Parliament Monsoon Session: संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन सोमवार को लोकसभा में जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। विपक्षी सांसदों ने नीट पेपर लीक (NEET Paper Leak) और राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दों को लेकर सदन में भारी नारेबाजी की। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब विपक्षी दल के कई सांसद विरोध प्रदर्शन करते हुए स्पीकर ओम बिरला के आसन (वेल) तक पहुंच गए।
हंगामे और शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। इस दौरान स्पीकर ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों को शांत कराने की कोशिश की और कहा कि नारेबाजी व तख्तियां लहराने से सदन की मर्यादा नहीं बढ़ती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी को नियमों के तहत अपनी बात रखने का उचित मौका मिलेगा, इसलिए सदन के भीतर सिर्फ सार्थक चर्चा होनी चाहिए।
राज्यसभा में तीखे तेवर
दूसरी ओर, उच्च सदन (राज्यसभा) में भी विपक्ष के तेवर बेहद आक्रामक रहे। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का मामला प्रमुखता से उठाया। खरगे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह देश के हजारों छात्रों के भविष्य से जुड़ा संवेदनशील मामला है।
“सरकार आंदोलनकारी छात्रों की आवाज को दबाने और कुचलने की कोशिश कर रही है। जंतर-मंतर पर बच्चों के साथ जो हुआ, वह निंदनीय है।” – मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस अध्यक्ष
खरगे के इस गंभीर आरोप के बाद राज्यसभा में भी सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जिसके चलते उच्च सदन की कार्यवाही को भी दोपहर 12 बजे तक के लिए रोकना पड़ा।
विपक्ष की रणनीति और जवाबदेही
कांग्रेस ने मानसून सत्र की शुरुआत से पहले ही साफ कर दिया था कि वह साझा विपक्ष के साथ मिलकर जनता की आवाज उठाएगी। मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार को घेरते हुए कुछ आंकड़े भी पेश किए। उन्होंने दावा किया कि साल 2014 से लेकर अब तक देश में 152 पेपर लीक के मामले सामने आ चुके हैं, जिसकी वजह से 25 छात्रों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। विपक्ष ने इन घोटालों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि राम मंदिर में चंदा चोरी और युवाओं के भविष्य से जुड़े हर मुद्दे पर मोदी सरकार से जवाब मांगा जाएगा।
आगामी विधायी कार्य और सत्र की अवधि
संसद का यह महत्वपूर्ण मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक संचालित होगा। इस 24 दिवसीय सत्र के दौरान सरकार कई अहम और दूरगामी प्रभाव वाले विधेयकों को पटल पर रखने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, इस सत्र में सरकार परिसीमन (Delimitation) से संबंधित एक महत्वपूर्ण बिल भी पेश कर सकती है। हालांकि, पहले दिन के रुख को देखते हुए यह साफ है कि आने वाले दिनों में भी विभिन्न विधेयकों को पारित कराने के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिल सकता है।










