माता-पिता की सीख ने गढ़ा व्यक्तित्व: ‘कितना भी बदल जाओ…’ बोले NSA अजीत डोभाल

नई दिल्ली राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने अपने माता-पिता से मिली सीख को याद करते हुए कहा कि कितना भी बदल जाओ, लेकिन अपनी परंपराएं कभी मत भूलना। उन्होंने यह बात नई दिल्ली में आयोजित रैबार-7 कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। कार्यक्रम में सीडीएस जनरल अनिल चौहान के साथ उत्तराखंड के कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। सीडीएस चौहान और डोभाल ने मंच पर अपनी बात रखते हुए जोर दिया कि विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखना बहुत जरूरी है।   उत्तराखंड की पत्रिका रैबार-7 की वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में एनएसए अजीत डोभाल ने गढ़वाली

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Published On :

जनवरी 18, 2026

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नई दिल्ली
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने अपने माता-पिता से मिली सीख को याद करते हुए कहा कि कितना भी बदल जाओ, लेकिन अपनी परंपराएं कभी मत भूलना। उन्होंने यह बात नई दिल्ली में आयोजित रैबार-7 कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। कार्यक्रम में सीडीएस जनरल अनिल चौहान के साथ उत्तराखंड के कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। सीडीएस चौहान और डोभाल ने मंच पर अपनी बात रखते हुए जोर दिया कि विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखना बहुत जरूरी है।
 
उत्तराखंड की पत्रिका रैबार-7 की वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में एनएसए अजीत डोभाल ने गढ़वाली भाषा में ही अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि रैबार गढ़वाली भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ “संदेश” होता है। यह विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव पर आधारित पारंपरिक संचार प्रणाली का प्रतीक है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए NSA डोभाल ने इस शब्द के गहरे सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला और आधुनिक विकास की दौड़ में स्थानीय परंपराओं के खो जाने को लेकर आगाह किया।

रैबार मजबूत संचार तंत्र
डोभाल ने कहा, “रैबार शब्द गढ़वालियों के लिए एक महत्वपूर्ण भावना है। यह एक ऐसा संचार तंत्र है, जो भले ही अनजान हो, लेकिन पूरी तरह विश्वसनीय और भरोसेमंद है।” आधुनिक तकनीक आधारित संचार प्रणालियों से इसकी तुलना करते हुए उन्होंने कहा, “आज कई तरह की संचार प्रणालियां हैं, लेकिन उनमें भावनाएं नहीं हैं।” उन्होंने मंच से मजाक में कहा कि आज भले ही एयर इंडिया की फ्लाइट कैंसल हो जाए, लेकिन रैबार कभी कैंसल नहीं हो सकता।

स्थानीय लोगों तक पहुंचे विकास का लाभ
समावेशी और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील विकास की जरूरत पर जोर देते हुए NSA ने कहा कि विकास का लाभ केवल निवेशकों को ही नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों को भी मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, “उत्तराखंड का विकास तभी सार्थक है, जब उसका लाभ उत्तराखंडियों को या वहां निवेश करने वालों को मिले।” पर्यटन विकास का स्वागत करते हुए भी डोभाल ने इसके दुष्प्रभावों को लेकर चेताया।

माता-पिता से मिली सीख याद की
उन्होंने कहा, “अगर उत्तराखंड पांच सितारा पर्यटन स्थल बनता है तो यह अच्छी बात है, लेकिन कहीं न कहीं हमारी संस्कृति खो सकती है।” अपने निजी अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता ने हमेशा परंपराओं और रीति-रिवाजों को सहेज कर रखने की सीख दी। उन्होंने कहा, “मेरे माता-पिता ने मुझे सिखाया कि चाहे हम कितना भी बदल जाएं, अपनी परंपराओं को नहीं भूलना चाहिए। यही रैबार है।”

2047 के भारत में उत्तराखंड की भूमिका
कार्यक्रम में सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा में उत्तराखंड की भूमिका पर बात की। उन्होंने कहा, “जब भारत 2047 में एक विकसित राष्ट्र बनेगा, तो क्या उत्तराखंड केवल उसका लाभ उठाएगा या उसमें योगदान भी देगा?” सामूहिक प्रयासों पर बल देते हुए जनरल चौहान ने कहा, “हमें सामूहिक प्रयास करने चाहिए, ताकि हमारे राज्य का विकास हमारे देश के विकास की गति और स्तर के अनुरूप हो।”

उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड को केवल योगदानकर्ता ही नहीं, बल्कि नेतृत्व करने की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा, “कभी-कभी मुझे लगता है कि इस पहल में हमें सिर्फ योगदान नहीं देना चाहिए, बल्कि नेतृत्व भी करना चाहिए।”

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