Padmini Ekadashi 2026: 26 या 27 मई कब है पद्मिनी एकादशी? नोट करें दिन तारीख और शुभ मुहूर्त

वर्ष 2026 में पद्मिनी एकादशी कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पारण का समय। ज्येष्ठ अधिक मास की इस विशेष एकादशी व्रत की पूरी जानकारी के लिए यहाँ पढ़ें।

Padmini Ekadashi 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 23, 2026

Padmini Ekadashi 2026: सनातन धर्म में कई सारे व्रत त्योहार पड़ते हैं, और सभी का अपना महत्व होता है। लेकिन एकादशी व्रत को बेहद ही खास माना गया है, जो कि हर माह में दो बार पड़ती है। ऐसे साल में कुल 24 एकादशी व्रत किए जाते हैं, जो कि भगवान विष्णु को समर्पित हैं। इस दिन भक्त भगवान श्री हरि ​की विधिवत पूजा करते हैं और व्रत आदि भी रखते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से प्रभु की असीम कृपा बरसती है, और कष्टों का निवारण हो जाता है। अभी ज्येष्ठ का महीना चल रहा है और इस माह पड़ने वाली एकादशी को पद्मिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। ऐसे में हम आपको अपने इस लेख द्वारा एकादशी की तारीख और शुभ मुहूर्त की जानकारी प्रदान कर रहे हैं, तो आइए जानते हैं।

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पद्मिनी एकादशी की तारीख

पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 26 मई की सुबह 5 बजकर 10 मिनट से आरंभ हो रही है और इस तिथि का समापन 27 मई को प्रात: 6 बजकर 21 मिनट पर हो जाएगा। वहीं उदया तिथि के अनुसार पद्मिनी एकादशी व्रत 27 मई दिन बुधवार को किया जाएगा।

पद्मिनी एकादशी का मुहूर्त

आपको बता दें कि एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 03 मिनट से प्रात: 4 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। वहीं लाभ उन्नति मुहूर्त सुबह 5 बजकर 25 मिनट से प्रात: 7 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त प्रात: 7 बजकर 8 मिनट से प्रात: 8 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा शुभ उत्तम मुहूर्त प्रात: 10 बजकर 35 मिनट से दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। इन शुभ मुहूर्तों में पूजा करना लाभकारी होगा।

एकादशी पूजन विधि

एकादशी के पावन दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें। इसके बाद साफ वस्त्रों को धारण करें। अब भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प करें। इसके बाद पूजन स्थल को गंगाजल से पवित्र करें। श्री हरि की प्रतिमा पूजा स्थल पर स्थापित करें। इसके बाद घी या तेल का दीपक जलाकर पूजा आरंभ करें। भगवान विष्णु को जल, पीले पुष्प, फल और तुलसी दल अर्पित करें। साथ ही पूजा के दौरान विष्णु सहस्रनाम और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें। दिनभर सात्विक भोजन करें और मन में भगवान विष्णु का ध्यान बनाए रखें। शाम के वक्त विधिवत भगवान विष्णु की आरती करें, अगले दिन द्वादशी तिथि में शुभ समय पर व्रत का पारण करें।

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