पटना को मिलेगा ₹8,456 करोड़ का एलिवेटेड कॉरिडोर, नीचे 4 लेन-ऊपर 6 लेन का होगा निर्माण

पटना. राजधानी पटना के न्यू बाईपास पर जाम की समस्या से स्थायी निजात दिलाने की दिशा में बड़ी पहल होने जा रही है। अनीसाबाद से दीदारगंज तक करीब 13.14 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड एट-ग्रेड कॉरिडोर बनाया जाएगा। यह बिहार का पहला ऐसा कॉरिडोर होगा, जिसमें मौजूदा सड़क के ऊपर छह लेन की एलिवेटेड सड़क होगी।रियोजना पर करीब 8,456 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस हिसाब से प्रति किलोमीटर निर्माण लागत करीब 643 करोड़ रुपये होगी। परियोजना पूरी होने के बाद दक्षिणी पटना के करीब 150 मोहल्लों की 10 लाख आबादी को न्यू बाईपास पर भारी वाहनों के कारण लगने

Wrriten By :

Editor

Published On :

सितम्बर 2, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

पटना.

राजधानी पटना के न्यू बाईपास पर जाम की समस्या से स्थायी निजात दिलाने की दिशा में बड़ी पहल होने जा रही है। अनीसाबाद से दीदारगंज तक करीब 13.14 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड एट-ग्रेड कॉरिडोर बनाया जाएगा।

यह बिहार का पहला ऐसा कॉरिडोर होगा, जिसमें मौजूदा सड़क के ऊपर छह लेन की एलिवेटेड सड़क होगी।रियोजना पर करीब 8,456 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस हिसाब से प्रति किलोमीटर निर्माण लागत करीब 643 करोड़ रुपये होगी। परियोजना पूरी होने के बाद दक्षिणी पटना के करीब 150 मोहल्लों की 10 लाख आबादी को न्यू बाईपास पर भारी वाहनों के कारण लगने वाले जाम से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

नीचे चार लेन, ऊपर छह लेन की सड़क
अनीसाबाद से दीदारगंज के बीच वर्तमान चार लेन सड़क को यथावत रखते हुए उसके ऊपर छह लेन की एलिवेटेड सड़क बनाई जाएगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारी वाहनों और स्थानीय यातायात को अलग-अलग कर दिया जाएगा। भारी वाहन एलिवेटेड सड़क से सीधे गुजरेंगे। स्थानीय वाहन नीचे की सड़क और सर्विस रोड का इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे न्यू बाईपास पर बार-बार लगने वाले जाम की समस्या काफी हद तक खत्म होने की उम्मीद है।

22 किमी सर्विस रोड, 10 रैंप और चार अंडरपास
परियोजना सिर्फ एलिवेटेड सड़क तक सीमित नहीं होगी। इसके तहत सड़क के दोनों ओर कुल 22 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड बनाई जाएगी। इसके अलावा यातायात को सुगम बनाने के लिए 10 रैंप, दो फ्लाईओवर, तीन छोटे पुल और चार अंडरपास का निर्माण किया जाएगा। पटना-गया रेललाइन पर आठ लेन का रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) भी बनाया जाएगा। न्यू बाईपास और आसपास के इलाकों में जलजमाव की समस्या दूर करने के लिए पांच किलोमीटर से अधिक लंबी आधुनिक ड्रेनेज प्रणाली भी विकसित की जाएगी।

इन प्रमुख जगहों पर खत्म होगा जाम
कॉरिडोर बनने के बाद अनीसाबाद, सरिस्ताबाद, 90 फीट, पुराना बस अड्डा, अशोक नगर, कंकड़बाग-अशोक रोड, भूतनाथ, पहाड़ी, गुरु गोविंद सिंह लिंक पथ, कर्मलीचक और दीदारगंज जैसे प्रमुख इलाकों में यातायात व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है। अभी इन क्षेत्रों में स्थानीय वाहनों के साथ बड़ी संख्या में ट्रक और दूसरे भारी वाहन भी गुजरते हैं। दोनों तरह के ट्रैफिक के एक ही मार्ग पर होने के कारण बाईपास पर अक्सर जाम की स्थिति बनती है।

कच्ची दरगाह-बिदुपुर महासेतु से जुड़ेगा कॉरिडोर
कच्ची दरगाह-बिदुपुर छह लेन महासेतु के चालू होने के बाद इस कॉरिडोर की उपयोगिता और बढ़ जाएगी। उत्तर बिहार से आने-जाने वाले भारी वाहनों को पटना शहर के भीतर प्रवेश किए बिना आगे बढ़ने का बेहतर मार्ग मिलेगा। कोइलवर-बिहटा क्षेत्र से आने वाले बालू और निर्माण सामग्री से लदे ट्रकों के लिए भी यह कॉरिडोर महत्वपूर्ण होगा। इससे गांधी सेतु और आरा-छपरा सेतु पर वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

उत्तर बिहार तक माल ढुलाई होगी आसान
कॉरिडोर के बनने से वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय और दरभंगा समेत उत्तर बिहार के कई जिलों तक माल ढुलाई आसान और तेज हो सकती है। इससे पटना के साथ-साथ पूरे क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था को फायदा मिलने की उम्मीद है। परियोजना का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) पर प्रस्तावित है। इसमें परियोजना की लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा सरकार और 60 प्रतिशत राशि निर्माण एजेंसी की ओर से लगाए जाने का प्रावधान है। सरकार निर्धारित अवधि में एजेंसी को भुगतान करेगी।

अब तैयार होगी डीपीआर
परियोजना के लिए अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। इसके बाद निर्माण से जुड़े अगले चरणों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। पथ निर्माण मंत्री ईं. कुमार शैलेन्द्र के अनुसार, यह परियोजना केवल एक एलिवेटेड सड़क का निर्माण नहीं है, बल्कि भविष्य के ग्रेटर पटना की बढ़ती यातायात जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही बड़ी योजना है। इसका उद्देश्य भारी और स्थानीय यातायात को अलग कर पटना के न्यू बाईपास पर जाम, दुर्घटना और जलजमाव जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान करना है।

परियोजना से क्या बदलेगा?

  • भारी वाहनों का अलग कॉरिडोर: ट्रक और दूसरे भारी वाहन छह लेन की एलिवेटेड सड़क से गुजर सकेंगे।
  • स्थानीय यातायात को राहत: नीचे की सड़क और सर्विस रोड का इस्तेमाल स्थानीय वाहन कर सकेंगे।
  • जाम में कमी: अनीसाबाद से दीदारगंज के बीच प्रमुख जाम प्वाइंट पर यातायात सुगम होगा।
  • सुरक्षित आवागमन: मोहल्लों से मुख्य सड़क पर आने-जाने वाले लोगों के लिए यातायात व्यवस्था सुरक्षित होगी।
  • जलजमाव से राहत: पांच किलोमीटर से अधिक लंबी आधुनिक ड्रेनेज प्रणाली विकसित होगी।
  • पुलों पर दबाव कम: कच्ची दरगाह-बिदुपुर महासेतु के चालू होने के बाद गांधी सेतु समेत अन्य प्रमुख पुलों पर वाहनों का दबाव घट सकता है।
  • व्यापार को रफ्तार: उत्तर बिहार के प्रमुख शहरों तक माल की आवाजाही आसान होने की उम्मीद है।

2