Delhi Riots: उमर खालिद-शरजील की जमानत अर्जी खारिज होने पर भड़के ओवैसी, कांग्रेस को ठहराया जिम्मेदार

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने यूएपीए (UAPA) कानून के कठोर प्रावधानों के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पी. चिदंबरम के कार्यकाल में हुए संशोधनों के कारण उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे कैदी बिना जमानत के जेल में हैं। ओवैसी ने धारा 43डी के दुरुपयोग और अल्पसंख्यकों के खिलाफ पुलिसिया पूर्वाग्रह पर भी सवाल उठाए।

Delhi Riots

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जनवरी 9, 2026

Delhi Riots:  एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) को लेकर कांग्रेस पार्टी पर कड़ा प्रहार किया है। धुले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ओवैसी ने आरोप लगाया कि वर्तमान में कई मुस्लिम युवाओं और कार्यकर्ताओं की लंबी कैद के पीछे कांग्रेस शासन के दौरान किए गए कानूनी बदलाव मुख्य कारण हैं।

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पी. चिदंबरम की भूमिका पर सवाल

बताते चले कि, ओवैसी ने सीधे तौर पर पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम और तत्कालीन यूपीए (UPA) सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने ही अपने कार्यकाल के दौरान UAPA में संशोधन कर ‘आतंकवाद’ की परिभाषा को व्यापक और अधिक सख्त बनाया था। ओवैसी के अनुसार, इन संशोधनों ने पुलिस और जांच एजेंसियों को असीमित शक्तियां दे दी, जिसका खामियाजा आज उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे विचाराधीन कैदियों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि जिस कानून की नींव कांग्रेस ने रखी थी, आज उसी का उपयोग अल्पसंख्यकों को लंबे समय तक जेल में रखने के लिए किया जा रहा है।

लंबी हिरासत का कानूनी आधार

आपको बता दे कि, अपने संबोधन में ओवैसी ने कानून की बारीकियों पर चर्चा करते हुए UAPA की धारा 43डी का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस विशेष प्रावधान के कारण ही आरोपियों को बिना चार्जशीट दाखिल किए 180 दिनों तक हिरासत में रखा जा सकता है। ओवैसी ने कहा “मैंने लोकसभा में भी यह चेतावनी दी थी कि यह धारा न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। आज इसी कानून की वजह से अदालतों के लिए जमानत देना कठिन हो गया है, क्योंकि कानून के प्रावधान ही इतने कड़े कर दिए गए हैं।”उनका मानना है कि इस कानून के तहत जमानत मिलना लगभग असंभव बना दिया गया है, जो मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

जमीनी हकीकत और सिस्टम में व्याप्त कथित पूर्वाग्रह

ओवैसी ने ‘सच्चाई और उम्मीद’ के बीच के अंतर को रेखांकित करते हुए सिस्टम पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वर्दीधारी अधिकारियों के मन में एक विशेष समुदाय के प्रति नफरत की भावना घर कर गई है। उनके अनुसार, मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए जमीनी हकीकत बहुत कड़वी है। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम युवाओं को लक्षित कर उन्हें जानबूझकर 180 दिनों की अधिकतम अवधि तक सलाखों के पीछे रखा जाता है ताकि उनकी आवाज को दबाया जा सके।

दिल्ली दंगा मामले में सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला

ओवैसी का यह बयान सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2020 दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद आया है। हालांकि, कोर्ट ने इसी मामले में मीरान हैदर, गुलफिशा फातिमा और शिफा उर रहमान समेत पांच अन्य आरोपियों को जमानत दे दी है, लेकिन खालिद और इमाम को राहत न मिलने पर ओवैसी ने गहरी निराशा व्यक्त की। उन्होंने इसे कानून की उस कठोरता का परिणाम बताया जिसे कांग्रेस ने अपने शासनकाल में पेश किया था।

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