमि अब राज्य सरकार बेचेगी नहीं बल्कि निवेशकों को उद्योग लगाने के लिए दी जाएगी। इस दिशा में राज्य सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग ऐसी भूमि चिह्नित कर रहा है जिनका उपयोग बड़े उद्योगों के साथ-साथ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम के लिए किया जा सकेगा। दरअसल, कुछ जमीनें ऐसी है जो शहर के नजदीक या शहर के बीच में हैं। यहां बड़े उद्योग लगाना संभव नहीं इसलिए इन्हें लघु उद्योगों को आवंटित करने पर विचार किया जा रहा है।

198 एकड़ भूमि है खाली
तिलहन संघ का सीहोर के पचामा में 70 एकड़ का सोयाबीन प्रोसेसिंग प्लांट, नर्मदापुरम के बनापुरा में 45 एकड़ में सोयाबीन प्रोसेसिंग प्लांट, मुरैना के जड़ेरूआ में 40 एकड़ में सरसों तेल प्लांट और सीधी जिले के चुरहट में 43 एकड़ में स्थित वनस्पति तेल का प्लांट है। कुल 198 एकड़ भूमि पर बंद पड़े इन चारों तेल उत्पादन प्लांटों की भूमि पर उद्योग स्थापित करने के लिए एमएसएमई और एमपीआइडीसी को देने की तैयारी है। बता दें, मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने हाल ही में कहा था कि सरकार अब सरकारी जमीनों को सीधे निजी हाथों में बेचने के बजाय, उन पर स्वयं या सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड में आइटी पार्क, डाटा सेंटर और हाईटेक टाउनशिप विकसित करेगी। हाईवे किनारे की भूमि पर क्लस्टर विकसित करने की तैयारी राज्य सरकार की तैयारी है कि हाईवे किनारे से लगी प्राइम लोकेशन की जमीन पर क्लस्टर विकसित किए जाएं। एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) के तहत फूड प्रोसेसिंग इकाई और टेक्सटाइल पार्क जैसे क्लस्टर लगाए जाएं। ऐसी प्राइम लोकेशन चिह्नित कर निवेशकों को बताई जाएगी।

पांच साल में बेच दीं 101 शासकीय संपत्तियां
मध्य प्रदेश सरकार ने पांच साल में 1,110 करोड़ रुपये में 101 शासकीय संपत्तियां बेच दीं। यह संपत्तियां प्रदेश में और प्रदेश के बाहर स्थित थीं। वर्ष 2020 में बनाए गए लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग के अस्तित्व में आने के बाद ये संपत्तियां बेची गईं। राज्य परिवहन निगम के बस डिपो, विभिन्न बोर्ड की जमीन, सरकारी कार्यालय, जेल विभाग की भूमि सहित कुल 101 सरकारी संपत्तियों का विक्रय किया गया। ग्वालियर की 19 संपत्तियां, इंदौर की 13, भोपाल की चार, जबलपुर की तीन, उज्जैन की छह, मुरैना की तीन, नर्मदापुरम तीन, भिंड दो, बालाघाट की तीन सहित कुल 101 सरकारी संपत्तियां विक्रय की गई हैं। 4,44,941.88 वर्ग किमी क्षेत्रफल की परिसंपत्ति का विक्रय किया गया है। भोपाल में प्राइम लोकेशन पर स्थित आरटीओ और मध्य प्रदेश सड़क परिवहन निगम की संपत्ति भी विक्रय करने की तैयारी थी लेकिन बाद में इसका प्रस्ताव टाल दिया गया।

कलेक्टरों को पत्र भी लिखा है –
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के लिए जिलों से भूमि मांगी है। खाली पड़ी शासकीय भूमि उद्योग को देने के लिए कलेक्टरों को पत्र भी लिखा है।
– दिलीप कुमार, आयुक्त, एमएसएमई

 

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