पाकिस्तान की हालत हुई दयनीय, सऊदी मदद भी नाकाम, ईरान युद्ध ने किया बर्बाद

करांची  अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से पाकिस्तान पर बड़ा असर दिखाई दे रहा है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कैबिनेट बैठक में खुद ये बात कही है और चेतावनी दी है कि महंगे होते तेल और क्षेत्रीय अस्थिरता ने देश की आर्थिक हालत पतली कर दी है. कैबिनेट बैठक में उन्होंने बताया कि युद्ध से पहले पाकिस्तान का साप्ताहिक तेल बिल करीब 300 मिलियन डॉलर था, जो अब बढ़कर 800 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है. ऐसे में हालात पर नजर रखने के लिए सरकार ने एक टास्क फोर्स भी बनाई है. आपको बता दें

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Published On :

मई 1, 2026

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करांची 

अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से पाकिस्तान पर बड़ा असर दिखाई दे रहा है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कैबिनेट बैठक में खुद ये बात कही है और चेतावनी दी है कि महंगे होते तेल और क्षेत्रीय अस्थिरता ने देश की आर्थिक हालत पतली कर दी है. कैबिनेट बैठक में उन्होंने बताया कि युद्ध से पहले पाकिस्तान का साप्ताहिक तेल बिल करीब 300 मिलियन डॉलर था, जो अब बढ़कर 800 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है. ऐसे में हालात पर नजर रखने के लिए सरकार ने एक टास्क फोर्स भी बनाई है. आपको बता दें कि पाकिस्तान इस वक्त महंगाई का सबसे ऊंचा स्तर देख रहा है और तेल-गैस के लिए यहां त्राहिमाम मचा हुआ है। 

शहबाज शरीफ ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने पिछले दो वर्षों में पाकिस्तान की आर्थिक प्रगति को गंभीर नुकसान पहुंचाया है.पाकिस्तान महंगाई की मार तो झेल ही रहा है, लेकिन शांति बनाने में भी वो सक्रिय है. शहबाज शरीफ ने बताया कि इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराई गई, जो 21 घंटे तक चली. इसके बाद दूसरे दौर की वार्ता हो ही नहीं पाई. फिलहाल संघर्ष विराम बना हुआ है और पाकिस्तान किसी भी तरह से वार्ता को फिर से शुरू करना चाहता है। 

तेल के बढ़ते दाम ने रुलाया
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हा कि इस समय कच्चे तेल की कीमतें फिर आसमान छू रही हैं, इसलिए नए दाम तय करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण है, लेकिन सामूहिक प्रयासों से हालात पर काबू पाने की कोशिश जारी है. इस बीच उन्होंने पेट्रोलियम मंत्री के काम की सराहना करते हुए कहा कि उनकी ओर से उठाए गए कदमों के कारण पाकिस्तान में स्थिति अन्य देशों की तुलना में संतोषजनक है और कहीं भी लंबी कतारें नहीं हैं. हालांकि युद्ध से पहले और बाद की तुलना में 500 मिलियन डॉलर का उछाल आया है, जो अर्थव्यवस्था को की रीढ़ तोड़ रहा है. सरकार मितव्ययिता और बचत के जरिए हालात संभालने की कोशिश कर रही है, इसके लिए एक टास्क फोर्स भी बनाई गई है. सरकारी उपायों के चलते ईंधन की खपत में काफी कमी आई है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही थी, लेकिन युद्ध के कारण प्रगति को नुकसान पहुंचा है। 

ईरान-अमेरिका युद्ध में पाकिस्तान कर रहा मध्यस्थता

    पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता और तेल संकट के बीच इस पहल को काफी अहम माना जा रहा है, हालांकि ये कुछ खास परिणाम नहीं दे पाई है। 

    पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू कराने की कोशिश की है. जानकारी के मुताबिक दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के बीच लंबी बातचीत हुई, जिसमें युद्धविराम और तनाव कम करने के उपायों पर चर्चा की गई. फिलहाल एक अस्थायी संघर्ष विराम बना हुआ है, जिसे बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। 

    पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था से परेशान है और शांति चाहता है और दोनों देशों के बीच संवाद को आगे बढ़ाने के लिए खूब उठापटक कर रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि ईरान के विदेश मंत्री के साथ संपर्क में रहकर आगे की रणनीति पर काम किया जा रहा है। 

 

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