
Pakistan News: पाकिस्तान के पेशावर स्थित ‘अल खैर स्कूल’ में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहाँ पढ़ाई के दौरान अचानक स्कूल की छत ढह गई। इस भीषण दुर्घटना में 28 मासूम स्कूली बच्चों और एक महिला शिक्षिका की मौके पर ही मौत हो गई। मलबे के नीचे दबने वाले बच्चों की उम्र 7 से 12 साल के बीच बताई जा रही है।
पेशावर के डिप्टी कमिश्नर अफाक वजीर के अनुसार, हादसा उस समय हुआ जब छात्र अपनी कक्षाओं में मौजूद थे। छत गिरते ही पूरी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई और बच्चे भारी मलबे के नीचे दब गए। घटना की सूचना मिलते ही राहत एवं बचाव दल ‘रेस्क्यू 1122’ की टीमें मौके पर पहुंचीं और मलबे को हटाकर दबे हुए लोगों को बाहर निकालने का कार्य शुरू किया।
Pakistan School Accident : पाकिस्तान के पेशावर में स्कूल की छत ढही, 20 बच्चों समेत 21 की मौत
अस्पताल में इमरजेंसी घोषित, 5 बच्चों की हालत गंभीर

हादसे के बाद इलाके में अफ़रा-तफ़री का माहौल बन गया। लेडी रीडिंग अस्पताल (LRH) के प्रवक्ता मुहम्मद आसिम ने स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि इस दर्दनाक हादसे में 28 छात्रों और एक शिक्षिका की जान गई है। इसके अलावा, हादसे में 21 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
घायलों में से 5 बच्चों की हालत अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लेडी रीडिंग अस्पताल में तत्काल प्रभाव से आपातकाल (Emergency) घोषित कर दिया गया है, ताकि घायलों को त्वरित और बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जा सके।
अभिभावकों की आपबीती और प्रत्यक्षदर्शियों का दर्द

हादसे की खबर मिलते ही बदहवास अभिभावक स्कूल की ओर दौड़ पड़े। मौके पर पहुंचे एक अभिभावक समीउल्लाह ने अपना खौफनाक अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके परिवार के छह बच्चे इसी स्कूल में पढ़ते हैं। सुबह करीब 8:50 बजे फोन मिलने के बाद वे 9 बजे तक घटनास्थल पर पहुंचे।
समीउल्लाह ने बताया कि उन्होंने स्वयं मलबे से 8 साल से कम उम्र की तीन बच्चियों को सुरक्षित बाहर निकाला। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जब उन्होंने ढही हुई इमारत देखी तो उन्हें लगा कि ग्राउंड फ्लोर पर मौजूद उनका बेटा भी नहीं बचा होगा। हालाँकि, उनका बेटा खुशकिस्मत रहा कि हादसा होने के ठीक पहले वह पानी पीने के लिए क्लासरूम से बाहर निकला था।
जांच के आदेश और घटिया निर्माण पर उठे सवाल

खैबर पख्तूनख्वा (KP) के गवर्नर फैसल करीम कुंडी ने इस त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने इसे एक बेहद दर्दनाक और असहनीय घटना करार देते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट की। गवर्नर ने संबंधित अधिकारियों को घटना की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने और छत गिरने के मुख्य कारणों की निष्पक्ष जांच के सख्त निर्देश दिए हैं।
पाकिस्तान में बुनियादी ढांचे और इमारतों का गिरना कोई नई बात नहीं है। खराब सुरक्षा मानकों, देखरेख की कमी और निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री के इस्तेमाल के कारण अक्सर ऐसे हादसे होते रहते हैं। इससे पहले जुलाई महीने में भी उमरकोट के पास एक सरकारी प्राइमरी स्कूल की दीवार गिरने से 3 से 13 साल की तीन मासूम बच्चियों की अकाल मौत हो चुकी है।
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