Parliament Monsoon Session: संसद के मानसून सत्र का तीसरा सप्ताह सोमवार से शुरू होने जा रहा है। केंद्र सरकार इस सप्ताह अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की तैयारी में जुटी है। सरकार की कोशिश है कि लंबित महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में पेश कर उन्हें चर्चा और मंजूरी के लिए आगे बढ़ाया जाए। हालांकि, सत्र की शुरुआत से ही विपक्षी दलों के लगातार विरोध और हंगामे के कारण संसद की कार्यवाही प्रभावित होती रही है। ऐसे में सरकार के सामने अपने कामकाज को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने की चुनौती भी बनी हुई है।
लोकसभा में पेश होंगे दो महत्वपूर्ण विधेयक
सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही के दौरान केंद्र सरकार दो प्रमुख विधेयक पेश कर सकती है। इनमें ‘भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक 2026’ और ‘बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल 2026’ शामिल हैं। इन दोनों विधेयकों को प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।‘भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक’ का उद्देश्य देश में सांख्यिकी शिक्षा और शोध संस्थानों से जुड़े प्रावधानों को बेहतर बनाना है, जबकि ‘बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल’ बैंकिंग दस्तावेजों और रिकॉर्ड को कानूनी प्रक्रिया में अधिक प्रभावी बनाने से जुड़ा है।
निर्मला सीतारमण रखेंगी अतिरिक्त अनुदान मांगों पर बयान
लोकसभा में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वर्ष 2022-23 के लिए अतिरिक्त अनुदान मांगों (Demands for Excess Grants) से संबंधित महत्वपूर्ण बयान भी सदन के पटल पर रखेंगी। यह प्रक्रिया सरकार के अतिरिक्त खर्चों को संसद की मंजूरी दिलाने से जुड़ी होती है।वित्त मंत्रालय से जुड़े इन प्रस्तावों को सरकार के वित्तीय प्रबंधन का अहम हिस्सा माना जा रहा है। केंद्र सरकार की कोशिश है कि वित्तीय मामलों से जुड़े सभी जरूरी कार्यों को समय पर पूरा किया जाए।
FCRA संशोधन विधेयक सहित कई कानूनों पर नजर
सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार इसी सप्ताह विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम संशोधन विधेयक यानी FCRA Amendment Bill भी संसद में पेश कर सकती है। यह विधेयक विदेशी फंडिंग और उससे जुड़े नियमों में बदलाव से संबंधित होगा।इसके अलावा सरकार ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2026’ और ‘उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक 2026’ को भी पारित कराने की तैयारी में है। सरकार का मानना है कि इन विधेयकों के जरिए प्रशासनिक व्यवस्था और न्यायिक प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
न्याय व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों पर सरकार का जोर
केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित कई विधेयकों को न्यायपालिका और प्रशासनिक सुधारों से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार का उद्देश्य लंबित मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को तेज करना और सरकारी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता बढ़ाना है।विशेषज्ञों के अनुसार, संसद के इस सत्र में सरकार कई ऐसे कानूनों को मंजूरी दिलाने की कोशिश कर रही है, जिनका असर लंबे समय तक प्रशासनिक ढांचे पर पड़ सकता है। हालांकि, इन विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार को विपक्ष के विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
NEET पेपर लीक मुद्दे पर विपक्ष का लगातार विरोध
मानसून सत्र की शुरुआत से ही विपक्षी दल NEET-UG पेपर लीक मामले और छात्रों के प्रदर्शन को लेकर सरकार पर हमलावर हैं। विपक्ष इस मुद्दे पर संसद में चर्चा और जवाब की मांग कर रहा है। इसी कारण कई बार लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बाधित हुई है।विपक्ष का आरोप है कि सरकार छात्रों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों पर पर्याप्त जवाब नहीं दे रही है। वहीं, सरकार का कहना है कि वह सभी जरूरी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलना जरूरी है।
13 अगस्त तक चलेगा मानसून सत्र, सरकार के सामने बड़ी चुनौती
बता दें कि संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ है और यह 13 अगस्त तक चलेगा। सत्र के बचे हुए दिनों में सरकार अपने विधायी एजेंडे को पूरा करने की कोशिश करेगी।अब यह देखना अहम होगा कि विपक्ष के लगातार विरोध और राजनीतिक टकराव के बीच केंद्र सरकार अपने प्रस्तावित विधेयकों को कितनी आसानी से संसद की मंजूरी दिला पाती है। सरकार जहां सुधारों से जुड़े कानूनों को प्राथमिकता दे रही है, वहीं विपक्ष जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति पर कायम है।










