Pak-Afghan War : अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी सीमा विवाद अब एक “खुले युद्ध” का रूप ले चुका है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा के सीमावर्ती जिले बाजौर में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और अफगान तालिबान की संयुक्त सैन्य कार्रवाइयों ने पाकिस्तानी सेना को हिलाकर रख दिया है। शुक्रवार रात हुए एक बड़े हमले में पाकिस्तानी सेना के लगभग 40 जवानों के मारे जाने की खबर है। अफगान तालिबान ने दावा किया है कि उन्होंने न केवल सैनिकों को निशाना बनाया, बल्कि कई महत्वपूर्ण सैन्य चौकियों पर कब्जा भी कर लिया है। इससे पहले भी तालिबान ने दर्जनों पाकिस्तानी सैनिकों को हताहत करने का दावा किया था, जिससे स्पष्ट है कि सीमा पर स्थिति नियंत्रण से बाहर हो चुकी है।
इस्लामाबाद की दहलीज तक पहुँचा युद्ध: सुइसाइड ड्रोन से सैन्य ठिकानों पर हमला
युद्ध की आग अब केवल सीमा तक सीमित नहीं रही है, बल्कि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद तक पहुँच गई है। अफगान तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि उन्होंने पाकिस्तान द्वारा पक्तिया प्रांत में किए गए हवाई हमलों का बदला लेने के लिए इस्लामाबाद पर ‘सुइसाइड ड्रोन’ से हमला किया है। ड्रोन हमलों के बाद इस्लामाबाद के सैन्य इलाकों से आग की लपटें और धुएं के गुबार उठते देखे गए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में हमले के बाद मची चीख-पुकार और तबाही के मंजर को देखा जा सकता है। तालिबान का कहना है कि यह हमला पूरी तरह से रक्षात्मक है और उनके निशाने पर केवल संवेदनशील सैन्य ठिकाने थे।
इन प्रमुख क्षेत्रों को बनाया गया निशाना: अफगान रक्षा मंत्रालय का दावा
अफगान रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इनायतुल्लाह ख्वाराजमी ने हमलों की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि उनके निशाने पर इस्लामाबाद का फैजाबाद सैन्य कैंप, नौशेरा का सैन्य मुख्यालय, जमरूद की मिलिट्री टाउनशिप और एबटाबाद जैसे रणनीतिक स्थान थे। पाकिस्तान ने हाल ही में काबुल और कंधार जैसे अफगान शहरों पर बमबारी की थी, जिसके जवाब में अफगानिस्तान ने यह ‘ओपन वॉर’ (खुला युद्ध) छेड़ा है। रातभर चली इस कार्रवाई ने पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि हमला देश के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में हुआ है।
कूटनीतिक हलचल: अफगानिस्तान और सऊदी अरब के बीच फोन पर चर्चा
युद्ध के मैदान में जारी भीषण गोलाबारी के बीच कूटनीतिक गलियारों में भी सरगर्मी तेज हो गई है। अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मौलवी अमीर खान मुत्तकी ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान के साथ टेलीफोन पर लंबी बातचीत की। इस चर्चा का मुख्य केंद्र पाकिस्तान के साथ बढ़ता तनाव और क्षेत्रीय स्थिरता रहा। मुत्तकी ने स्पष्ट किया कि अफगानिस्तान किसी भी देश के खिलाफ नकारात्मक इरादा नहीं रखता, लेकिन अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए वह हर संभव कदम उठाएगा। उन्होंने सऊदी अरब की मध्यस्थता और उनके रचनात्मक राजनयिक प्रयासों की सराहना की।
शांति की अपील: सऊदी अरब ने तनाव कम करने पर दिया जोर
सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने इस संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सैन्य संघर्ष किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है और मुद्दों को केवल संवाद और राजनीतिक माध्यमों से ही हल किया जाना चाहिए। सऊदी अरब ने आश्वासन दिया कि वह क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए अपने प्रयास जारी रखेगा। दोनों देशों के बीच संपर्क बनाए रखने और राजनयिक चैनलों को सक्रिय करने पर सहमति बनी है ताकि इस युद्ध को और अधिक फैलने से रोका जा सके।









