Parastoo Ahmadi : ईरानी गायिका परस्तू अहमदी को 74 कोड़ों की सजा, स्लीवलेस ड्रेस पहनने पर भड़का प्रशासन

ईरान की गायिका परस्तू अहमदी को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें उन्हें कथित रूप से स्लीवलेस ड्रेस पहनने पर 74 कोड़ों की सजा दिए जाने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है। आखिर इस फैसले के पीछे क्या कारण हैं और इसका वैश्विक असर क्या होगा, जानिए पूरी कहानी।

Parastoo Ahmadi

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 20, 2026

Parastoo Ahmadi : ईरान में कलाकारों और विशेषकर महिला गायिकाओं के प्रति वहां की सत्ता का कड़ा रुख एक बार फिर दुनिया के सामने आया है। हाल ही में ईरान की जानी-मानी गायिका परस्तू अहमदी और उनके सहयोगी आठ कलाकारों को कोम प्रांत की अदालत ने कठोर सजा सुनाई है। इन सभी पर ‘अश्लील कंटेंट’ पब्लिश करने का आरोप लगाया गया है। अदालत ने परस्तू और उनके आठ सहयोगियों को 74-74 कोड़े मारने का क्रूर आदेश दिया है। इसके अतिरिक्त, गायिका पर अगले दो साल तक देश से बाहर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और उन्हें किसी भी प्रकार की कलात्मक गतिविधियों में हिस्सा लेने से भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह फैसला ईरान के कला जगत में भारी खौफ पैदा करने वाला है।

विवाद की शुरुआत: देशभक्ति गीत और स्लीवलेस ड्रेस का वीडियो

यह पूरा विवाद दिसंबर 2024 में हुए एक यूट्यूब लाइव कॉन्सर्ट से शुरू हुआ था। इस ऑनलाइन कार्यक्रम के दौरान परस्तू अहमदी ने ईरान का प्रसिद्ध देशभक्ति गीत ‘अज खूने जवानाने वतन’ गाया था। परफॉरमेंस के दौरान उन्होंने पारंपरिक हिजाब नहीं पहना था और स्लीवलेस ड्रेस में दिखाई दी थीं। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत कम समय में वायरल हो गया, जिसे लाखों लोगों ने देखा और सराहा। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने इसे कानून का उल्लंघन माना। उसी समय परस्तू और उनकी टीम के सदस्यों को हिरासत में लिया गया था। भले ही उन्हें बाद में रिहा कर दिया गया, लेकिन उनके खिलाफ अदालती कार्यवाही निरंतर जारी रही, जो अब इस कठोर सजा के रूप में सामने आई है।

मानवाधिकार संगठनों का प्रहार: ईरान की कथनी और करनी में अंतर

इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को उद्वेलित कर दिया है। ‘सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान’ की डायरेक्टर बहार गंदेहारी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि परस्तू को दी गई यह सजा इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति में रत्ती भर भी सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि एक तरफ ईरान सरकार अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने के लिए प्रोपेगैंडा चला रही है और विज्ञापनों के जरिए देश को सामान्य दिखाने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ कलाकारों को इस तरह की मध्ययुगीन सजाएं दी जा रही हैं। उन्होंने सरकार के दावों और वास्तविकता के बीच के इस गहरे अंतर को ‘पाखंड’ करार दिया है।

महिलाओं के खिलाफ ‘युद्ध’: बुद्धिजीवियों ने उठाई आवाज

इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए पेंसिलवेनिया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर फातेमा शम्स ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर इसे महिलाओं के खिलाफ चल रही एक ‘खुली जंग’ बताया है। उन्होंने उन लोगों की आलोचना की जो ऐसी बर्बरता को देखकर भी चुप रहते हैं या शांति की बातें करते हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अगर आप इस खुलेआम हो रही हिंसा को मानवता के खिलाफ अपराध नहीं मानते और पीड़ितों की आवाज नहीं सुनते, तो आप न्याय के पक्ष में नहीं खड़े हैं। यह सजा केवल एक गायिका की नहीं, बल्कि ईरान में उन तमाम महिलाओं की आजादी और न्याय की आवाज को दबाने की कोशिश है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार मांग रही हैं। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि ईरान में कला और व्यक्तिगत आजादी पर सरकारी अंकुश कितना दमघोंटू हो चुका है।

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