Pahalgam Terror Attack Anniversary: दक्षिण कश्मीर के खूबसूरत पर्यटन स्थल पहलगाम में हुए उस भयावह आतंकी हमले को कल एक साल पूरा हो जाएगा। तारीख थी 22 अप्रैल, 2025, जब आतंकवाद के खूनी खेल ने देश को हिलाकर रख दिया था। इस हमले ने न केवल कई परिवारों के चिराग बुझा दिए, बल्कि भारतीय नौसेना के एक होनहार अधिकारी लेफ्टिनेंट विनय नरवाल को भी हमसे छीन लिया। आज हमले की पहली बरसी पर करनाल स्थित उनके पैतृक आवास पर सन्नाटा पसरा है और एक पिता की आंखें आज भी दरवाजे पर टिकी हैं।
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सपनों से भरी डायरी और एक अधूरा फरिश्ता
शहीद विनय नरवाल के पिता राजेश नरवाल के लिए यह एक साल किसी युग से कम नहीं रहा। उन्होंने नम आंखों से बताया कि विनय सिर्फ उनका बेटा नहीं, बल्कि घर का वह आधार स्तंभ था, जिसके इर्द-गिर्द सबकी खुशियां घूमती थीं। राजेश नरवाल कहते हैं, “विनय एक फरिश्ते जैसा था। उसने अपने भविष्य, अपने परिवार और अपनी नई गृहस्थी को लेकर ढेरों सपने बुने थे। उसने अपनी एक डायरी में उन सभी योजनाओं को लिख रखा था जो वह आने वाले समय में पूरी करना चाहता था।”
एक पिता के लिए सबसे बड़ी त्रासदी अपने जवान बेटे के पार्थिव शरीर को कंधा देना होता है। राजेश जी के अनुसार, जिस क्षण उन्हें विनय की शहादत की खबर मिली, उनके लिए संसार के सारे रंग बेरंग हो गए। वह कहते हैं कि उस एक पल ने हमारी जिंदगी की सारी खुशियां हमेशा के लिए खत्म कर दीं।
हनीमून ट्रिप बना आखिरी सफर
महज 26 साल की उम्र में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की कहानी बेहद हृदयविदारक है। विनय की नई-नई शादी हुई थी और वह अपनी पत्नी हिमांशी के साथ अपनी नई जिंदगी के खूबसूरत पल बिताने के लिए कश्मीर के पहलगाम गए थे। किसे पता था कि यह हनीमून ट्रिप एक ऐसी त्रासदी में बदल जाएगा जिसकी टीस ताउम्र सालती रहेगी। आतंकवादियों ने बेहद कायराना तरीके से इस युवा जोड़े को करीब से निशाना बनाया था, जिसमें विनय वीरगति को प्राप्त हुए।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ और सेना पर गर्व
दुख के इस असीम सागर में डूबे होने के बावजूद, राजेश नरवाल का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है जब वह भारतीय सेना और सरकार की बात करते हैं। उन्होंने पिछले साल मई में भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का विशेष उल्लेख किया। इस सैन्य ऑपरेशन के जरिए सुरक्षा बलों ने उन आतंकियों और साजिशकर्ताओं को ढेर किया था जो इस हमले के पीछे थे।
राजेश नरवाल ने कहा, “हमें अपनी सेना और सरकार की जवाबी कार्रवाई पर पूरा भरोसा है। दोषियों को उनके अंजाम तक पहुंचाकर सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब चुप बैठने वाला देश नहीं है।” उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसी कठोर सैन्य कार्रवाई के बाद दुश्मन भारत की अखंडता और शांति को चुनौती देने से पहले सौ बार सोचेगा।
आज जब पूरा देश पहलगाम के उन 26 शहीदों को याद कर रहा है, तब विनय नरवाल का परिवार उनकी डायरी के उन पन्नों को पलटकर अपनी यादें ताजा कर रहा है, जो अब कभी हकीकत का रूप नहीं ले पाएंगे। यह शहादत हमें याद दिलाती है कि हमारी शांति के पीछे कितनी बड़ी कीमत चुकाई जाती है।









