No Confidence Motion: ममता का मिला साथ, फिर भी स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पर क्यों फंसा पेंच?

लोकसभा में आज स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होनी थी। टीएमसी के समर्थन के बाद विपक्ष मजबूत दिख रहा था, लेकिन सदन शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने 'वेस्ट एशिया संकट' पर चर्चा की मांग उठाकर हंगामा शुरू कर दिया। क्या यह रणनीतिक पीछे हटना है?

No Confidence Motion

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 9, 2026

No Confidence Motion: संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले ही दिन सदन की कार्यवाही पूरी तरह पटरी से उतर गई। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच भारी शोर-शराबे और तनातनी के कारण लोकसभा को बार-बार स्थगित करना पड़ा। पहले से तय एजेंडे के मुताबिक, आज सदन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान होना था। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) समेत तमाम विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी कर चुके थे, लेकिन सुबह की एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद सदन के भीतर का नजारा पूरी तरह बदल गया।

इंडिया ब्लॉक की रणनीतिक बैठक: अविश्वास प्रस्ताव से ज्यादा खाड़ी संकट पर जोर

सोमवार सुबह राहुल गांधी, अखिलेश यादव और ‘इंडिया’ गठबंधन के अन्य प्रमुख नेताओं की एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। इस बैठक में विपक्षी दलों ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया। नेताओं का मानना था कि चूंकि सदन में बहुमत के आंकड़े सरकार के पक्ष में हैं, इसलिए अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग होने से विपक्ष को हार का सामना करना पड़ सकता है। इसके बजाय, मध्य पूर्व (खाड़ी देशों) में जारी युद्ध की स्थिति को सदन में प्रमुखता से उठाने का फैसला लिया गया। विपक्ष का तर्क था कि वैश्विक संघर्ष एक राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक मुद्दा है, जिसे अविश्वास प्रस्ताव से अधिक प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

केरल के सांसदों का दबाव: एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा का सवाल

कांग्रेस नेतृत्व पर केरल के सांसदों का विशेष दबाव था। दरअसल, केरल के करीब 25 लाख और पूरे भारत के लगभग एक करोड़ लोग खाड़ी देशों में कार्यरत हैं। वहां युद्ध छिड़ने से न केवल इन प्रवासियों की सुरक्षा खतरे में है, बल्कि केरल की अर्थव्यवस्था पर भी इसका सीधा असर पड़ने वाला है। विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए मांग की कि विदेश मंत्री को सदन में स्पष्ट करना चाहिए कि वहां फंसे भारतीयों को निकालने की क्या योजना है। विपक्षी सांसदों ने हाथों में बैनर लेकर प्रदर्शन किया, जिस पर प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कड़े संदेश लिखे थे।

राहुल गांधी का सरकार पर हमला: अर्थव्यवस्था और महंगाई की चिंता

सदन स्थगित होने के बाद राहुल गांधी ने मीडिया से बात करते हुए सरकार की प्राथमिकता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “पश्चिमी एशिया में जो कुछ भी हो रहा है, उसका हमारी अर्थव्यवस्था पर जबरदस्त असर पड़ेगा। शेयर बाजार पहले ही गिर चुका है और तेल के दाम बढ़ने से महंगाई आम जनता की कमर तोड़ देगी। जब जनता के मुद्दे संकट में हैं, तो सरकार चर्चा से क्यों भाग रही है? लोकसभा अध्यक्ष के मुद्दे पर हम बाद में भी बात कर सकते हैं, लेकिन देश की इकनॉमी को बचाना अभी सबसे जरूरी है।” विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी भूमिका निभाने में विफल रही है।

सरकार की जवाबी कार्रवाई: मंत्रियों ने विपक्ष को बताया ‘फेल्ड’

विपक्ष के हंगामे को देखते हुए सरकार ने भी मोर्चा संभाला। संसद भवन में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एनएसए अजीत डोभाल और सीडीएस अनिल चौहान के साथ सुरक्षा स्थिति पर चर्चा की। दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने राहुल गांधी को ‘फेल्ड नेता प्रतिपक्ष’ करार देते हुए कहा कि विपक्ष खुद अविश्वास प्रस्ताव लाकर अब चर्चा से पीछे हट रहा है। अनुराग ठाकुर ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि इनका उद्देश्य केवल हंगामा और ड्रामा करना है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि मंगलवार को गृह मंत्री अमित शाह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की मौजूदगी में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है।

Read More: Kal Ka Mausam: गर्मी की शुरुआत! दिल्ली, यूपी समेत अन्य राज्यों का जानें हाल