Padma Awards 2026: दिशोम गुरु शिबू सोरेन को पद्म भूषण सम्मान, केंद्र सरकार का ऐलान

Padma Awards 2026 की घोषणा ने झारखंड की राजनीति को भावुक कर दिया है। आदिवासी अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण देने का ऐलान किया गया है। यह सम्मान उनके दशकों लंबे संघर्ष और लोक कल्याण में योगदान को राष्ट्रीय पहचान देता है।

दिशोम गुरु शिबू सोरेन को पद्म भूषण सम्मान

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जनवरी 25, 2026

Padma Awards 2026: केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा करते हुए झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान देने का ऐलान किया है। यह सम्मान उन्हें लोक कल्याण और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए प्रदान किया जाएगा। सरकार के इस फैसले को आदिवासी समाज और झारखंड की राजनीति में शिबू सोरेन के योगदान की औपचारिक मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।

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शिबू सोरेन का नाम

गृह मंत्रालय द्वारा जारी पद्म पुरस्कारों की आधिकारिक सूची के अनुसार, इस वर्ष कुल 5 लोगों को पद्म विभूषण, 13 को पद्म भूषण और 113 को पद्म श्री से सम्मानित किया जाएगा। इन्हीं प्रतिष्ठित नामों में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का नाम भी शामिल है। पद्म भूषण भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो असाधारण सेवाओं के लिए प्रदान किया जाता है।

4 अगस्त 2025 को हुआ था शिबू सोरेन का निधन

शिबू सोरेन का निधन 4 अगस्त 2025 को दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में इलाज के दौरान हुआ था। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन से झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश की राजनीति में एक युग का अंत माना गया। शिबू सोरेन को लोग स्नेहपूर्वक ‘दिशोम गुरु’ और ‘गुरुजी’ के नाम से जानते थे।

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आदिवासी अधिकारों की लड़ाई के प्रतीक थे दिशोम गुरु

शिबू सोरेन का जीवन आदिवासी समाज के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई को समर्पित रहा। उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के बैनर तले आदिवासियों के शोषण के खिलाफ आवाज उठाई और उन्हें राजनीतिक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उनका जन्म 11 जनवरी 1944 को हजारीबाग में हुआ था, जो उस समय बिहार का हिस्सा था। उन्होंने जीवनभर जल, जंगल और जमीन के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

झारखंड आंदोलन में निभाई ऐतिहासिक भूमिका

अलग झारखंड राज्य के निर्माण के आंदोलन में शिबू सोरेन की भूमिका ऐतिहासिक रही। उन्होंने वर्षों तक संघर्ष कर आदिवासियों की मांगों को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। उनके नेतृत्व में चला आंदोलन अंततः वर्ष 2000 में झारखंड राज्य के गठन के रूप में सफल हुआ।

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शिबू सोरेन का लंबा राजनीतिक सफर

शिबू सोरेन ने वर्ष 1977 में पहली बार चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 1980 से वे कई बार लोकसभा सांसद चुने गए। वे लोकसभा और राज्यसभा—दोनों सदनों के सदस्य रहे। उन्होंने केंद्र की यूपीए सरकार में मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई।

तीन बार बने मुख्यमंत्री, लेकिन अधूरा रहा कार्यकाल

शिबू सोरेन तीन बार—2005, 2008 और 2009—में झारखंड के मुख्यमंत्री बने, हालांकि राजनीतिक परिस्थितियों के कारण वे कभी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। स्वास्थ्य खराब होने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली और पार्टी की जिम्मेदारी अपने बेटे हेमंत सोरेन को सौंप दी।

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पद्म भूषण से सम्मानित होगा संघर्ष और समर्पण का जीवन

मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान शिबू सोरेन के उस संघर्षपूर्ण जीवन को नमन है, जिसने आदिवासी समाज को आवाज दी और झारखंड की राजनीति को नई दिशा दी। यह सम्मान उनके विचारों और योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक जीवित रखने का प्रतीक माना जा रहा है।