चौधरी बनने चला था पाक, होर्मुज में ही रुक गया सफर, ईरान ने जहाज वापस भेजा

ईरान ईरान युद्ध का आज 26वां दिन है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 15 शर्तों वाला एक शांति प्रस्ताव दिया है। खबरों के मुताबिक, अमेरिका ने एक महीने का सीजफायर का प्रस्ताव रखा है ताकि बातचीत के जरिए स्थायी समाधान निकाला जा सके। हालांकि, ईरान ने फिलहाल इन शर्तों पर कड़ा रुख अपनाया हुआ है। इसी बीच, ईरान और अमेरिका के बीच इस जंग में मध्यस्थ बनने का प्रस्ताव देने वाले पाकिस्तान को करारा झटका लगा है। दरअसल, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने पाकिस्तान के कराची जा रहे 'सेलेन' (SELEN) नामक एक जहाज को होर्मुज

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Published On :

मार्च 25, 2026

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ईरान
ईरान युद्ध का आज 26वां दिन है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 15 शर्तों वाला एक शांति प्रस्ताव दिया है। खबरों के मुताबिक, अमेरिका ने एक महीने का सीजफायर का प्रस्ताव रखा है ताकि बातचीत के जरिए स्थायी समाधान निकाला जा सके। हालांकि, ईरान ने फिलहाल इन शर्तों पर कड़ा रुख अपनाया हुआ है। इसी बीच, ईरान और अमेरिका के बीच इस जंग में मध्यस्थ बनने का प्रस्ताव देने वाले पाकिस्तान को करारा झटका लगा है।

दरअसल, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने पाकिस्तान के कराची जा रहे 'सेलेन' (SELEN) नामक एक जहाज को होर्मुज स्ट्रेट पार करने से रोक दिया है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस जहाज ने जरूरी अनुमति और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया था। ईरान की शक्तिशाली नौसेना इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने हस्तक्षेप करते हुए साफ कहा कि अब इस मार्ग से गुजरने वाले सभी जहाजों को पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

नहीं ली अनुमति, इसलिए लौटाया
काबुल स्थित ईरानी दूतावास के एक बयान के अनुसार, ईरान ने कराची (पाकिस्तान) जा रहे एक जहाज को वापस लौटा दिया है, क्योंकि वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने की मंजूरी हासिल करने में नाकाम रहा था। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के रियर एडमिरल अलीरेज़ा तंगसिरी ने कहा कि पाकिस्तानी जहाज को जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति न लेने के कारण वापस भेज दिया गया; उन्होंने यह भी कहा कि अब जहाजों को ईरानी समुद्री अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाकर ही वहाँ से गुजरना होगा।

‘गुजरना है तो चुकानी होगी कीमत’
इस घटनाक्रम के साथ ही ईरान ने एक और बड़ा कदम उठाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अब कुछ जहाजों से इस जलमार्ग से गुजरने के लिए करीब 20 लाख डॉलर (लगभग 18.8 करोड़ रुपये) का शुल्क लिया जाएगा। ईरानी सांसद अलाउद्दीन बोरुजेर्दी के मुताबिक, “युद्ध की कीमत होती है, और अब यह शुल्क ईरान की संप्रभुता का प्रतीक है।”

दुनिया के लिए क्यों अहम है यह रास्ता?
बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से करीब 20% वैश्विक तेल और गैस व्यापार गुजरता है। इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों पर, ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है। भारत जैसे आयात-निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था पर तो इसका बहुत बुरा असर पड़ता है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में जहाजों की आवाजाही में बाधा, ट्रांजिट शुल्क में वृद्धि और बीमा और परिवहन लागत बढ़ना ये सभी मिलकर ईंधन कीमतों में उछाल ला सकते हैं।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
इस घटनाक्रम के बाद भारत में भी राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिली। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए पाकिस्तान की “शांति मध्यस्थ” की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। अमित मालवीय ने एक्स पर लिखा, "भारत में कुछ जाने-पहचाने लोग जो यह कहानी फैला रहे थे कि 'पाकिस्तान शांति की मध्यस्थता कर रहा है', उसकी तो पोल खुल गई।" उन्होंने आगे कहा, "खबरों के मुताबिक, ईरान ने कराची जा रहे एक जहाज को वापस भेज दिया, क्योंकि वह Hormuz जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति नहीं ले पाया।" हालांकि ईरान के राष्ट्रपति ने साफ कहा है कि यह जलडमरूमध्य सभी देशों के लिए खुला है लेकिन उन देशों के लिए नहीं जो ईरान के खिलाफ कदम उठाते हैं।

 

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