Operation Sindoor के शहीदों के नाम सार्वजनिक, पवन खेड़ा ने सरकार से संसद पर सवाल उठाए

ऑपरेशन सिंदूर के शहीदों के नाम सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सरकार से संसद और जवाबदेही को लेकर कई सवाल उठाए हैं। आखिर उन्होंने क्या कहा और इस मुद्दे पर सियासी विवाद क्यों बढ़ रहा है, जानिए पूरी रिपोर्ट।

Operation Sindoor

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 27, 2026

Operation Sindoor : पिछले वर्ष मई महीने में पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के जवाब में भारत सरकार ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में छिपे आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद करने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अंजाम दिया था। लंबे समय तक इस अभियान के विवरण को लेकर गोपनीयता बनी रही, लेकिन अब सरकार ने पहली बार आधिकारिक रूप से उन 6 भारतीय सैनिकों के नाम सार्वजनिक किए हैं, जिन्होंने इस महत्वपूर्ण सैन्य अभियान के दौरान राष्ट्र की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। इन नामों के सामने आने के बाद देश में एक नई बहस छिड़ गई है, जिसमें विपक्ष ने केंद्र सरकार और रक्षा मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

पवन खेड़ा का कटाक्ष: रक्षा मंत्री पर झूठ बोलने का आरोप

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने इस मुद्दे को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मोदी सरकार पर सीधा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो जारी करते हुए खेड़ा ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में केवल दो ही स्थितियां हो सकती हैं, जो सरकार की साख पर बड़े सवालिया निशान लगाती हैं। पहली संभावना यह है कि जब रक्षा मंत्री संसद में इस मुद्दे पर अपनी बात रख रहे थे, तब उन्हें इस बात की जानकारी ही नहीं थी कि हमारे 6 जवान शहीद हो चुके हैं। यदि यह सच है, तो यह उस मंत्रालय के नेतृत्व पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। दूसरी संभावना इससे भी अधिक चिंताजनक है कि रक्षा मंत्री को पूरी जानकारी थी, फिर भी उन्होंने संसद को गुमराह करना बेहतर समझा।

क्या लोकतंत्र के मंदिर में देश को गुमराह किया गया?

कांग्रेस नेता ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि यदि रक्षा मंत्री ने जानबूझकर संसद में गलत जानकारी दी, तो यह न केवल संसदीय परंपराओं का उल्लंघन है, बल्कि लोकतंत्र के मंदिर में शपथ के साथ देश से किया गया सीधा झूठ है। पवन खेड़ा के अनुसार, सरकार ने न केवल इन वीर जवानों के सर्वोच्च बलिदान को छिपाने का प्रयास किया, बल्कि उन्हें वह उचित सम्मान और आधिकारिक मान्यता मिलने में भी देरी की, जिसके वे हकदार थे। इस चुप्पी के कारण शहीद हुए सैनिकों के परिवारजनों को भी लंबे समय तक उस पारदर्शिता से वंचित रखा गया, जिसकी वे अपेक्षा रखते थे।

 

शहीदों का अपमान और विपक्ष का तीखा रुख

पवन खेड़ा ने स्पष्ट रूप से कहा कि शहीदों के बलिदान को सार्वजनिक करने में देरी या उसे छिपाने का प्रयास सीधे तौर पर हमारे सैनिकों का अपमान है। उन्होंने कहा कि कोई भी सच्चा देशभक्त इस मुद्दे पर न तो चुप रह सकता है और न ही सरकार के इन तर्कों से संतुष्ट हो सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे और संसद में उठे सवालों का जवाब दे। विपक्ष का आरोप है कि सैन्य ऑपरेशनों की आड़ में सरकार राजनीतिक लाभ-हानि का गणित बैठा रही है, जो कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर कतई स्वीकार्य नहीं है।

पारदर्शिता की बढ़ती मांग और राजनीतिक घमासान

ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए सैनिकों के नाम सामने आने के बाद, अब यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सरकार की ओर से इस पर अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन कांग्रेस के इस आक्रामक रुख ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में संसद के सत्र के दौरान विपक्ष इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है। यह स्पष्ट है कि शहीदों के सम्मान और सैन्य ऑपरेशनों में पारदर्शिता की मांग अब सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है, जिसका जवाब देना अब अनिवार्य हो गया है।

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